कबूतरvजो पेड़ों पर नहीं, बल्कि इमारतों में बनाते हैं अपना घर*
कबूतर आम पक्षियों से थोड़े अलग हैं। ज्यादातर चिड़िया पेड़ों पर घोंसला बनाती हैं, लेकिन कबूतर को इंसानों की बनाई जगहें ज्यादा पसंद हैं।
*घोंसला कौन बनाता है?*
- *नर कबूतर*: घोंसला बनाने का सामान जुटाता है। ये तिनके, छोटी टहनियाँ, सूखी घास, कभी-कभी धागे या प्लास्टिक भी उठा लाता है।
- *मादा कबूतर*: नर के लाए सामान को एक जगह रखकर घोंसले को आकार देती है। घोंसला बनाने की असली कारीगर वही होती है।
*घोंसला कैसा होता है?*
इनका घोंसला बहुत *सरल और बिखरा हुआ* लगता है। पहली नजर में तो ये बस कुछ तिनके इधर-उधर रखे जैसे दिखते हैं। लेकिन ये अंडे देने और चूजों को पालने के लिए काफी होता है। कबूतर एक ही घोंसले में बार-बार अंडे देते हैं, तो हर बार उसमें थोड़े और तिनके जुड़ते जाते हैं।
*घोंसला कहाँ बनाते हैं?*
कबूतर असल में *चट्टानों और गुफाओं* में रहने वाले पक्षी हैं। शहरों में उन्हें पेड़ कम और इमारतें ज्यादा मिलती हैं। इसलिए वो ऐसी जगह ढूंढते हैं जो गुफा जैसी हो - अंधेरी, सुरक्षित और बारिश से बची हुई। जैसे:
- AC के पीछे की जगह
- घरों के छज्जे और बालकनी के कोने
- ऊँची इमारतों के किनारे और खिड़कियों की ओट
- पुलों के नीचे, गोदामों में
इसी वजह से कबूतर शहरों में इतने कामयाब हैं। उन्हें पेड़ की जरूरत नहीं, हमारी इमारतें ही उनकी गुफा बन गई हैं।