“इंसाफ दो… वरना मौत ही दे दो!”
मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना में आदिवासी समाज अपनी ज़मीन, घर, जंगल, संस्कृति और अस्तित्व को बचाने के लिए ‘चिता आंदोलन’ करने को मजबूर है।
जब इंसाफ के सारे दरवाज़े बंद हो जाते हैं, तब लोग अपनी जान दांव पर लगाकर सड़क पर लेटते हैं। उनके लिए अपनी पुश्तैनी पहचान को डूबते देखना, मौत से भी बड़ा दर्द है।
केन–बेतवा लिंक परियोजना के तहत बनने वाले दौधन बांध से लगभग 22 गाँव और 7,000 से अधिक परिवार प्रभावित होंगे।
विकास तभी सार्थक है, जब वह लोगों के अधिकारों और सम्मान को साथ लेकर चले। अगर विकास की कीमत किसी का पूरा जीवन और पहचान है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
Alwar, Alwar | Jul 17, 2026