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नशा तस्करी के विरुद्ध अपने सतत अभियान में शिमला पुलिस ने ₹6 करोड़ मूल्य की 1.120 किलोग्राम हाई ग्रेड हेरोइन बरामद कर एक अंतरराज्यीय चिट्टा तस्कर को गिरफ्तार किया। हिमाचल प्रदेश पुलिस नशा तस्करी के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति पर दृढ़ता से कार्यरत है। **#HimachalPolice #ShimlaPolice #OperationPrahar #DrugFreeHimachal #ZeroTolerance #FightAgainstDrugs**

Shimla Urban, Shimla | Aug 4, 2026

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प्रदेश सरकार डॉ. परमार की नीतियों को धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री
शहरी क्षेत्रों में पलायन रोकने के लिए सरकार कर रही है गांवों का सर्वांगीण विकास: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू आज हिमाचल निर्माता और राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवन्त सिंह परमार की 120वीं जयन्ती के अवसर पर विधानसभा परिसर शिमला में आयोजित समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार डॉ. परमार की नीतियों को धरातल पर सफलतापूर्वक उतारने के लिए निरन्तर प्रयासरत है। उनकी दूरदर्शी सोच व दृष्टिकोण से योजनाएं व कार्यक्रम लागू किये जा रहे हैं। उनकी नीतियों को धरातल पर उतारना ही उन्हें सच्ची श्रद्धाजंलि है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. परमार ने हिमाचल प्रदेश के निर्माण के लिए बहुआयामी प्रयास किए। हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्यत्व का दर्ज़ा दिलवाने के लिए डॉ. परमार ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर केन्द्र सरकार के समक्ष मजबूती से अपना पक्ष रखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. परमार ने एक आधुनिक हिमाचल का सपना देखा था जिसमें सभी लोग शिक्षित व साधन सम्पन्न हों और उन्हें आवागमन की बेहतर सुविधा मिले। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में क्रांति लाने की दिशा में विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया है। वर्तमान सरकार के प्रयासों के फलस्वरूप 99.30 साक्षरता दर के साथ हिमाचल प्रदेश पूर्ण साक्षर राज्य बना है, जो बेहद गर्व की बात है।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने 156 स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध किया है, जिसके कारण स्कूलों में छात्र प्रवेश में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा प्रदेश के प्रत्येक विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र में राजीव गांधी राजकीय आदर्श डे-बोर्डिंग स्कूल खोले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने के लिए ‘डॉ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना’ के अंतर्गत मात्र एक प्रतिशत ब्याज दर पर 20 लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण की व्यवस्था की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. परमार का मत था कि हिमाचल का विकास गांवों के विकास से होगा। किसान, बागवान, महिलाएं, युवा और कमजोर वर्गों के विकास की मुख्यधारा में आए बिना प्रदेश आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की जो सोच दी, वही आज भी प्रदेश सरकार की नीतियों का आधार है। सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्राकृतिक खेती और स्वरोजगार को प्रोत्साहन सहित विभिन्न कदम उठा रही है।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल के विकास और इसे आत्मनिर्भर बनाने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष को मिलकर प्रदेश हित में कदम बढ़ाने होंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश का हक हासिल करने के लिए सभी को प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार प्रदेश के अधिकारों को प्राप्त करने की सोच के साथ संघर्ष कर रही है और विपक्ष को भी इस दिशा में अपना दायित्व निभाना चाहिए। प्रदेश सरकार डॉ. परमार की सोच को फलीभूत करने का प्रयास कर रही है। इसी दृष्टिकोण के साथ वर्ष 2032 तक हिमाचल देश का एक समृद्धशाली राज्य बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में पलायन रोकने के लिए गांवों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सम्पर्क व अन्य सुविधाओं का विकास कर गांव की तकदीर व तस्वीर बदलने के सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं।
विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने अपने सम्बोधन में कहा कि हिमाचल के निर्माण में डॉ. परमार का अभूतपूर्व योगदान और उन्होंने हिमाचल प्रदेश को आदर्श नेतृत्व प्रदान किया।
उन्होंने कहा कि अपनी नीतियांे और कार्यक्रमों के माध्यम से डॉ. परमार ने यह सुनिश्चित किया कि प्रदेश में सुविधाओं का अभाव न रहे। उनकी इस दूरदर्शी सोच के परिणामस्वरूप आज हिमाचल प्रदेश अनेक क्षेत्रों में देश का अग्रणी राज्य है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक विकास सहित अनेक क्षेत्रों में राज्य ने मिसाल कायम की है।
नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल के निर्माण में डॉ. परमार की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके जीवन के बारे में जानना हमारा नैतिक कर्तव्य है। उनके विचार नई पीढ़ी के लिए प्ररेणादायक हैं। हिमाचल की परिस्थितियां अन्य राज्यों से भिन्न हैं। इसी दृष्टिकोण से डॉ. परमार ने संघर्ष किया और हिमाचल को अलग पहचान दिलवाई। उन्होंने प्रदेश में सड़कों के निर्माण को विशेष प्राथमिकता दी और हर क्षेत्र के विकास के लिए निरन्तर प्रयत्न किए।
विशेष वक्ता, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी श्रीनिवास जोशी ने डॉ. परमार के जीवन पर विस्तृत प्रकाश डाला।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने डॉ. परमार के जीवन पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
 इस अवसर पर डॉ. परमार के जीवन पर आधारित सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग कृत वृत्तचित्र भी प्रदर्शित किया गया।
इस अवसर पर ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, कुलदीप सिंह पठानिया और जय राम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय द्वारा प्रकाशित पुस्तक अध्यक्षपीठ से प्रेक्षण एवं विनिर्णय तथा अन्य पुस्तकों का विमोचन भी किया।
इस अवसर पर ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, कुलदीप सिंह पठानिया, उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, जय राम ठाकुर, मंत्रीगण तथा अन्य गणमान्य ने विधानसभा परिसर में पौधरोपण भी किया।
कार्यक्रम में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार, विधायक, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, पूर्व विधायक, महापौर, उप-महापौर, पार्षद, वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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प्रदेश सरकार डॉ. परमार की नीतियों को धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री शहरी क्षेत्रों में पलायन रोकने के लिए सरकार कर रही है गांवों का सर्वांगीण विकास: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू आज हिमाचल निर्माता और राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवन्त सिंह परमार की 120वीं जयन्ती के अवसर पर विधानसभा परिसर शिमला में आयोजित समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार डॉ. परमार की नीतियों को धरातल पर सफलतापूर्वक उतारने के लिए निरन्तर प्रयासरत है। उनकी दूरदर्शी सोच व दृष्टिकोण से योजनाएं व कार्यक्रम लागू किये जा रहे हैं। उनकी नीतियों को धरातल पर उतारना ही उन्हें सच्ची श्रद्धाजंलि है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. परमार ने हिमाचल प्रदेश के निर्माण के लिए बहुआयामी प्रयास किए। हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्यत्व का दर्ज़ा दिलवाने के लिए डॉ. परमार ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर केन्द्र सरकार के समक्ष मजबूती से अपना पक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. परमार ने एक आधुनिक हिमाचल का सपना देखा था जिसमें सभी लोग शिक्षित व साधन सम्पन्न हों और उन्हें आवागमन की बेहतर सुविधा मिले। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में क्रांति लाने की दिशा में विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया है। वर्तमान सरकार के प्रयासों के फलस्वरूप 99.30 साक्षरता दर के साथ हिमाचल प्रदेश पूर्ण साक्षर राज्य बना है, जो बेहद गर्व की बात है। ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने 156 स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध किया है, जिसके कारण स्कूलों में छात्र प्रवेश में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा प्रदेश के प्रत्येक विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र में राजीव गांधी राजकीय आदर्श डे-बोर्डिंग स्कूल खोले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने के लिए ‘डॉ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना’ के अंतर्गत मात्र एक प्रतिशत ब्याज दर पर 20 लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण की व्यवस्था की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. परमार का मत था कि हिमाचल का विकास गांवों के विकास से होगा। किसान, बागवान, महिलाएं, युवा और कमजोर वर्गों के विकास की मुख्यधारा में आए बिना प्रदेश आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की जो सोच दी, वही आज भी प्रदेश सरकार की नीतियों का आधार है। सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्राकृतिक खेती और स्वरोजगार को प्रोत्साहन सहित विभिन्न कदम उठा रही है। ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल के विकास और इसे आत्मनिर्भर बनाने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष को मिलकर प्रदेश हित में कदम बढ़ाने होंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश का हक हासिल करने के लिए सभी को प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार प्रदेश के अधिकारों को प्राप्त करने की सोच के साथ संघर्ष कर रही है और विपक्ष को भी इस दिशा में अपना दायित्व निभाना चाहिए। प्रदेश सरकार डॉ. परमार की सोच को फलीभूत करने का प्रयास कर रही है। इसी दृष्टिकोण के साथ वर्ष 2032 तक हिमाचल देश का एक समृद्धशाली राज्य बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में पलायन रोकने के लिए गांवों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सम्पर्क व अन्य सुविधाओं का विकास कर गांव की तकदीर व तस्वीर बदलने के सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने अपने सम्बोधन में कहा कि हिमाचल के निर्माण में डॉ. परमार का अभूतपूर्व योगदान और उन्होंने हिमाचल प्रदेश को आदर्श नेतृत्व प्रदान किया। उन्होंने कहा कि अपनी नीतियांे और कार्यक्रमों के माध्यम से डॉ. परमार ने यह सुनिश्चित किया कि प्रदेश में सुविधाओं का अभाव न रहे। उनकी इस दूरदर्शी सोच के परिणामस्वरूप आज हिमाचल प्रदेश अनेक क्षेत्रों में देश का अग्रणी राज्य है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक विकास सहित अनेक क्षेत्रों में राज्य ने मिसाल कायम की है। नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल के निर्माण में डॉ. परमार की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके जीवन के बारे में जानना हमारा नैतिक कर्तव्य है। उनके विचार नई पीढ़ी के लिए प्ररेणादायक हैं। हिमाचल की परिस्थितियां अन्य राज्यों से भिन्न हैं। इसी दृष्टिकोण से डॉ. परमार ने संघर्ष किया और हिमाचल को अलग पहचान दिलवाई। उन्होंने प्रदेश में सड़कों के निर्माण को विशेष प्राथमिकता दी और हर क्षेत्र के विकास के लिए निरन्तर प्रयत्न किए। विशेष वक्ता, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी श्रीनिवास जोशी ने डॉ. परमार के जीवन पर विस्तृत प्रकाश डाला। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने डॉ. परमार के जीवन पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस अवसर पर डॉ. परमार के जीवन पर आधारित सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग कृत वृत्तचित्र भी प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, कुलदीप सिंह पठानिया और जय राम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय द्वारा प्रकाशित पुस्तक अध्यक्षपीठ से प्रेक्षण एवं विनिर्णय तथा अन्य पुस्तकों का विमोचन भी किया। इस अवसर पर ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, कुलदीप सिंह पठानिया, उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, जय राम ठाकुर, मंत्रीगण तथा अन्य गणमान्य ने विधानसभा परिसर में पौधरोपण भी किया। कार्यक्रम में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार, विधायक, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, पूर्व विधायक, महापौर, उप-महापौर, पार्षद, वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। .0.

Shimla Urban, Shimla | Aug 4, 2026

"राजनीतिक कड़वाहट से दूर, हंसी-मजाक के कुछ खास पल।"
(डॉ. वाई.एस. परमार जयंती समारोह से जुडी कुछ फोटो)

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सुने क्या बोले हिमाचल प्रदेश संयुक्त संघर्ष समिति के अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा

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#मशोबरा स्कूल में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की झलक, हिमाचल–केरल की संस्कृति और स्वाद का अनूठा संगम

शिमला: राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, मशोबरा में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के अंतर्गत आज एक भव्य एवं आकर्षक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें हिमाचल प्रदेश और केरल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कला और पारंपरिक व्यंजनों का जीवंत प्रदर्शन देखने को मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री बनवारी लाल द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के दौरान ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की विद्यालय प्रभारी डॉ. अनुकंपा ठाकुर ने इसके उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पहल विद्यार्थियों को देश की विविध संस्कृतियों से जोड़ने के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता और भाईचारे की भावना को सशक्त बनाती है।
प्रदर्शनी की शुरुआत छात्राओं समृता और साक्षी ने क्रमशः केरल और हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक वेशभूषा में दोनों राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हुए की, जिसने कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया। विद्यालय के चारों सदनों—डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम सदन, जनरल बिपिन रावत सदन, कल्पना चावला सदन तथा मेजर ध्यानचंद सदन—के विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और रचनात्मकता के साथ भाग लेते हुए दोनों राज्यों की संस्कृति को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया।
प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने हिमाचली धाम और केरल सद्या के पारंपरिक व्यंजनों का न केवल प्रदर्शन किया, बल्कि उनके निर्माण की प्रक्रिया भी दर्शाई। हिमाचल के सिड्डू, मक्की की रोटी, मदरा, सेपू बड़ी, बबरू जैसे व्यंजन और केरल के अप्पम, पुट्टू, अवियल, पायसम व केले के चिप्स दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने। इसके साथ ही हिमाचल की पहाड़ी लघु चित्रकला और केरल की कथकली मास्क निर्माण कला का भी सजीव प्रदर्शन किया गया, जिसने उपस्थित जनों को विशेष रूप से प्रभावित किया।
प्रधानाचार्य श्री बनवारी लाल ने अपने संबोधन में कहा कि “एक भारत श्रेष्ठ भारत हमारी विविधता में एकता का सशक्त प्रतीक है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में विभिन्न संस्कृतियों के प्रति सम्मान, समझ और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करते हैं।”
कार्यक्रम में डॉ. धर्म प्रकाश, उपासना देष्टा और श्री मोहन लाल (प्रवक्ता शारीरिक शिक्षा) ने निर्णायक की भूमिका निभाई। इस अवसर पर विद्यालय के सभी शिक्षक एवं गैर-शिक्षक कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता, मेहनत और प्रस्तुति की सराहना करते हुए इस आयोजन को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया।
कार्यक्रम का समापन ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और सुदृढ़ करने तथा सांस्कृतिक समरसता को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ हुआ।

#मशोबरा स्कूल में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की झलक, हिमाचल–केरल की संस्कृति और स्वाद का अनूठा संगम शिमला: राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, मशोबरा में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के अंतर्गत आज एक भव्य एवं आकर्षक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें हिमाचल प्रदेश और केरल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कला और पारंपरिक व्यंजनों का जीवंत प्रदर्शन देखने को मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री बनवारी लाल द्वारा किया गया। कार्यक्रम के दौरान ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की विद्यालय प्रभारी डॉ. अनुकंपा ठाकुर ने इसके उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पहल विद्यार्थियों को देश की विविध संस्कृतियों से जोड़ने के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता और भाईचारे की भावना को सशक्त बनाती है। प्रदर्शनी की शुरुआत छात्राओं समृता और साक्षी ने क्रमशः केरल और हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक वेशभूषा में दोनों राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हुए की, जिसने कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया। विद्यालय के चारों सदनों—डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम सदन, जनरल बिपिन रावत सदन, कल्पना चावला सदन तथा मेजर ध्यानचंद सदन—के विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और रचनात्मकता के साथ भाग लेते हुए दोनों राज्यों की संस्कृति को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने हिमाचली धाम और केरल सद्या के पारंपरिक व्यंजनों का न केवल प्रदर्शन किया, बल्कि उनके निर्माण की प्रक्रिया भी दर्शाई। हिमाचल के सिड्डू, मक्की की रोटी, मदरा, सेपू बड़ी, बबरू जैसे व्यंजन और केरल के अप्पम, पुट्टू, अवियल, पायसम व केले के चिप्स दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने। इसके साथ ही हिमाचल की पहाड़ी लघु चित्रकला और केरल की कथकली मास्क निर्माण कला का भी सजीव प्रदर्शन किया गया, जिसने उपस्थित जनों को विशेष रूप से प्रभावित किया। प्रधानाचार्य श्री बनवारी लाल ने अपने संबोधन में कहा कि “एक भारत श्रेष्ठ भारत हमारी विविधता में एकता का सशक्त प्रतीक है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में विभिन्न संस्कृतियों के प्रति सम्मान, समझ और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करते हैं।” कार्यक्रम में डॉ. धर्म प्रकाश, उपासना देष्टा और श्री मोहन लाल (प्रवक्ता शारीरिक शिक्षा) ने निर्णायक की भूमिका निभाई। इस अवसर पर विद्यालय के सभी शिक्षक एवं गैर-शिक्षक कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता, मेहनत और प्रस्तुति की सराहना करते हुए इस आयोजन को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया। कार्यक्रम का समापन ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और सुदृढ़ करने तथा सांस्कृतिक समरसता को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ हुआ।

Shimla Urban, Shimla | Aug 4, 2026