सूर्य षष्ठी पर तीर्थ नगरी सोरों सूर्यकुंड में सजा आस्था का दीपोत्सव
हजारों दीपों से जगमगाया प्राचीन सूर्यकुंड, सूर्यदेव की भव्य आरती में उमड़े श्रद्धालु
कासगंज। तीर्थ नगरी सोरों शूकर क्षेत्र में सूर्य षष्ठी के पावन अवसर पर पंचकोसी परिक्रमा मार्ग स्थित प्राचीन सूर्यकुंड पर भव्य दीपदान और दीपमालिका का आयोजन किया गया। शाम होते ही सूर्यकुंड परिसर हजारों दीपों की रोशनी से जगमगा उठा। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से दीप प्रज्ज्वलित किए और भगवान सूर्यदेव की भव्य आरती में शामिल होकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
दीपों की रोशनी से दिव्य नजर आया सूर्यकुंड
सूर्य षष्ठी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु सूर्यकुंड पहुंचे। श्रद्धालुओं ने कुंड परिसर में दीप जलाकर दीपमालिका सजाई। देखते ही देखते पूरा परिसर दीपों की रोशनी से आलोकित हो गया। इसके बाद भगवान सूर्यदेव की आरती की गई। आरती के दौरान सूर्यदेव के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
पौराणिक मान्यता में सूर्यकुंड का विशेष महत्व
आचार्य शशिधर द्विवेदी के अनुसार पौराणिक मान्यता है कि सूर्यदेव ने इसी स्थान पर पुत्र प्राप्ति की कामना से सत्रह हजार वर्ष तक तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान वराह ने इसी स्थल पर सूर्यदेव को गीता का उपदेश दिया था। मान्यता है कि इसके बाद सूर्यदेव को यम और यमुना नामक दो संतानों की प्राप्ति हुई।
तभी से यह स्थान शूकरक्षेत्र में वैवस्वत तीर्थ, जिसे सोरों जी का सूर्यकुंड भी कहा जाता है, के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
नई पीढ़ी तक पहुंचानी होगी सूर्यकुंड की विरासत
आचार्य प्राज्ञेश द्विवेदी ने कहा कि सूर्यकुंड शूकरक्षेत्र की प्राचीन आध्यात्मिक और पौराणिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। सूर्य षष्ठी जैसे पर्वों पर दीपदान और सूर्यदेव की आरती से धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि सूर्यकुंड की पौराणिक महत्ता और यहां से जुड़ी प्राचीन परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।
सूर्य षष्ठी पर आयोजित दीपमालिका के दौरान सूर्यकुंड का दृश्य श्रद्धा और आस्था से सराबोर नजर आया। हजारों दीपों की रोशनी और सूर्यदेव के जयकारों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। #सूर्यषष्ठी #सूर्यकुण्ड #तीर्थनगरीसोरों