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#एक_भारत_श्रेष्ठ_भारत #मोदी_है_तो_मुमकिन_है

22.2k views | Buxar, Buxar | Jan 2, 2023

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बक्सर जिले का समाचार बुलेटिन : 4 जुलाई 2026
बक्सर खबर। आप देख रहे हैं बक्सर जिले का समाचार बुलेटिन। इसमें आपको पिछले चौबीस घंटे की सभी प्रमुख खबरें एक साथ, एक जगह देखने और सुनने को मिल जाएंगी। इसे और बेहतर कैसे बनाया जाए। इसका सुझाव आप हमें कमेंट के माध्यम से दे सकते हैं।

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Buxar, Buxar | Jul 4, 2026

वामन मंदिर को जेल परिसर से अलग किए जाने की खुशी में मना दीपोत्सव.. सदस्य प्रेम कुमार मिश्र ने जारी किया वीडियो ..

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Buxar, Buxar | Jul 4, 2026

धान-गेहूं से आगे निकले बक्सर के किसान, अब मशरूम से बदलेगी किस्मत

कुल्हड़िया एफपीओ में सैकड़ों किसानों ने सीखी आधुनिक तकनीक, महिलाओं की भागीदारी बनी आकर्षण

वैज्ञानिक बोले- कम लागत, बिना बड़े खेत के मशरूम उत्पादन से बढ़ेगी आय, गांवों में आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जिले के किसानों की सोच अब पारंपरिक खेती की सीमाओं से आगे बढ़ रही है. धान और गेहूं के साथ अब मशरूम उत्पादन गांवों में रोजगार और अतिरिक्त आमदनी का नया जरिया बनता जा रहा है. इसका उदाहरण सदर प्रखंड के कुल्हड़िया गांव में देखने को मिला, जहां एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन) में मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में पूसा समस्तीपुर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक दयाराम ने सैकड़ों किसानों को आधुनिक तकनीक से मशरूम उत्पादन की बारीकियां सिखाईं.

प्रशिक्षण कार्यक्रम की सबसे खास बात महिलाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही. बड़ी संख्या में पहुंचीं महिला किसानों ने मशरूम उत्पादन की तकनीक सीखी और इसे आय का नया साधन बनाने में रुचि दिखाई. वैज्ञानिक दयाराम ने कहा कि ग्रामीण महिलाएं अब केवल परिवार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खेती और स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं. उन्होंने कहा कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी गांवों की आर्थिक तस्वीर बदलने का संकेत है.

दयाराम ने बताया कि केवल धान और गेहूं की खेती पर निर्भर रहने से किसानों की आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पा रही है. ऐसे में मशरूम उत्पादन कम लागत और अधिक लाभ देने वाला बेहतर विकल्प है. इसके लिए बड़े खेत की आवश्यकता नहीं होती और सीमित संसाधनों में भी अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है. साथ ही यह पौष्टिक आहार होने के कारण लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है.

उन्होंने किसानों को मशरूम उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और विपणन तक की जानकारी दी. कहा कि वैज्ञानिक तरीके अपनाकर छोटे स्तर पर भी अच्छी कमाई की जा सकती है. इससे ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

एफपीओ के सीईओ दीपू कुमार ने बताया कि मशरूम की खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे छोटे-छोटे कमरों में भी किया जा सकता है. जिन किसानों के पास पर्याप्त जमीन नहीं है, वे भी घर से इसकी शुरुआत कर सकते हैं. घरेलू कामकाज के साथ महिलाएं आसानी से इसका उत्पादन कर प्रतिमाह हजारों रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं.

प्रशिक्षण में शामिल किसानों ने कहा कि गांवों में मशरूम उत्पादन को लेकर तेजी से जागरूकता बढ़ रही है. यदि वैज्ञानिक तकनीक से खेती की जाए तो कम जगह और कम लागत में भी अच्छी आमदनी संभव है. किसानों का मानना है कि मशरूम उत्पादन न केवल परिवार की आय बढ़ाएगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कुपोषण दूर करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

धान-गेहूं से आगे निकले बक्सर के किसान, अब मशरूम से बदलेगी किस्मत कुल्हड़िया एफपीओ में सैकड़ों किसानों ने सीखी आधुनिक तकनीक, महिलाओं की भागीदारी बनी आकर्षण वैज्ञानिक बोले- कम लागत, बिना बड़े खेत के मशरूम उत्पादन से बढ़ेगी आय, गांवों में आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जिले के किसानों की सोच अब पारंपरिक खेती की सीमाओं से आगे बढ़ रही है. धान और गेहूं के साथ अब मशरूम उत्पादन गांवों में रोजगार और अतिरिक्त आमदनी का नया जरिया बनता जा रहा है. इसका उदाहरण सदर प्रखंड के कुल्हड़िया गांव में देखने को मिला, जहां एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन) में मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में पूसा समस्तीपुर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक दयाराम ने सैकड़ों किसानों को आधुनिक तकनीक से मशरूम उत्पादन की बारीकियां सिखाईं. प्रशिक्षण कार्यक्रम की सबसे खास बात महिलाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही. बड़ी संख्या में पहुंचीं महिला किसानों ने मशरूम उत्पादन की तकनीक सीखी और इसे आय का नया साधन बनाने में रुचि दिखाई. वैज्ञानिक दयाराम ने कहा कि ग्रामीण महिलाएं अब केवल परिवार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खेती और स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं. उन्होंने कहा कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी गांवों की आर्थिक तस्वीर बदलने का संकेत है. दयाराम ने बताया कि केवल धान और गेहूं की खेती पर निर्भर रहने से किसानों की आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पा रही है. ऐसे में मशरूम उत्पादन कम लागत और अधिक लाभ देने वाला बेहतर विकल्प है. इसके लिए बड़े खेत की आवश्यकता नहीं होती और सीमित संसाधनों में भी अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है. साथ ही यह पौष्टिक आहार होने के कारण लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है. उन्होंने किसानों को मशरूम उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और विपणन तक की जानकारी दी. कहा कि वैज्ञानिक तरीके अपनाकर छोटे स्तर पर भी अच्छी कमाई की जा सकती है. इससे ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. एफपीओ के सीईओ दीपू कुमार ने बताया कि मशरूम की खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे छोटे-छोटे कमरों में भी किया जा सकता है. जिन किसानों के पास पर्याप्त जमीन नहीं है, वे भी घर से इसकी शुरुआत कर सकते हैं. घरेलू कामकाज के साथ महिलाएं आसानी से इसका उत्पादन कर प्रतिमाह हजारों रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं. प्रशिक्षण में शामिल किसानों ने कहा कि गांवों में मशरूम उत्पादन को लेकर तेजी से जागरूकता बढ़ रही है. यदि वैज्ञानिक तकनीक से खेती की जाए तो कम जगह और कम लागत में भी अच्छी आमदनी संभव है. किसानों का मानना है कि मशरूम उत्पादन न केवल परिवार की आय बढ़ाएगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कुपोषण दूर करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

Buxar, Buxar | Jul 4, 2026

#एक_भारत_श्रेष्ठ_भारत #मोदी_है_तो_मुमकिन_है - Buxar News