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#प्रतापगढ़ के पट्टी इलाके से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। डडवा महोखरी गांव में खड़ंजा निर्माण को लेकर चल रहा विवाद...

Patti, Pratapgarh | Apr 14, 2026

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#प्रतापगढ़। पट्टी में बड़ी छापेमारी! मिश्रा इलेक्ट्रॉनिक्स से उषा-प्रेस्टीज के कथित नकली सामान की बरामदगी। 

#प्रतापगढ़ #बरामदगी। #pratapg#pratapgarhup72 #प्रतापगढ

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Patti, Pratapgarh | Jul 15, 2026

नगर पंचायत पट्टी पर उठे गंभीर सवालों का अब तक नहीं मिला जवाब, इंटरव्यू का समय देने के बाद भी हुआ रद्द

पट्टी, प्रतापगढ़। नगर पंचायत पट्टी के कार्यों को लेकर उच्च न्यायालय के अधिवक्ता वीर शिवम सिंह पिछले कई दिनों से लगातार अपने सोशल मीडिया मंचों पर स्थलीय निरीक्षण, सरकारी अभिलेखों तथा शासन द्वारा जारी वित्तीय स्वीकृतियों एवं शासनादेशों की प्रतियां सार्वजनिक करते हुए गंभीर प्रश्न उठा रहे हैं। उनके द्वारा केवल आरोप ही नहीं लगाए गए, बल्कि अनेक मामलों में संबंधित दस्तावेज, स्वीकृत बजट, धनराशि निर्गमन के रिकॉर्ड तथा धरातल की वास्तविक स्थिति से जुड़े साक्ष्य भी सार्वजनिक किए गए, जिससे पूरे मामले ने व्यापक जनचर्चा का रूप ले लिया है।

वीर शिवम सिंह का दावा है कि शासन से विभिन्न विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये की धनराशि स्वीकृत एवं अवमुक्त होने के बावजूद अनेक कार्य या तो अधूरे हैं, या उनकी गुणवत्ता और समयसीमा गंभीर संदेह के घेरे में है। उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और स्थलीय निरीक्षणों के आधार पर नगर पंचायत प्रशासन से कई बिंदुवार प्रश्न पूछे गए हैं, जिनका अब तक सार्वजनिक रूप से स्पष्ट उत्तर सामने नहीं आया है।

इन्हीं आरोपों के संबंध में नगर पंचायत का पक्ष जानने के उद्देश्य से हमारी टीम ने नगर पंचायत अध्यक्ष से संपर्क किया। प्रारंभ में हमें शाम 4:00 बजे साक्षात्कार का समय दिया गया। निर्धारित समय के अनुसार पूरी तैयारी कर ली गई, किंतु बाद में नगर पंचायत की ओर से सूचना दी गई कि अध्यक्ष अब इस विषय पर कोई बयान नहीं देंगे।

नगर पंचायत अध्यक्ष का कहना था कि वह इस मामले में पहले ही अपना पक्ष रख चुके हैं। हालांकि वह पक्ष कब, कहाँ और किस माध्यम से रखा गया, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। न ही अब तक किसी सार्वजनिक मंच पर वीर शिवम सिंह द्वारा उठाए गए बिंदुवार आरोपों का प्रमाण सहित उत्तर सामने आया है।

इसी बीच नगर पंचायत के एक सभासद ने फेसबुक पर टिप्पणी करते हुए दावा किया कि अध्यक्ष सभी आरोपों का जवाब दस्तावेज़ों एवं प्रमाणों के साथ देने के लिए तैयार हैं, लेकिन कोई पत्रकार नगर पंचायत कार्यालय पहुंचकर उन प्रमाणों को देखने नहीं आ रहा है।

सभासद की इस टिप्पणी के बाद हमारी टीम ने एक बार फिर नगर पंचायत अध्यक्ष से संपर्क कर उनका पक्ष जानने और साक्षात्कार लेने का प्रयास किया, किंतु इस बार भी साक्षात्कार नहीं हो सका। परिणामस्वरूप नगर प्रशासन का विस्तृत और बिंदुवार पक्ष अब भी जनता के सामने नहीं आ सका है।

यह भी उल्लेखनीय है कि वीर शिवम सिंह द्वारा केवल मौखिक आरोप नहीं लगाए गए हैं, बल्कि अनेक मामलों में शासनादेशों, वित्तीय स्वीकृतियों, अभिलेखों तथा स्थलीय निरीक्षण से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए गए हैं। ऐसे में स्वाभाविक रूप से जनमानस में यह अपेक्षा बनी कि नगर पंचायत प्रशासन प्रत्येक आरोप का तथ्यात्मक एवं दस्तावेज़ी उत्तर देगा। किंतु अब तक ऐसा नहीं हो सका है।

फिलहाल वीर शिवम सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है और नगर पंचायत अध्यक्ष का विस्तृत पक्ष भी उपलब्ध नहीं हो पाया है। यदि भविष्य में नगर पंचायत प्रशासन कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण, दस्तावेज़ अथवा बिंदुवार जवाब प्रस्तुत करता है, तो उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा, ताकि जनता के सामने दोनों पक्षों की पूरी तस्वीर आ सके।

लेकिन वर्तमान स्थिति में इतना अवश्य कहा जा सकता है कि प्रश्न लगातार उठ रहे हैं, दस्तावेज़ सार्वजनिक हो रहे हैं, जबकि अपेक्षित जवाब अब भी सामने नहीं आया है। इंटरव्यू का समय तय होने के बाद उसका रद्द होना और आरोपों पर प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया से बचना नगर प्रशासन को स्वाभाविक रूप से रक्षात्मक स्थिति में खड़ा करता है। ऐसे में संदेह और प्रश्न समाप्त होने के बजाय और गहरे होते दिखाई दे रहे हैं ।

नगर पंचायत पट्टी पर उठे गंभीर सवालों का अब तक नहीं मिला जवाब, इंटरव्यू का समय देने के बाद भी हुआ रद्द पट्टी, प्रतापगढ़। नगर पंचायत पट्टी के कार्यों को लेकर उच्च न्यायालय के अधिवक्ता वीर शिवम सिंह पिछले कई दिनों से लगातार अपने सोशल मीडिया मंचों पर स्थलीय निरीक्षण, सरकारी अभिलेखों तथा शासन द्वारा जारी वित्तीय स्वीकृतियों एवं शासनादेशों की प्रतियां सार्वजनिक करते हुए गंभीर प्रश्न उठा रहे हैं। उनके द्वारा केवल आरोप ही नहीं लगाए गए, बल्कि अनेक मामलों में संबंधित दस्तावेज, स्वीकृत बजट, धनराशि निर्गमन के रिकॉर्ड तथा धरातल की वास्तविक स्थिति से जुड़े साक्ष्य भी सार्वजनिक किए गए, जिससे पूरे मामले ने व्यापक जनचर्चा का रूप ले लिया है। वीर शिवम सिंह का दावा है कि शासन से विभिन्न विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये की धनराशि स्वीकृत एवं अवमुक्त होने के बावजूद अनेक कार्य या तो अधूरे हैं, या उनकी गुणवत्ता और समयसीमा गंभीर संदेह के घेरे में है। उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और स्थलीय निरीक्षणों के आधार पर नगर पंचायत प्रशासन से कई बिंदुवार प्रश्न पूछे गए हैं, जिनका अब तक सार्वजनिक रूप से स्पष्ट उत्तर सामने नहीं आया है। इन्हीं आरोपों के संबंध में नगर पंचायत का पक्ष जानने के उद्देश्य से हमारी टीम ने नगर पंचायत अध्यक्ष से संपर्क किया। प्रारंभ में हमें शाम 4:00 बजे साक्षात्कार का समय दिया गया। निर्धारित समय के अनुसार पूरी तैयारी कर ली गई, किंतु बाद में नगर पंचायत की ओर से सूचना दी गई कि अध्यक्ष अब इस विषय पर कोई बयान नहीं देंगे। नगर पंचायत अध्यक्ष का कहना था कि वह इस मामले में पहले ही अपना पक्ष रख चुके हैं। हालांकि वह पक्ष कब, कहाँ और किस माध्यम से रखा गया, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। न ही अब तक किसी सार्वजनिक मंच पर वीर शिवम सिंह द्वारा उठाए गए बिंदुवार आरोपों का प्रमाण सहित उत्तर सामने आया है। इसी बीच नगर पंचायत के एक सभासद ने फेसबुक पर टिप्पणी करते हुए दावा किया कि अध्यक्ष सभी आरोपों का जवाब दस्तावेज़ों एवं प्रमाणों के साथ देने के लिए तैयार हैं, लेकिन कोई पत्रकार नगर पंचायत कार्यालय पहुंचकर उन प्रमाणों को देखने नहीं आ रहा है। सभासद की इस टिप्पणी के बाद हमारी टीम ने एक बार फिर नगर पंचायत अध्यक्ष से संपर्क कर उनका पक्ष जानने और साक्षात्कार लेने का प्रयास किया, किंतु इस बार भी साक्षात्कार नहीं हो सका। परिणामस्वरूप नगर प्रशासन का विस्तृत और बिंदुवार पक्ष अब भी जनता के सामने नहीं आ सका है। यह भी उल्लेखनीय है कि वीर शिवम सिंह द्वारा केवल मौखिक आरोप नहीं लगाए गए हैं, बल्कि अनेक मामलों में शासनादेशों, वित्तीय स्वीकृतियों, अभिलेखों तथा स्थलीय निरीक्षण से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए गए हैं। ऐसे में स्वाभाविक रूप से जनमानस में यह अपेक्षा बनी कि नगर पंचायत प्रशासन प्रत्येक आरोप का तथ्यात्मक एवं दस्तावेज़ी उत्तर देगा। किंतु अब तक ऐसा नहीं हो सका है। फिलहाल वीर शिवम सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है और नगर पंचायत अध्यक्ष का विस्तृत पक्ष भी उपलब्ध नहीं हो पाया है। यदि भविष्य में नगर पंचायत प्रशासन कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण, दस्तावेज़ अथवा बिंदुवार जवाब प्रस्तुत करता है, तो उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा, ताकि जनता के सामने दोनों पक्षों की पूरी तस्वीर आ सके। लेकिन वर्तमान स्थिति में इतना अवश्य कहा जा सकता है कि प्रश्न लगातार उठ रहे हैं, दस्तावेज़ सार्वजनिक हो रहे हैं, जबकि अपेक्षित जवाब अब भी सामने नहीं आया है। इंटरव्यू का समय तय होने के बाद उसका रद्द होना और आरोपों पर प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया से बचना नगर प्रशासन को स्वाभाविक रूप से रक्षात्मक स्थिति में खड़ा करता है। ऐसे में संदेह और प्रश्न समाप्त होने के बजाय और गहरे होते दिखाई दे रहे हैं ।

Patti, Pratapgarh | Jul 14, 2026