Karbala History : 3 मुहर्रम जब यज़ीदी फ़ौज ने इमाम हुसैन (अ.स.) को घेरा | Muharram | Imam Hussain
"इस्लाम ज़िंदा होता है हर कर्बला के बाद..." 🏴
साल 61 हिजरी, 3 मुहर्रम का वो दिन... कर्बला की तपती रेत और ज़ुल्म के साए!
2 मुहर्रम को नवासा-ए-रसूल हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम कर्बला की सरज़मीन पर कदम रख चुके थे। लेकिन 3 मुहर्रम का वो सूरज, अपने साथ ज़ुल्म और मसायब (मुसीबतों) की वो दास्तान लेकर आया, जिसे सुनकर आज भी आंखें अश्कबार हो जाती हैं।
आज ही के दिन यज़ीद की फ़ौज का 4,000 का पहला लश्कर उमर इब्ने साद की कयादत में कर्बला पहुँचा था। हुकूमत के लालच में अंधे होकर वो उस नबी के नवासे के सामने आ खड़े हुए, जिसके कलमे का वो दम भरते थे।
📌 जब यज़ीदी फ़ौज ने इमाम हुसैन से पूछा कि 'आप यहाँ क्यों आए हैं?' तो इमाम-ए-आली मकाम ने निहायत सब्र और जलाल से क्या जवाब दिया था?
📌 कैसे शुरू हुई हुसैनी खेमे में पानी की किल्लत की साज़िश?
इस पूरे इतिहास को, 3 मुहर्रम के मुकम्मल वाक़िये को बहुत ही अदब के साथ इस वीडियो में बयां किया गया है। वक्त निकाल कर इस तारीख़ी मंज़र को ज़रूर देखें और ज़िक्र-ए-हुसैन की नीयत से इसे आगे शेयर करें।👇
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