नाटी से पहले गूंजते थे लामण और नेहनी के स्वर
कुल्लू की पारंपरिक लोकसंस्कृति में नाटी केवल नृत्य नहीं, बल्कि गीत और सामूहिक गायन से जुड़ी परंपरा रही है। नाटी शुरू होने से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में लामण और नेहनी गाते हैं। ढोल-नगाड़ों की थाप और लोकगायकों की स्वर लहरियों के साथ माहौल तैयार होता था। इसके बाद महिला-पुरुष एक-दूसरे का हाथ थामकर नाटी के गोल घेरे में शामिल होते थे। समय के साथ इन पारंपरिक गीतों का स्थान आधुनिक प्रस्तुति ने काफी हद तक लिया है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इनके स्वर लोकसंस्कृति की पुरानी यादों को जीवित रखते हैं।
Kullu, Kullu | Sep 20, 2026