➡️ जिले के प्रमुख वैज्ञानिक एवं हेड डॉ. के. एस. यादव ने किसानों को दिए समसामयिक एवं आकस्मिक सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र, सागर के प्रमुख वैज्ञानिक एवं हेड डॉ. के. एस. यादव ने किसानों को जिले में असमान वर्षा वितरण को देखते हुए ब्लॉकवार समसामयिक एवं आकस्मिक कृषि सलाह जारी की है। उन्होंने बताया कि सागर जिले में सामान्य संचयी वर्षा 138.3 मिमी दर्ज की गई है, जो भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के सामान्य वर्षा मानक से लगभग 28 प्रतिशत कम है। हालांकि, ब्लॉकवार वर्षा में काफी अंतर होने के कारण सभी क्षेत्रों के लिए एक समान सलाह उपयुक्त नहीं है।
डॉ. यादव ने बताया कि जिन ब्लॉकों में 150 मिमी से अधिक वर्षा हुई है, उनमें गढ़ाकोटा (254.3 मिमी), जैसिंहनगर (213.5 मिमी), देवरी (165.4 मिमी), रहली (159.6 मिमी), बंडा (158.0 मिमी) और सागर (154.0 मिमी) शामिल हैं। इन क्षेत्रों के किसानों को 10 जुलाई तक सोयाबीन की बुवाई पूर्ण करने की सलाह दी गई है। इसके लिए जेएस-2034, जेएस-2303, जेएस-2309, जेएस-2172, राज-24, एनआरसी-138 एवं एनआरसी-150 जैसी कम अवधि की उन्नत किस्मों का चयन करने को कहा गया है। जलभराव वाले खेतों से 24 से 48 घंटे के भीतर पानी निकालने, बुआई से पूर्व ट्राइकोडर्मा, राइजोबियम एवं पीएसबी कल्चर से बीजोपचार करने तथा समय पर खरपतवार नियंत्रण करने की सलाह भी दी गई है। किसानों को पर्याप्त नमी होने तक यूरिया की टॉप ड्रेसिंग नहीं करने की भी सलाह दी गई है।
उन्होंने बताया कि यदि किसी कारणवश सोयाबीन की बुवाई में विलंब हो जाए तो किसान 20 से 25 जुलाई तक उन्नत किस्मों की उड़द एवं मूंग की बुवाई कर सकते हैं। साथ ही तिल एवं अरहर की खेती भी सुरक्षित विकल्प होगी। जिन खेतों में रबी मौसम में गेहूं या चना नहीं लिया जाना है, वहां सोयाबीन-अरहर को 4:2 अथवा 6:2 अनुपात में अंतरवर्तीय फसल के रूप में लेने की सलाह दी गई है।
जिन ब्लॉकों में 100 से 150 मिमी वर्षा हुई है, उनमें बीना (129.0 मिमी), राहतगढ़ (117.7 मिमी), खुरई (102.0 मिमी) तथा केसली (101.5 मिमी) शामिल हैं। इन क्षेत्रों के किसानों को उपलब्ध नमी का उपयोग करते हुए बिना अधिक वर्षा की प्रतीक्षा किए मध्यम अवधि (90–100 दिन) वाली सोयाबीन किस्मों की बुवाई रिज-फरो अथवा ब्रॉड बेड पद्धति से करने की सलाह दी गई है। नमी संरक्षण के लिए हल्की गुड़ाई या कुल्पा चलाने की भी अनुशंसा की गई है। यदि 7 से 10 दिनों तक वर्षा नहीं होती है तो सामान्यतः पुनः बुवाई की आवश्यकता नहीं होगी।
कम वर्षा वाले ब्लॉकों मालथौन (68.0 मिमी) एवं शाहगढ़ (36.2 मिमी) को सबसे अधिक जोखिम वाला क्षेत्र बताते हुए डॉ. यादव ने कहा कि इन क्षेत्रों में जल्दबाजी में सोयाबीन अथवा मक्का की बुवाई नहीं की जाए। यदि आगामी दो-तीन दिनों में लगभग 100 मिमी वर्षा होती है तभी बुवाई करें। पर्याप्त वर्षा नहीं होने की स्थिति में सोयाबीन के स्थान पर उड़द, तिल एवं अरहर की खेती को प्राथमिकता दें। किसानों को बीज सुरक्षित रखने, एक साथ पूरी बुवाई नहीं करने तथा पहली अच्छी वर्षा (50 से 75 मिमी) के बाद ही बुवाई करने की सलाह दी गई है। साथ ही खेतों में मेड़बंदी एवं वर्षा जल संरक्षण के उपाय अपनाने पर भी जोर दिया गया है।
डॉ. यादव ने बताया कि फसलवार आकस्मिक योजना के अनुसार 150 मिमी से अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में सोयाबीन की बुवाई तत्काल पूर्ण कर लेनी चाहिए, जबकि 100 से 150 मिमी वर्षा वाले क्षेत्रों में शीघ्र बुवाई की जाए। जिन क्षेत्रों में वर्षा 100 मिमी से कम हुई है, वहां अगले तीन से चार दिनों में पर्याप्त वर्षा होने की संभावना होने पर ही सोयाबीन की बुवाई करें। यदि वर्षा में और विलंब होता है तो 20 से 25 जुलाई तक उड़द, मूंग, तिल एवं रामतिल जैसी कम अवधि की फसलों की बुवाई करना अधिक लाभकारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह विकल्प विशेष रूप से मालथौन, शाहगढ़, खुरई एवं ऐसे अन्य क्षेत्रों के किसानों के लिए अधिक उपयुक्त साबित होगा।
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