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किसान का आरोप: "10 हजार रुपये न देने पर काटा गया भारी चालान" जहानाबाद मंडी में भ्रष्टाचार के आरोप से मचा हड़कंप, डीएम से की गई शिकायत ऑडियो रिकॉर्डिंग और स्क्रीनशॉट होने का दावा, निष्पक्ष जांच की मांग ✒️रिपोर्ट नागेंद्र पांडये फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) जिले के बकेवर थाना क्षेत्र के जरारा गांव निवासी एक किसान ने जहानाबाद मंडी प्रशासन के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसान का दावा है कि गेहूं बेचने के लिए जाते समय उससे कथित तौर पर 10 हजार रुपये की मांग की गई और रकम न देने पर भारी जुर्माना लगाया गया। किसान ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फतेहपुर जिले में मंडी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। बकेवर थाना क्षेत्र के ग्राम जरारा निवासी किसान जगराम यादव ने जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि जहानाबाद मंडी में गेहूं लेकर पहुंचने के दौरान उन्हें कथित रूप से परेशान किया गया और रिश्वत की मांग की गई। शिकायत के अनुसार किसान आगामी धान की फसल के लिए बीज, खाद और कृषि कार्यों की व्यवस्था हेतु अपना गेहूं पिकअप वाहन से बेचने जा रहे थे। रास्ते में मंडी निरीक्षक द्वारा वाहन को रोककर मंडी कार्यालय ले जाया गया। किसान का आरोप है कि कार्यालय के भीतर उनसे कथित तौर पर 10 हजार रुपये मांगे गए। किसान का कहना है कि जब उन्होंने रुपये देने से इंकार किया तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया तथा कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि बाद में वाहन पर लगभग 36,500 रुपये का चालान किया गया और अतिरिक्त धनराशि जमा करने का दबाव बनाया गया। ऑडियो रिकॉर्डिंग और स्क्रीनशॉट होने का दावा शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि उनके पास कथित बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग और कुछ डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं। किसान ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। किसान ने उठाए कई सवाल किसान का कहना है कि उसकी गेहूं की पूरी खेप की कीमत लगभग 66 से 70 हजार रुपये के बीच थी। ऐसे में भारी आर्थिक दंड और अतिरिक्त धनराशि की मांग से वह गंभीर आर्थिक संकट में आ गया है। ग्रामीण क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। किसान संगठनों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो यह किसानों के हितों और सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करेगा। प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें फिलहाल मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में पहुंच चुका है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता क्या है और संबंधित पक्षों से क्या स्पष्टीकरण लिया जाता है। यह मामला फिलहाल शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किसान द्वारा लगाए गए आरोप कितने सही हैं। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि आरोप असत्य पाए जाते हैं तो उसके अनुसार भी विधिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी। "ईमानदार व्यवस्था ही किसान और देश दोनों को मजबूत बना सकती है।" 👇👇 @dgpup @RSSorg @UPGovt @wpl1090 @RSSgeet @Uppolice @MIB_India @PMOIndia @HMOIndia @abmanglik @VHPDigital @igrangealld @myogioffice @InfoDeptUP @dmfatehpur @sdmsadarftp @CMOfficeUP @CMOUP_RC @UPPRD1948 @ChiefSecyUP @ChiefSecyUP @MahantYogiG @FatehpurSdm @fatehpurpolice @BajrangDalOrg @112UttarPradesh @myogiadityanath @CommissionerPrg @ADGZonPrayagraj 👇👇👇 #NDNews #दैनिकनिष्पक्षधारा #Fatehpur #JahanabadMandi #FarmerIssue #MandiCorruption #KisanNews #BreakingNews #FatehpurNews #जगरामयादव #जहानाबादमंडी #किसानशिकायत #मंडीनिरीक्षक #फतेहपुर #उत्तरप्रदेश #कृषिविभाग #जांचकीमांग 👇👇 🟥 ND NEWS | दैनिक निष्पक्ष धारा मुख्य संपादक / संस्थापक: राजन सिंह हाड़ा सह-संपादक: शालिनी सिंह भदौरिया 📍 कार्यालय-3: U158, हीरा स्वीट्स के पास, विकास मार्ग, लक्ष्मी नगर, पूर्वी दिल्ली, पिन कोड – 110092 (NCR) 📍 कार्यालय-2: विधानसभा रोड, बर्लिंगटन चौराहा, लखनऊ – 226001 (UP) 📍 कार्यालय-1: 1/1 अटल बिहारी चौराहा, नियर बर्मा चौराहा, फतेहपुर – 212601 (UP) 📅 दिनांक: 18 जून 2026 📆 दिन: गुरुवार 📧 Email: ndnewschannel@gmail.com 📞 मोबाइल: 9696119696

Fatehpur, Fatehpur | Jun 18, 2026

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खागा तहसील में लेखपाल पर रिश्वत लेने का आरोप, वीडियो वायरल

खसरा बनाने के नाम पर कथित घूसखोरी का मामला सोशल मीडिया पर बना चर्चा का विषय

वायरल वीडियो के बाद कार्रवाई की मांग तेज, जांच पर टिकी लोगों की निगाहें

✒️रिपोर्ट पिंटू तिवारी

फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)। खागा तहसील क्षेत्र से एक कथित रिश्वतखोरी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में कछरा ग्राम पंचायत क्षेत्र से जुड़े एक लेखपाल पर खसरा तैयार करने के नाम पर धनराशि लेने के आरोप लगाए जा रहे हैं। वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद प्रशासनिक पारदर्शिता, राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार विरोधी दावों को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की आधिकारिक जांच की प्रतीक्षा की जा रही है।

जनपद फतेहपुर की खागा तहसील में तैनात बताए जा रहे लेखपाल शिव सिंह पटेल से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि खसरा तैयार करने के नाम पर कथित रूप से रिश्वत की मांग और लेन-देन की बातचीत की जा रही है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कथित तौर पर यह भी सुनाई देने का दावा किया जा रहा है कि संबंधित कर्मचारी स्वयं के साथ-साथ अन्य लोगों के हिस्से की भी चर्चा कर रहा है। वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्रीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार लगातार भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था की बात करती रही है, लेकिन यदि वायरल वीडियो में लगाए जा रहे आरोप सही पाए जाते हैं तो यह प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

जांच और कार्रवाई को लेकर उठे सवाल

मामले के सामने आने के बाद अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि क्या मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी या फिर मामला केवल जांच तक सीमित रह जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच, डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक पड़ताल और तथ्यों के सत्यापन के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाना चाहिए।

प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस

वायरल वीडियो ने एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। ग्रामीणों का कहना है कि भूमि अभिलेख, खसरा, खतौनी और राजस्व से जुड़े कार्यों में पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा या भ्रष्टाचार का सामना न करना पड़े।

फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों के आधार पर चर्चा में है। आरोपों की सत्यता की पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही हो सकेगी। यदि प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो इससे न केवल तथ्य सामने आएंगे बल्कि सरकारी कार्यप्रणाली में जनता का विश्वास भी मजबूत होगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है।

🟥 ND NEWS की अपील

भ्रष्टाचार किसी भी व्यवस्था की विश्वसनीयता को कमजोर करता है। यदि किसी नागरिक के पास किसी सरकारी कर्मचारी के विरुद्ध ठोस साक्ष्य हैं तो उन्हें संबंधित विभाग, सतर्कता विभाग या सक्षम प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए।
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🟥 ND NEWS | दैनिक निष्पक्ष धारा
मुख्य संपादक / संस्थापक: राजन सिंह हाड़ा
सह-संपादक: शालिनी सिंह भदौरिया
✒️ रिपोर्ट : पिंटू तिवारी
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खागा तहसील में लेखपाल पर रिश्वत लेने का आरोप, वीडियो वायरल खसरा बनाने के नाम पर कथित घूसखोरी का मामला सोशल मीडिया पर बना चर्चा का विषय वायरल वीडियो के बाद कार्रवाई की मांग तेज, जांच पर टिकी लोगों की निगाहें ✒️रिपोर्ट पिंटू तिवारी फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)। खागा तहसील क्षेत्र से एक कथित रिश्वतखोरी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में कछरा ग्राम पंचायत क्षेत्र से जुड़े एक लेखपाल पर खसरा तैयार करने के नाम पर धनराशि लेने के आरोप लगाए जा रहे हैं। वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद प्रशासनिक पारदर्शिता, राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार विरोधी दावों को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की आधिकारिक जांच की प्रतीक्षा की जा रही है। जनपद फतेहपुर की खागा तहसील में तैनात बताए जा रहे लेखपाल शिव सिंह पटेल से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि खसरा तैयार करने के नाम पर कथित रूप से रिश्वत की मांग और लेन-देन की बातचीत की जा रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कथित तौर पर यह भी सुनाई देने का दावा किया जा रहा है कि संबंधित कर्मचारी स्वयं के साथ-साथ अन्य लोगों के हिस्से की भी चर्चा कर रहा है। वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्रीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार लगातार भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था की बात करती रही है, लेकिन यदि वायरल वीडियो में लगाए जा रहे आरोप सही पाए जाते हैं तो यह प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच और कार्रवाई को लेकर उठे सवाल मामले के सामने आने के बाद अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि क्या मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी या फिर मामला केवल जांच तक सीमित रह जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच, डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक पड़ताल और तथ्यों के सत्यापन के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाना चाहिए। प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस वायरल वीडियो ने एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। ग्रामीणों का कहना है कि भूमि अभिलेख, खसरा, खतौनी और राजस्व से जुड़े कार्यों में पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा या भ्रष्टाचार का सामना न करना पड़े। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों के आधार पर चर्चा में है। आरोपों की सत्यता की पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही हो सकेगी। यदि प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो इससे न केवल तथ्य सामने आएंगे बल्कि सरकारी कार्यप्रणाली में जनता का विश्वास भी मजबूत होगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है। 🟥 ND NEWS की अपील भ्रष्टाचार किसी भी व्यवस्था की विश्वसनीयता को कमजोर करता है। यदि किसी नागरिक के पास किसी सरकारी कर्मचारी के विरुद्ध ठोस साक्ष्य हैं तो उन्हें संबंधित विभाग, सतर्कता विभाग या सक्षम प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। 👇👇 @dgpup @RSSorg @UPGovt @wpl1090 @RSSgeet @Uppolice @MIB_India @PMOIndia @HMOIndia @abmanglik @VHPDigital @igrangealld @myogioffice @InfoDeptUP @dmfatehpur @sdmsadarftp @CMOfficeUP @CMOUP_RC @UPPRD1948 @ChiefSecyUP @ChiefSecyUP @MahantYogiG @FatehpurSdm @fatehpurpolice @BajrangDalOrg @112UttarPradesh @myogiadityanath @CommissionerPrg @ADGZonPrayagraj 👇👇 #NDNews #दैनिकनिष्पक्षधारा #Fatehpur #Khaga #Lekhpal #RevenueDepartment #Corruption #ViralVideo #BreakingNews #UPNews #Khatauni #Khasra #Transparency #GoodGovernance #AntiCorruption #FatehpurNews 👇👇 🟥 ND NEWS | दैनिक निष्पक्ष धारा मुख्य संपादक / संस्थापक: राजन सिंह हाड़ा सह-संपादक: शालिनी सिंह भदौरिया ✒️ रिपोर्ट : पिंटू तिवारी 📍 कार्यालय-3: U158, हीरा स्वीट्स के पास, विकास मार्ग, लक्ष्मी नगर, पूर्वी दिल्ली, पिन कोड – 110092 (NCR) 📍 कार्यालय-2: विधानसभा रोड, बर्लिंगटन चौराहा, लखनऊ – 226001 (UP) 📍 कार्यालय-1: 1/1 अटल बिहारी चौराहा, नियर बर्मा चौराहा, फतेहपुर – 212601 (UP) 📅 दिनांक: 18 जून 2026 📆 दिन: गुरुवार 📧 Email: ndnewschannel@gmail.com 📞 मोबाइल: 9696119696

Fatehpur, Fatehpur | Jun 18, 2026

टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का प्रदर्शन, बांदा में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सौंपा ज्ञापन

पूर्व से सेवारत शिक्षकों के भविष्य को लेकर उठी चिंता, केंद्र और राज्य सरकार से मांगा समाधान

सैकड़ों शिक्षकों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम भेजा ज्ञापन

✒️रिपोर्ट राजेश सिंह

बांदा (उत्तर प्रदेश)। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता लागू किए जाने के विरोध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने बांदा में प्रदर्शन कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। महासंघ का कहना है कि पूर्व से विधिवत नियुक्त शिक्षकों पर बाद में लागू किए गए पात्रता मानदंड थोपना प्राकृतिक न्याय और विधिक सिद्धांतों के विरुद्ध है। इसी मांग को लेकर सैकड़ों शिक्षकों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा।

जनपद बांदा में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के बैनर तले गुरुवार को बड़ी संख्या में शिक्षक और शिक्षिकाएं जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और टीईटी अनिवार्यता के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा गया।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष पंकज सिंह ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1 सितंबर 2025 तथा पुनर्विचार याचिका में 29 मई 2026 को दिए गए निर्णयों के बाद देशभर के लाखों शिक्षकों में भविष्य को लेकर असमंजस और चिंता का माहौल है। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति टीईटी व्यवस्था लागू होने से पहले विधिवत प्रक्रिया के तहत हुई थी, उन पर बाद में लागू पात्रता मानकों को लागू करना न्यायसंगत नहीं है।

उन्होंने कहा कि भारतीय विधिक व्यवस्था का मूल सिद्धांत है कि कोई भी नियम या नीति सामान्यतः उसके लागू होने की तिथि से प्रभावी होती है, न कि पूर्व प्रभाव से। ऐसे में वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों के अधिकारों को प्रभावित करना उचित नहीं माना जा सकता।

आंदोलन की चेतावनी

महासंघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन का पहला चरण है। यदि सरकार द्वारा शिक्षकों की मांगों पर विचार नहीं किया गया तो संगठन प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक आंदोलन करेगा। महासंघ का कहना है कि वह किसी भी शिक्षक की नौकरी पर संकट नहीं आने देगा और आवश्यकता पड़ने पर सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया जाएगा।

शिक्षकों ने उठाई स्थायी समाधान की मांग

ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि भारत सरकार संसद में आवश्यक विधायी संशोधन या विशेष प्रावधान लाकर पूर्व से कार्यरत शिक्षकों को स्थायी राहत प्रदान करे। साथ ही सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस को समाप्त किया जाए।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला एवं ब्लॉक स्तरीय पदाधिकारी, शिक्षक एवं शिक्षिकाएं बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

बांदा में हुआ यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक सेवा सुरक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे को सामने लाता है। फिलहाल शिक्षकों की मांगों पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित सरकारें और शिक्षा विभाग इस विषय पर क्या रुख अपनाते हैं और शिक्षकों की चिंताओं का समाधान किस प्रकार किया जाता है।

🟥 ND NEWS की अपील

शिक्षा किसी भी राष्ट्र की प्रगति की आधारशिला है। शिक्षक समाज निर्माण के प्रमुख स्तंभ हैं। सरकार, न्यायपालिका, शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठनों को संवाद और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो और शिक्षकों के अधिकार भी सुरक्षित रहें।
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🟥 ND NEWS | दैनिक निष्पक्ष धारा
मुख्य संपादक / संस्थापक: राजन सिंह हाड़ा
सह-संपादक: शालिनी सिंह भदौरिया
📍 कार्यालय-3: U158, हीरा स्वीट्स के पास, विकास मार्ग, लक्ष्मी नगर, पूर्वी दिल्ली, पिन कोड – 110092 (NCR)
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📅 दिनांक: 18 जून 2026
📆 दिन: गुरुवार
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टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का प्रदर्शन, बांदा में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सौंपा ज्ञापन पूर्व से सेवारत शिक्षकों के भविष्य को लेकर उठी चिंता, केंद्र और राज्य सरकार से मांगा समाधान सैकड़ों शिक्षकों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम भेजा ज्ञापन ✒️रिपोर्ट राजेश सिंह बांदा (उत्तर प्रदेश)। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता लागू किए जाने के विरोध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने बांदा में प्रदर्शन कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। महासंघ का कहना है कि पूर्व से विधिवत नियुक्त शिक्षकों पर बाद में लागू किए गए पात्रता मानदंड थोपना प्राकृतिक न्याय और विधिक सिद्धांतों के विरुद्ध है। इसी मांग को लेकर सैकड़ों शिक्षकों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। जनपद बांदा में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के बैनर तले गुरुवार को बड़ी संख्या में शिक्षक और शिक्षिकाएं जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और टीईटी अनिवार्यता के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा गया। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष पंकज सिंह ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1 सितंबर 2025 तथा पुनर्विचार याचिका में 29 मई 2026 को दिए गए निर्णयों के बाद देशभर के लाखों शिक्षकों में भविष्य को लेकर असमंजस और चिंता का माहौल है। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति टीईटी व्यवस्था लागू होने से पहले विधिवत प्रक्रिया के तहत हुई थी, उन पर बाद में लागू पात्रता मानकों को लागू करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय विधिक व्यवस्था का मूल सिद्धांत है कि कोई भी नियम या नीति सामान्यतः उसके लागू होने की तिथि से प्रभावी होती है, न कि पूर्व प्रभाव से। ऐसे में वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों के अधिकारों को प्रभावित करना उचित नहीं माना जा सकता। आंदोलन की चेतावनी महासंघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन का पहला चरण है। यदि सरकार द्वारा शिक्षकों की मांगों पर विचार नहीं किया गया तो संगठन प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक आंदोलन करेगा। महासंघ का कहना है कि वह किसी भी शिक्षक की नौकरी पर संकट नहीं आने देगा और आवश्यकता पड़ने पर सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया जाएगा। शिक्षकों ने उठाई स्थायी समाधान की मांग ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि भारत सरकार संसद में आवश्यक विधायी संशोधन या विशेष प्रावधान लाकर पूर्व से कार्यरत शिक्षकों को स्थायी राहत प्रदान करे। साथ ही सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस को समाप्त किया जाए। कार्यक्रम में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला एवं ब्लॉक स्तरीय पदाधिकारी, शिक्षक एवं शिक्षिकाएं बड़ी संख्या में मौजूद रहे। बांदा में हुआ यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक सेवा सुरक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे को सामने लाता है। फिलहाल शिक्षकों की मांगों पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित सरकारें और शिक्षा विभाग इस विषय पर क्या रुख अपनाते हैं और शिक्षकों की चिंताओं का समाधान किस प्रकार किया जाता है। 🟥 ND NEWS की अपील शिक्षा किसी भी राष्ट्र की प्रगति की आधारशिला है। शिक्षक समाज निर्माण के प्रमुख स्तंभ हैं। सरकार, न्यायपालिका, शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठनों को संवाद और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो और शिक्षकों के अधिकार भी सुरक्षित रहें। 👇👇 @bandapolice @PMOIndia @EduMinOfIndia @myogiadityanath @CMOfficeUP @UPGovt @InfoDeptUP @ChiefSecyUP @DMBanda @basicshiksha_up @UPGovtNews 👇👇 #NDNews #दैनिकनिष्पक्षधारा #Banda #NationalEducationalFederation #TET #TeacherNews #EducationNews #UPTeachers #TeachersProtest #BandaNews #EducationPolicy #UPGovernment #TeacherRights #BreakingNews 👇👇 🟥 ND NEWS | दैनिक निष्पक्ष धारा मुख्य संपादक / संस्थापक: राजन सिंह हाड़ा सह-संपादक: शालिनी सिंह भदौरिया 📍 कार्यालय-3: U158, हीरा स्वीट्स के पास, विकास मार्ग, लक्ष्मी नगर, पूर्वी दिल्ली, पिन कोड – 110092 (NCR) 📍 कार्यालय-2: विधानसभा रोड, बर्लिंगटन चौराहा, लखनऊ – 226001 (UP) 📍 कार्यालय-1: 1/1 अटल बिहारी चौराहा, नियर बर्मा चौराहा, फतेहपुर – 212601 (UP) 📅 दिनांक: 18 जून 2026 📆 दिन: गुरुवार 📞 मोबाइल: 9696119696

Fatehpur, Fatehpur | Jun 18, 2026

टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का प्रदर्शन, बांदा में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सौंपा ज्ञापन

पूर्व से सेवारत शिक्षकों के भविष्य को लेकर उठी चिंता, केंद्र और राज्य सरकार से मांगा समाधान

सैकड़ों शिक्षकों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम भेजा ज्ञापन

✒️रिपोर्ट राजेश सिंह

बांदा (उत्तर प्रदेश)। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता लागू किए जाने के विरोध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने बांदा में प्रदर्शन कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। महासंघ का कहना है कि पूर्व से विधिवत नियुक्त शिक्षकों पर बाद में लागू किए गए पात्रता मानदंड थोपना प्राकृतिक न्याय और विधिक सिद्धांतों के विरुद्ध है। इसी मांग को लेकर सैकड़ों शिक्षकों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा।

जनपद बांदा में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के बैनर तले गुरुवार को बड़ी संख्या में शिक्षक और शिक्षिकाएं जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और टीईटी अनिवार्यता के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा गया।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष पंकज सिंह ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1 सितंबर 2025 तथा पुनर्विचार याचिका में 29 मई 2026 को दिए गए निर्णयों के बाद देशभर के लाखों शिक्षकों में भविष्य को लेकर असमंजस और चिंता का माहौल है। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति टीईटी व्यवस्था लागू होने से पहले विधिवत प्रक्रिया के तहत हुई थी, उन पर बाद में लागू पात्रता मानकों को लागू करना न्यायसंगत नहीं है।

उन्होंने कहा कि भारतीय विधिक व्यवस्था का मूल सिद्धांत है कि कोई भी नियम या नीति सामान्यतः उसके लागू होने की तिथि से प्रभावी होती है, न कि पूर्व प्रभाव से। ऐसे में वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों के अधिकारों को प्रभावित करना उचित नहीं माना जा सकता।

आंदोलन की चेतावनी

महासंघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन का पहला चरण है। यदि सरकार द्वारा शिक्षकों की मांगों पर विचार नहीं किया गया तो संगठन प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक आंदोलन करेगा। महासंघ का कहना है कि वह किसी भी शिक्षक की नौकरी पर संकट नहीं आने देगा और आवश्यकता पड़ने पर सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया जाएगा।

शिक्षकों ने उठाई स्थायी समाधान की मांग

ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि भारत सरकार संसद में आवश्यक विधायी संशोधन या विशेष प्रावधान लाकर पूर्व से कार्यरत शिक्षकों को स्थायी राहत प्रदान करे। साथ ही सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस को समाप्त किया जाए।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला एवं ब्लॉक स्तरीय पदाधिकारी, शिक्षक एवं शिक्षिकाएं बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

बांदा में हुआ यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक सेवा सुरक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे को सामने लाता है। फिलहाल शिक्षकों की मांगों पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित सरकारें और शिक्षा विभाग इस विषय पर क्या रुख अपनाते हैं और शिक्षकों की चिंताओं का समाधान किस प्रकार किया जाता है।

🟥 ND NEWS की अपील

शिक्षा किसी भी राष्ट्र की प्रगति की आधारशिला है। शिक्षक समाज निर्माण के प्रमुख स्तंभ हैं। सरकार, न्यायपालिका, शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठनों को संवाद और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो और शिक्षकों के अधिकार भी सुरक्षित रहें।
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सह-संपादक: शालिनी सिंह भदौरिया
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टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का प्रदर्शन, बांदा में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सौंपा ज्ञापन पूर्व से सेवारत शिक्षकों के भविष्य को लेकर उठी चिंता, केंद्र और राज्य सरकार से मांगा समाधान सैकड़ों शिक्षकों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम भेजा ज्ञापन ✒️रिपोर्ट राजेश सिंह बांदा (उत्तर प्रदेश)। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता लागू किए जाने के विरोध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने बांदा में प्रदर्शन कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। महासंघ का कहना है कि पूर्व से विधिवत नियुक्त शिक्षकों पर बाद में लागू किए गए पात्रता मानदंड थोपना प्राकृतिक न्याय और विधिक सिद्धांतों के विरुद्ध है। इसी मांग को लेकर सैकड़ों शिक्षकों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। जनपद बांदा में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के बैनर तले गुरुवार को बड़ी संख्या में शिक्षक और शिक्षिकाएं जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और टीईटी अनिवार्यता के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा गया। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष पंकज सिंह ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1 सितंबर 2025 तथा पुनर्विचार याचिका में 29 मई 2026 को दिए गए निर्णयों के बाद देशभर के लाखों शिक्षकों में भविष्य को लेकर असमंजस और चिंता का माहौल है। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति टीईटी व्यवस्था लागू होने से पहले विधिवत प्रक्रिया के तहत हुई थी, उन पर बाद में लागू पात्रता मानकों को लागू करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय विधिक व्यवस्था का मूल सिद्धांत है कि कोई भी नियम या नीति सामान्यतः उसके लागू होने की तिथि से प्रभावी होती है, न कि पूर्व प्रभाव से। ऐसे में वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों के अधिकारों को प्रभावित करना उचित नहीं माना जा सकता। आंदोलन की चेतावनी महासंघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन का पहला चरण है। यदि सरकार द्वारा शिक्षकों की मांगों पर विचार नहीं किया गया तो संगठन प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक आंदोलन करेगा। महासंघ का कहना है कि वह किसी भी शिक्षक की नौकरी पर संकट नहीं आने देगा और आवश्यकता पड़ने पर सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया जाएगा। शिक्षकों ने उठाई स्थायी समाधान की मांग ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि भारत सरकार संसद में आवश्यक विधायी संशोधन या विशेष प्रावधान लाकर पूर्व से कार्यरत शिक्षकों को स्थायी राहत प्रदान करे। साथ ही सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस को समाप्त किया जाए। कार्यक्रम में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला एवं ब्लॉक स्तरीय पदाधिकारी, शिक्षक एवं शिक्षिकाएं बड़ी संख्या में मौजूद रहे। बांदा में हुआ यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक सेवा सुरक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे को सामने लाता है। फिलहाल शिक्षकों की मांगों पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित सरकारें और शिक्षा विभाग इस विषय पर क्या रुख अपनाते हैं और शिक्षकों की चिंताओं का समाधान किस प्रकार किया जाता है। 🟥 ND NEWS की अपील शिक्षा किसी भी राष्ट्र की प्रगति की आधारशिला है। शिक्षक समाज निर्माण के प्रमुख स्तंभ हैं। सरकार, न्यायपालिका, शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठनों को संवाद और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो और शिक्षकों के अधिकार भी सुरक्षित रहें। 👇👇 @bandapolice @PMOIndia @EduMinOfIndia @myogiadityanath @CMOfficeUP @UPGovt @InfoDeptUP @ChiefSecyUP @DMBanda @basicshiksha_up @UPGovtNews 👇👇 #NDNews #दैनिकनिष्पक्षधारा #Banda #NationalEducationalFederation #TET #TeacherNews #EducationNews #UPTeachers #TeachersProtest #BandaNews #EducationPolicy #UPGovernment #TeacherRights #BreakingNews 👇👇 🟥 ND NEWS | दैनिक निष्पक्ष धारा मुख्य संपादक / संस्थापक: राजन सिंह हाड़ा सह-संपादक: शालिनी सिंह भदौरिया 📍 कार्यालय-3: U158, हीरा स्वीट्स के पास, विकास मार्ग, लक्ष्मी नगर, पूर्वी दिल्ली, पिन कोड – 110092 (NCR) 📍 कार्यालय-2: विधानसभा रोड, बर्लिंगटन चौराहा, लखनऊ – 226001 (UP) 📍 कार्यालय-1: 1/1 अटल बिहारी चौराहा, नियर बर्मा चौराहा, फतेहपुर – 212601 (UP) 📅 दिनांक: 18 जून 2026 📆 दिन: गुरुवार 📞 मोबाइल: 9696119696

Fatehpur, Fatehpur | Jun 18, 2026

किसान का आरोप: "10 हजार रुपये न देने पर काटा गया भारी चालान"

जहानाबाद मंडी में भ्रष्टाचार के आरोप से मचा हड़कंप, डीएम से की गई शिकायत

ऑडियो रिकॉर्डिंग और स्क्रीनशॉट होने का दावा, निष्पक्ष जांच की मांग

✒️रिपोर्ट नागेंद्र पांडये

फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) जिले के बकेवर थाना क्षेत्र के जरारा गांव निवासी एक किसान ने जहानाबाद मंडी प्रशासन के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसान का दावा है कि गेहूं बेचने के लिए जाते समय उससे कथित तौर पर 10 हजार रुपये की मांग की गई और रकम न देने पर भारी जुर्माना लगाया गया। किसान ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फतेहपुर जिले में मंडी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। बकेवर थाना क्षेत्र के ग्राम जरारा निवासी किसान जगराम यादव ने जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि जहानाबाद मंडी में गेहूं लेकर पहुंचने के दौरान उन्हें कथित रूप से परेशान किया गया और रिश्वत की मांग की गई।

शिकायत के अनुसार किसान आगामी धान की फसल के लिए बीज, खाद और कृषि कार्यों की व्यवस्था हेतु अपना गेहूं पिकअप वाहन से बेचने जा रहे थे। रास्ते में मंडी निरीक्षक द्वारा वाहन को रोककर मंडी कार्यालय ले जाया गया। किसान का आरोप है कि कार्यालय के भीतर उनसे कथित तौर पर 10 हजार रुपये मांगे गए।

किसान का कहना है कि जब उन्होंने रुपये देने से इंकार किया तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया तथा कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि बाद में वाहन पर लगभग 36,500 रुपये का चालान किया गया और अतिरिक्त धनराशि जमा करने का दबाव बनाया गया।

ऑडियो रिकॉर्डिंग और स्क्रीनशॉट होने का दावा

शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि उनके पास कथित बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग और कुछ डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं। किसान ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

किसान ने उठाए कई सवाल

किसान का कहना है कि उसकी गेहूं की पूरी खेप की कीमत लगभग 66 से 70 हजार रुपये के बीच थी। ऐसे में भारी आर्थिक दंड और अतिरिक्त धनराशि की मांग से वह गंभीर आर्थिक संकट में आ गया है।

ग्रामीण क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। किसान संगठनों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो यह किसानों के हितों और सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।

प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें

फिलहाल मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में पहुंच चुका है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता क्या है और संबंधित पक्षों से क्या स्पष्टीकरण लिया जाता है।

यह मामला फिलहाल शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किसान द्वारा लगाए गए आरोप कितने सही हैं। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि आरोप असत्य पाए जाते हैं तो उसके अनुसार भी विधिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

"ईमानदार व्यवस्था ही किसान और देश दोनों को मजबूत बना सकती है।"
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किसान का आरोप: "10 हजार रुपये न देने पर काटा गया भारी चालान" जहानाबाद मंडी में भ्रष्टाचार के आरोप से मचा हड़कंप, डीएम से की गई शिकायत ऑडियो रिकॉर्डिंग और स्क्रीनशॉट होने का दावा, निष्पक्ष जांच की मांग ✒️रिपोर्ट नागेंद्र पांडये फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) जिले के बकेवर थाना क्षेत्र के जरारा गांव निवासी एक किसान ने जहानाबाद मंडी प्रशासन के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसान का दावा है कि गेहूं बेचने के लिए जाते समय उससे कथित तौर पर 10 हजार रुपये की मांग की गई और रकम न देने पर भारी जुर्माना लगाया गया। किसान ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फतेहपुर जिले में मंडी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। बकेवर थाना क्षेत्र के ग्राम जरारा निवासी किसान जगराम यादव ने जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि जहानाबाद मंडी में गेहूं लेकर पहुंचने के दौरान उन्हें कथित रूप से परेशान किया गया और रिश्वत की मांग की गई। शिकायत के अनुसार किसान आगामी धान की फसल के लिए बीज, खाद और कृषि कार्यों की व्यवस्था हेतु अपना गेहूं पिकअप वाहन से बेचने जा रहे थे। रास्ते में मंडी निरीक्षक द्वारा वाहन को रोककर मंडी कार्यालय ले जाया गया। किसान का आरोप है कि कार्यालय के भीतर उनसे कथित तौर पर 10 हजार रुपये मांगे गए। किसान का कहना है कि जब उन्होंने रुपये देने से इंकार किया तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया तथा कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि बाद में वाहन पर लगभग 36,500 रुपये का चालान किया गया और अतिरिक्त धनराशि जमा करने का दबाव बनाया गया। ऑडियो रिकॉर्डिंग और स्क्रीनशॉट होने का दावा शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि उनके पास कथित बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग और कुछ डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं। किसान ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। किसान ने उठाए कई सवाल किसान का कहना है कि उसकी गेहूं की पूरी खेप की कीमत लगभग 66 से 70 हजार रुपये के बीच थी। ऐसे में भारी आर्थिक दंड और अतिरिक्त धनराशि की मांग से वह गंभीर आर्थिक संकट में आ गया है। ग्रामीण क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। किसान संगठनों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो यह किसानों के हितों और सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करेगा। प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें फिलहाल मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में पहुंच चुका है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता क्या है और संबंधित पक्षों से क्या स्पष्टीकरण लिया जाता है। यह मामला फिलहाल शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किसान द्वारा लगाए गए आरोप कितने सही हैं। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि आरोप असत्य पाए जाते हैं तो उसके अनुसार भी विधिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी। "ईमानदार व्यवस्था ही किसान और देश दोनों को मजबूत बना सकती है।" 👇👇 @dgpup @RSSorg @UPGovt @wpl1090 @RSSgeet @Uppolice @MIB_India @PMOIndia @HMOIndia @abmanglik @VHPDigital @igrangealld @myogioffice @InfoDeptUP @dmfatehpur @sdmsadarftp @CMOfficeUP @CMOUP_RC @UPPRD1948 @ChiefSecyUP @ChiefSecyUP @MahantYogiG @FatehpurSdm @fatehpurpolice @BajrangDalOrg @112UttarPradesh @myogiadityanath @CommissionerPrg @ADGZonPrayagraj 👇👇👇 #NDNews #दैनिकनिष्पक्षधारा #Fatehpur #JahanabadMandi #FarmerIssue #MandiCorruption #KisanNews #BreakingNews #FatehpurNews #जगरामयादव #जहानाबादमंडी #किसानशिकायत #मंडीनिरीक्षक #फतेहपुर #उत्तरप्रदेश #कृषिविभाग #जांचकीमांग 👇👇 🟥 ND NEWS | दैनिक निष्पक्ष धारा मुख्य संपादक / संस्थापक: राजन सिंह हाड़ा सह-संपादक: शालिनी सिंह भदौरिया 📍 कार्यालय-3: U158, हीरा स्वीट्स के पास, विकास मार्ग, लक्ष्मी नगर, पूर्वी दिल्ली, पिन कोड – 110092 (NCR) 📍 कार्यालय-2: विधानसभा रोड, बर्लिंगटन चौराहा, लखनऊ – 226001 (UP) 📍 कार्यालय-1: 1/1 अटल बिहारी चौराहा, नियर बर्मा चौराहा, फतेहपुर – 212601 (UP) 📅 दिनांक: 18 जून 2026 📆 दिन: गुरुवार 📧 Email: ndnewschannel@gmail.com 📞 मोबाइल: 9696119696 - Fatehpur News