पिथौरागढ़ :- सदर की रामलीला में रामसेतु निर्माण से लंका दहन तक, जीवंत हुए रामायण के प्रसंग !
पिथौरागढ़ :- श्री रामलीला प्रबन्धकारिणी समिति सदर पिथौरागढ़ द्वारा आयोजित ऐतिहासिक 130वें रामलीला मंचन के अष्टम दिवस समुद्र सेतु बंधन, समुद्र लंघन, हनुमान-विभीषण संवाद, सीता-रावण संवाद, अक्षय कुमार वध और लंका दहन की लीलाओं का भव्य मंचन किया गया। रामलीला के इन रोमांचक प्रसंगों को देखने के लिए दर्शकों में खासा उत्साह नजर आया।
लीला में दिखाया गया कि माता सीता की खोज में हनुमान जी समुद्र लांघकर लंका पहुंचते हैं। वहां उनकी भेंट भगवान श्रीराम के भक्त विभीषण से होती है। विभीषण से जानकारी मिलने के बाद हनुमान जी अशोक वाटिका पहुंचकर माता सीता को श्रीराम की मुद्रिका सौंपते हैं और प्रभु का संदेश देते हुए उन्हें शीघ्र मुक्त कराने का भरोसा दिलाते हैं। इसी दौरान रावण और माता सीता के बीच संवाद होता है। रावण उन्हें भयभीत कर अपने पक्ष में करने का प्रयास करता है, लेकिन माता सीता श्रीराम के प्रति अपनी निष्ठा पर अडिग रहती हैं। त्रिजटा और सीता के संवाद के साथ हनुमान जी का माता सीता को सांत्वना देने का प्रसंग भी मंचित किया गया।
इसके बाद हनुमान जी अशोक वाटिका में फल खाने के साथ वाटिका को उजाड़ देते हैं। रावण के पुत्र अक्षय कुमार को युद्ध में परास्त कर उसका वध करते हैं। रावण के आदेश पर हनुमान जी की पूंछ में आग लगाई जाती है, जिसके बाद वे अपनी जलती पूंछ से लंका के विभिन्न हिस्सों में आग लगा देते हैं। लंका दहन के इस प्रसंग ने दर्शकों में रोमांच पैदा किया। इसके बाद रावण-विभीषण संवाद में विभीषण रावण को माता सीता को सम्मानपूर्वक श्रीराम को लौटाने और युद्ध टालने की सलाह देते हैं, लेकिन रावण उनकी बात नहीं मानता और विभीषण को अपमानित कर देता है।
आगे की लीला में श्रीराम की वानर सेना समुद्र पार कर लंका पहुंचने के लिए सेतु निर्माण करती है। नल-नील के नेतृत्व में वानर सेना द्वारा समुद्र पर पुल बनाने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया, जो श्रीराम की सेना के लंका प्रस्थान और रावण के विरुद्ध निर्णायक युद्ध की तैयारी का प्रतीक है। इन सभी प्रसंगों के मंचन के साथ रामलीला की कथा युद्ध की ओर आगे बढ़ी।