#राजस्थान के जिला #गंगानगर में 13 साल की लड़की के साथ 32 लोगों की हैवानियत!!!
लड़की अपने सोशल मीडिया इंस्टाग्राम फ्रेंड से मिलने 100 किलोमीटर दूर विजय नगर पहुंची थी। वहां पर उसके साथ कथित सोशल मीडिया मित्र ने पहला दुष्कर्म कृत्य किया। अब था तो मित्र ही इसलिए नोच डाला विश्वास में बुलाकर !
लड़की विजय नगर से वापसी में बस द्वारा गंगानगर लौट आई, जहां रात्रि मे उसने एक ऑटो चालक को घर तक छोड़ने के लिए बुक किया था।
यह दूसरा हैवान दल्ला ऑटो चालक उसको एक होटल लेकर पहुंचा और होटल मालिक को बेंच दिया। रात्रि मे ऑटो चालक भी होटल में रुका। फिर उसके साथ क्रमशः दुराचार किया गया।
इस होटल के बाद लड़की को 3 से 4 होटलों में बेंचा गया जहां पुनः उसके साथ बर्बरतापूर्ण 5 दिन तक रेप किया गया। इस तरह कुल जमा 32 लोगों ने बलात्कार किया जिनके 20 से 25 नाम लड़की बतला रही है।
इस बहु चर्चित रेप कांड की जानकारी मुताबिक जांच अधिकारी कैलाश दान कहते हैं कि इस लड़की का इंस्टाग्राम पर एक फ्रेंड था, वह उससे मिलने के लिए वह श्रीगंगानगर से सौ किलोमीटर दूर विजयनगर गई थी। वहां उसके सोशल मीडिया फ्रेंड ने उसके साथ रेप किया।
जानकारी के मुताबिक़ उसके बाद ये बच्ची विजयनगर से बस से रात में गंगानगर पहुंची और रिक्शा किया था।
बच्ची के घर ना पहुंचने पर उसकी मां ने कई जगह उसकी तलाश की और रिश्तेदारी में पूछताछ की थी। लेकिन जब 22 जून तक भी बच्ची घर नहीं पहुंची तो माँ पुलिस थाने पहुंची। पुलिस ने जनता के सड़क पर उतरने से जागते हुए खांगूर, सफायर, जय होटल पर बुलडोजर चलाया है। वहीं अब तक 18 गिरफ्तारी सीसीटीवी फुटेज खंगालते हुए की है। आगे भी
कार्यवाही चल रही है।
#वायरल #वीडियो मे पकड़े गए आरोपियों को पुलिस एक साथ रस्सी में बांधकर सड़क में जनता के सामने मारते हुए ले जा रही है। मारने वाले रॉबिनहुड इतनी जल्दबाजी में थे कि वीडियो में वे एक महिला आरक्षी को डंडा मार देते है!!!
वहीं इस दुर्लभतम अपराध के बाद पीड़िता अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही है।
सवाल यह कि क्या 13 साल की लड़की अपने परिवार के सदस्यों को सूचना देकर गंगानगर से 100 किलोमीटर दूर विजयनगर मित्र से मिलने गई थी ?
क्या समाज आज इतना सुरक्षित है कि बेटियां ऐसा निर्णय परिजनों को बिना जानकारी दिए उठाएं? उन्हें परिजनों को अपनी दिनचर्या क्यों नहीं बतलाना चाहिए?
सवाल यह कि एक ऑटो ड्राइवर का परिवेश अक्सर ऐसा होता है कि उसमें इंसानियत मर सकती है। वह दल्ला बनकर किसी भी मासूम या लड़की को आदमखोर मंडी में बकरा समझकर बेंच देता है, किन्तु वे होटल मालिक और दूसरे दुष्कर्मी क्या पिशाच थे ? इनके होटलों में दूसरी महिला कस्टमर और उनकी बेटियां कैसे सुरक्षित होंगी ? उन्होंने 13 वर्ष की लड़की के शरीर और कपड़ो में क्या उत्तेजक परिदृश्य देखा कि वे जानवर से ज्यादा हिंसक हो गए ? सवाल यह भी कि इन 32 लोगों को जिंदा क्यों रखना चाहिए? इनका ट्रायल किन परिस्थितियों में न्यायिक चौखट पर होना चाहिए, इन्हें जमानत क्यों मिलनी चाहिए? अधिवक्ता इनका मुकदमा क्यों लड़े जब यह आदमी है ही नहीं सिर्फ शरीर मानव का है? क्या अरब देश की तर्ज पर सड़क में यूं ही ले जाते हुए फैसला आन स्पाट 32 गोली नहीं होना चाहिए? लेकिन फिर लोग कहेंगे आरोपी को अपना पक्ष रखने का मौका जरूर मिलना चाहिए ताकि वह जिंदा होते हुए फांसी या उम्रकैद की सजा सुन सके !!! क्या फांसी इतनी आसानी से देश में चढ़ाई जाती है? उम्रकैद में कितने दांवपेंच सिस्टम के होंगे यह कानून से जूझते लोग बखूबी समझ सकते हैं।
फिलवक्त ये घटना हमारे सड़ चुके समाज की वर्तमान सभ्यता का प्रतीक है जो हर रोज , अक्सर किसी न किसी शक्ल मे घट रही है....
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