@highlight 'साहब' पर नियम लागू नहीं होते, इसके पीछे की 'महान' वजहें ज़रा समझिए:
वर्दी ही हेलमेट है: जब शरीर पर खाकी या कोई भी सरकारी वर्दी चढ़ जाती है, तो सिर पर लोहे या प्लास्टिक का हेलमेट लगाने की क्या ज़रूरत? वर्दी अपने आप में सुरक्षा कवच है, जो यमराज को भी दूर रखती है!
मल्टीटास्किंग के उस्ताद: एक हाथ से बुलेट (या बाइक) का हैंडल संभालना, कान पर फोन चिपकाए रखना और बिना हेलमेट के हवा से बातें करना... यह कोई मामूली बात नहीं है। यह तो एक 'विशेष कला' है जो केवल साहब लोगों को ही आती है।
चालान का डर? वह क्या होता है!: चालान तो आम जनता का कटता है, जो बिना हेलमेट 500 मीटर भी चली जाए तो कैमरे और पुलिसकर्मी मुस्तैद हो जाते हैं। लेकिन साहब? साहब तो कानून के रखवाले हैं, और रखवाले कभी अपने ही बनाए नियमों के जाल में नहीं फंसते!
"हम सुधरेंगे तो देश सुधरेगा" का नारा सिर्फ आपके और हमारे जैसे आम लोगों के लिए है। साहब लोगों का काम सिर्फ नियम बनाना और दूसरों पर लागू करना है, खुद उन पर चलना नहीं। इसलिए देखते रहिए, मुस्कुराते रहिए और अपनी जेब संभालकर हेलमेट लगाए रखिए!
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