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Karbala History: वह 10 Muharram की आख़िरी शाम... | कर्बला का दर्द भरा इतिहास | Imam Hussain

"72 प्यासे और 33,000 की जालिम फ़ौज... जब कर्बला की रेत खून से लाल हो गई!" 💔😭

नाज़रीन, इंसानी इतिहास (History) में बहुत सी जंगें लड़ी गईं, लेकिन सन 61 हिजरी को कर्बला के तपते हुए रेगिस्तान में जो हुआ, उसकी मिसाल कयामत तक नहीं मिल सकती। 10 मोहर्रम (यौम-ए-आशूरा)... वो दिन जब नवासा-ए-रसूल हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) ने दीन-ए-इस्लाम और इंसानियत को बचाने के लिए अपना पूरा कुनबा कुर्बान कर दिया।

क्या थी कर्बला की वो दर्दनाक दास्तान? 👇

एक तरफ दमिश्क का जालिम हुक्मरान यजीद था, जिसके पास ताकत थी, लाखों की फौज थी और गुरूर था। वो चाहता था कि इमाम हुसैन उसके आगे सर झुका दें। लेकिन इमाम हुसैन (अ.स.), जो हज़रत अली के लाल और बीवी फातिमा के चैन थे, उन्होंने साफ कह दिया— "मुझ जैसा शख्स यजीद जैसे बदकिरदार की बैअत कभी नहीं कर सकता।"

7 मोहर्रम से नहर-ए-फुरात पर पहरा लगा दिया गया। तीन दिन तक इमाम का पूरा कुनबा, छोटे-छोटे बच्चे भूख और प्यास से तड़पते रहे। ज़रा दिल पर हाथ रखकर सोचिए...

जब 6 महीने के मासूम अली असगर को पानी के बदले गले पर तीर लगा होगा, तो एक बाप के दिल पर क्या गुज़री होगी?

जब भाई अब्बास के दोनों बाजू काट दिए गए होंगे, तो हुसैन की कमर कैसे टूटी होगी?

जवान बेटे अली अकबर और भाई के लाल कासिम की लाशों को जब इमाम अकेले खैमे तक लाए होंगे, तो मंज़र क्या रहा होगा?

और फिर आया 10 मोहर्रम की असर (शाम) का वक्त... इमाम हुसैन बिल्कुल तन्हा थे, बदन पर सैकड़ों ज़ख्म थे। उन्होंने आखिरी नमाज़ के लिए सिज्दे में सर रखा... और उसी हालत में जालिम शूमर ने उनका सर तन से जुदा कर दिया।

हुसैन ने सर तो कटा दिया, लेकिन इस्लाम के परचम को कभी झुकने नहीं दिया! यजीद जंग जीतकर भी तारीख के पन्नों में हमेशा के लिए मिट गया और जलील हो गया, लेकिन इमाम हुसैन आज भी हर इंसाफ पसंद इंसान के दिल पर राज कर रहे हैं।

इसी दर्द भरे और रूह कंपा देने वाले इतिहास को हमने बेहद अदब और जज्बात के साथ इस वीडियो में समेटा है। एक बार इस इतिहास को पूरा ज़रूर सुनिए, आपकी आँखों से आँसू रुकेंगे नहीं।

#WaqiaeKarbala #ImamHussain #Muharram2026 #10Muharram #YaHussain #KarbalaHistory #IslamicHistory #Ashura

Karbala History: वह 10 Muharram की आख़िरी शाम... | कर्बला का दर्द भरा इतिहास | Imam Hussain "72 प्यासे और 33,000 की जालिम फ़ौज... जब कर्बला की रेत खून से लाल हो गई!" 💔😭 नाज़रीन, इंसानी इतिहास (History) में बहुत सी जंगें लड़ी गईं, लेकिन सन 61 हिजरी को कर्बला के तपते हुए रेगिस्तान में जो हुआ, उसकी मिसाल कयामत तक नहीं मिल सकती। 10 मोहर्रम (यौम-ए-आशूरा)... वो दिन जब नवासा-ए-रसूल हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) ने दीन-ए-इस्लाम और इंसानियत को बचाने के लिए अपना पूरा कुनबा कुर्बान कर दिया। क्या थी कर्बला की वो दर्दनाक दास्तान? 👇 एक तरफ दमिश्क का जालिम हुक्मरान यजीद था, जिसके पास ताकत थी, लाखों की फौज थी और गुरूर था। वो चाहता था कि इमाम हुसैन उसके आगे सर झुका दें। लेकिन इमाम हुसैन (अ.स.), जो हज़रत अली के लाल और बीवी फातिमा के चैन थे, उन्होंने साफ कह दिया— "मुझ जैसा शख्स यजीद जैसे बदकिरदार की बैअत कभी नहीं कर सकता।" 7 मोहर्रम से नहर-ए-फुरात पर पहरा लगा दिया गया। तीन दिन तक इमाम का पूरा कुनबा, छोटे-छोटे बच्चे भूख और प्यास से तड़पते रहे। ज़रा दिल पर हाथ रखकर सोचिए... जब 6 महीने के मासूम अली असगर को पानी के बदले गले पर तीर लगा होगा, तो एक बाप के दिल पर क्या गुज़री होगी? जब भाई अब्बास के दोनों बाजू काट दिए गए होंगे, तो हुसैन की कमर कैसे टूटी होगी? जवान बेटे अली अकबर और भाई के लाल कासिम की लाशों को जब इमाम अकेले खैमे तक लाए होंगे, तो मंज़र क्या रहा होगा? और फिर आया 10 मोहर्रम की असर (शाम) का वक्त... इमाम हुसैन बिल्कुल तन्हा थे, बदन पर सैकड़ों ज़ख्म थे। उन्होंने आखिरी नमाज़ के लिए सिज्दे में सर रखा... और उसी हालत में जालिम शूमर ने उनका सर तन से जुदा कर दिया। हुसैन ने सर तो कटा दिया, लेकिन इस्लाम के परचम को कभी झुकने नहीं दिया! यजीद जंग जीतकर भी तारीख के पन्नों में हमेशा के लिए मिट गया और जलील हो गया, लेकिन इमाम हुसैन आज भी हर इंसाफ पसंद इंसान के दिल पर राज कर रहे हैं। इसी दर्द भरे और रूह कंपा देने वाले इतिहास को हमने बेहद अदब और जज्बात के साथ इस वीडियो में समेटा है। एक बार इस इतिहास को पूरा ज़रूर सुनिए, आपकी आँखों से आँसू रुकेंगे नहीं। #WaqiaeKarbala #ImamHussain #Muharram2026 #10Muharram #YaHussain #KarbalaHistory #IslamicHistory #Ashura

Parliament Street, New Delhi | Jun 26, 2026

Karbala History: शब-ए-आशूर की दास्तान‚ मासूमो प्यास और आख़िरी पहरा | 9 Muharram | Imam Hussain

🚨 9 मुहर्रम: शब-ए-आशूर की वो दर्दनाक रात, जब हुसैनी ख़ीमों में चराग़ बुझा दिया गया था... 🖤
मुहर्रम की नौवीं तारीख़ आ चुकी है... कर्बला के तपते हुए सहरा (रेगिस्तान) में ज़ुल्म और सितम की इन्तिहा होने वाली है। यह वो दिन है जिसे इतिहास 'यौम-ए-तासूआ' कहता है। हुसैनी कुनबे (परिवार) पर पानी बंद हुए तीन दिन गुज़र चुके हैं। 6 महीने के अली असग़र से लेकर 4 साल की मासूम जनाब-ए-सकीना तक, प्यास की शिद्दत से बिलख रहे हैं।

⚔️ हज़रत अब्बास की वफ़ा और अमान-नामे को ठोकर:
9 मुहर्रम की दोपहर जब ज़ालिम शिम्र यज़ीद की तरफ़ से 'अमान-नामा' (जान की भीख) लेकर आया और हज़रत अब्बास (अ.स.) से कहा कि हुसैन का साथ छोड़ दो तो तुम्हारी जान बख्श दी जाएगी, तब शेर-ए-ख़ुदा के बेटे का ख़ून खौल उठा! उन्होंने उस कागज़ को ठोकर मार दी और फ़रमाया—

"ला'नत हो तुझ पर और तेरी अमान पर! तू हमें अमान देता है और रसूल के नवासे, फ़ातिमा के लाल के लिए कोई अमान नहीं? हम जीते जी अपने भाई और अपने इमाम को तन्हा छोड़ दें? यह कभी नहीं हो सकता!"

🌙 वो आख़िरी रात और चराग़ का बुझाया जाना:
जब यज़ीदी फ़ौज हमला करने बढ़ी, तो इमाम हुसैन (अ.स.) ने अपनी जान बचाने के लिए नहीं, बल्कि अपने रब की इबादत, नमाज़ और क़ुरआन की तिलावत के लिए सिर्फ़ एक रात की मोहलत मांगी।

यह 9 मुहर्रम की वो आख़िरी रात थी जिसे 'शब-ए-आशूर' कहा जाता है। मौला हुसैन ने ख़ीमे का चराग़ (दीया) बुझाकर अपने साथियों से कहा था—"रात का अंधेरा है, जिसे जाना है वो चला जाए, ये लोग सिर्फ़ मेरी जान के दुश्मन हैं।" लेकिन वफ़ादारों ने रोकर कहा—"मौला! अगर हमें सत्तर बार भी शहीद किया जाए, तब भी हम आपका साथ नहीं छोड़ेंगे।"

उस रात ख़ीमों के बाहर हज़रत अब्बास (अ.स.) नंगी तलवार हाथ में लिए पहरा दे रहे थे, यह जानते हुए कि यह पहरेदारी की आख़िरी रात है और अगले दिन (10 मुहर्रम) उन्हें बच्चों के पानी के लिए अपने दोनों बाजू कटवाने हैं।

सलाम हो हुसैन पर, सलाम हो अब्बास पर, और सलाम हो कर्बला के उन 72 जांनिसारों पर जिन्होंने भूख और प्यास की हालत में इस्लाम को हमेशा के लिए ज़िंदा कर दिया। 🙏

👇 अपनी अक़ीदत के फूल पेश करें:
कमेंट बॉक्स में 'या हुसैन' (Ya Hussain) ज़रूर लिखें और इस रूहानी इतिहास को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करके हुसैनियत का पैग़ाम हर घर तक पहुँचाएं।

#9Muharram #ShabeAshura #KarbalaHistory #ImamHussain #HazratAbbas #YaHussain #IslamicHistory #DastakLiveNews #Muharram2026

Karbala History: शब-ए-आशूर की दास्तान‚ मासूमो प्यास और आख़िरी पहरा | 9 Muharram | Imam Hussain 🚨 9 मुहर्रम: शब-ए-आशूर की वो दर्दनाक रात, जब हुसैनी ख़ीमों में चराग़ बुझा दिया गया था... 🖤 मुहर्रम की नौवीं तारीख़ आ चुकी है... कर्बला के तपते हुए सहरा (रेगिस्तान) में ज़ुल्म और सितम की इन्तिहा होने वाली है। यह वो दिन है जिसे इतिहास 'यौम-ए-तासूआ' कहता है। हुसैनी कुनबे (परिवार) पर पानी बंद हुए तीन दिन गुज़र चुके हैं। 6 महीने के अली असग़र से लेकर 4 साल की मासूम जनाब-ए-सकीना तक, प्यास की शिद्दत से बिलख रहे हैं। ⚔️ हज़रत अब्बास की वफ़ा और अमान-नामे को ठोकर: 9 मुहर्रम की दोपहर जब ज़ालिम शिम्र यज़ीद की तरफ़ से 'अमान-नामा' (जान की भीख) लेकर आया और हज़रत अब्बास (अ.स.) से कहा कि हुसैन का साथ छोड़ दो तो तुम्हारी जान बख्श दी जाएगी, तब शेर-ए-ख़ुदा के बेटे का ख़ून खौल उठा! उन्होंने उस कागज़ को ठोकर मार दी और फ़रमाया— "ला'नत हो तुझ पर और तेरी अमान पर! तू हमें अमान देता है और रसूल के नवासे, फ़ातिमा के लाल के लिए कोई अमान नहीं? हम जीते जी अपने भाई और अपने इमाम को तन्हा छोड़ दें? यह कभी नहीं हो सकता!" 🌙 वो आख़िरी रात और चराग़ का बुझाया जाना: जब यज़ीदी फ़ौज हमला करने बढ़ी, तो इमाम हुसैन (अ.स.) ने अपनी जान बचाने के लिए नहीं, बल्कि अपने रब की इबादत, नमाज़ और क़ुरआन की तिलावत के लिए सिर्फ़ एक रात की मोहलत मांगी। यह 9 मुहर्रम की वो आख़िरी रात थी जिसे 'शब-ए-आशूर' कहा जाता है। मौला हुसैन ने ख़ीमे का चराग़ (दीया) बुझाकर अपने साथियों से कहा था—"रात का अंधेरा है, जिसे जाना है वो चला जाए, ये लोग सिर्फ़ मेरी जान के दुश्मन हैं।" लेकिन वफ़ादारों ने रोकर कहा—"मौला! अगर हमें सत्तर बार भी शहीद किया जाए, तब भी हम आपका साथ नहीं छोड़ेंगे।" उस रात ख़ीमों के बाहर हज़रत अब्बास (अ.स.) नंगी तलवार हाथ में लिए पहरा दे रहे थे, यह जानते हुए कि यह पहरेदारी की आख़िरी रात है और अगले दिन (10 मुहर्रम) उन्हें बच्चों के पानी के लिए अपने दोनों बाजू कटवाने हैं। सलाम हो हुसैन पर, सलाम हो अब्बास पर, और सलाम हो कर्बला के उन 72 जांनिसारों पर जिन्होंने भूख और प्यास की हालत में इस्लाम को हमेशा के लिए ज़िंदा कर दिया। 🙏 👇 अपनी अक़ीदत के फूल पेश करें: कमेंट बॉक्स में 'या हुसैन' (Ya Hussain) ज़रूर लिखें और इस रूहानी इतिहास को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करके हुसैनियत का पैग़ाम हर घर तक पहुँचाएं। #9Muharram #ShabeAshura #KarbalaHistory #ImamHussain #HazratAbbas #YaHussain #IslamicHistory #DastakLiveNews #Muharram2026

Parliament Street, New Delhi | Jun 25, 2026

Karbala History: 6 मुहर्रम कर्बला का दर्दनाक इतिहास | 6 Muharram | Imam Hussain

6 मुहर्रम: इतिहास का वो दर्दनाक पन्ना, जिसे सुनकर पत्थरों का जिगर भी पानी हो जाए... 💔😭

आज मुहर्रम की 6 तारीख है। कर्बला का वो खौफनाक मोड़, जब ज़ालिम यज़ीदी हुकूमत ने इंसानियत के दामन को तार-तार करना शुरू कर दिया था।

6 मुहर्रम की इसी ढलती हुई शाम को यज़ीदी कमांडर उमर इब्ने साद को हुक्म मिला था कि: "हुसैन और उनके साथियों के लिए पानी का रास्ता रोक दो। उनके खेमों तक पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंचनी चाहिए।"

ज़रा दिल पर हाथ रखकर सोचिए... वो पानी जो अल्लाह ने दुनिया के हर परिंदे, हर जानवर, यहाँ तक कि काफ़िरों के लिए भी मुफ्त बनाया था, उसी पानी पर अल्लाह के रसूल के नवासे (पोते) और उनके छोटे-छोटे मासूम बच्चों के लिए पहरा लगा दिया गया!

एक तरफ हज़ारों का हथियारों से लैस लश्कर था, और दूसरी तरफ हक (सच्चाई) पर डटे हुए मौला हुसैन के सिर्फ 72 जांनिसार, जिनमें 6 महीने के अली असग़र जैसे प्यासे बच्चे भी शामिल थे। यज़ीद ने सोचा था कि वो पानी बंद करके इमाम हुसैन को झुका देगा, लेकिन नबी के कुनबे ने भूखा-प्यासा रहकर अपनी जान दे दी, मगर ज़ुल्म के आगे सर नहीं झुकाया।

6 मुहर्रम का पूरा इतिहास और वो रूह को झकझोर देने वाली दास्तान हमने इस विशेष वीडियो में बयां की है। इस वीडियो को एक बार ज़रूर देखें और दूसरों के साथ शेयर करें ताकि कर्बला का सच हर इंसान तक पहुँचे।

#6Muharram #KarbalaHistory #ImamHussain #YaHussain #MuharramWaqia #KarbalaKaSach #IslamicHistory #FbViral

Karbala History: 6 मुहर्रम कर्बला का दर्दनाक इतिहास | 6 Muharram | Imam Hussain 6 मुहर्रम: इतिहास का वो दर्दनाक पन्ना, जिसे सुनकर पत्थरों का जिगर भी पानी हो जाए... 💔😭 आज मुहर्रम की 6 तारीख है। कर्बला का वो खौफनाक मोड़, जब ज़ालिम यज़ीदी हुकूमत ने इंसानियत के दामन को तार-तार करना शुरू कर दिया था। 6 मुहर्रम की इसी ढलती हुई शाम को यज़ीदी कमांडर उमर इब्ने साद को हुक्म मिला था कि: "हुसैन और उनके साथियों के लिए पानी का रास्ता रोक दो। उनके खेमों तक पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंचनी चाहिए।" ज़रा दिल पर हाथ रखकर सोचिए... वो पानी जो अल्लाह ने दुनिया के हर परिंदे, हर जानवर, यहाँ तक कि काफ़िरों के लिए भी मुफ्त बनाया था, उसी पानी पर अल्लाह के रसूल के नवासे (पोते) और उनके छोटे-छोटे मासूम बच्चों के लिए पहरा लगा दिया गया! एक तरफ हज़ारों का हथियारों से लैस लश्कर था, और दूसरी तरफ हक (सच्चाई) पर डटे हुए मौला हुसैन के सिर्फ 72 जांनिसार, जिनमें 6 महीने के अली असग़र जैसे प्यासे बच्चे भी शामिल थे। यज़ीद ने सोचा था कि वो पानी बंद करके इमाम हुसैन को झुका देगा, लेकिन नबी के कुनबे ने भूखा-प्यासा रहकर अपनी जान दे दी, मगर ज़ुल्म के आगे सर नहीं झुकाया। 6 मुहर्रम का पूरा इतिहास और वो रूह को झकझोर देने वाली दास्तान हमने इस विशेष वीडियो में बयां की है। इस वीडियो को एक बार ज़रूर देखें और दूसरों के साथ शेयर करें ताकि कर्बला का सच हर इंसान तक पहुँचे। #6Muharram #KarbalaHistory #ImamHussain #YaHussain #MuharramWaqia #KarbalaKaSach #IslamicHistory #FbViral

Parliament Street, New Delhi | Jun 22, 2026

Karbala History: 5 Muharram की दर्दनाक रात‚ यज़ीदी फौज का बढ़ता दबाव और Imam Hussain का सब्र

🏴 5 मोहर्रम का दर्द... कर्बला में बढ़ा घेराव! 💔

5 मोहर्रम 61 हिजरी का दिन कर्बला के इतिहास में बेहद दर्दनाक माना जाता है। यज़ीद की फौज लगातार बढ़ रही थी और इमाम हुसैन (अ.स.) के खेमों पर दबाव बढ़ता जा रहा था। मगर हक़ के रास्ते पर चलने वाले कभी जुल्म के सामने नहीं झुके।

जब पूरी दुनिया खामोश थी, तब कर्बला में इंसानियत, सब्र और कुर्बानी की सबसे बड़ी मिसाल लिखी जा रही थी। हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके वफादार साथियों ने दुनिया को सिखाया कि सच और इंसाफ़ के लिए हर कुर्बानी छोटी है।

🌹 कर्बला सिर्फ एक जंग नहीं, बल्कि हक़ और बातिल के बीच फैसला करने वाली अज़ीम दास्तान है।

😭 5 मोहर्रम हमें सब्र, इस्तिकामत और अल्लाह पर भरोसे का पैगाम देता है।

🖤 या हुसैन (अ.स.) 🖤

📿 इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि कर्बला का पैगाम हर घर तक पहुंचे।

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Karbala History: 5 Muharram की दर्दनाक रात‚ यज़ीदी फौज का बढ़ता दबाव और Imam Hussain का सब्र 🏴 5 मोहर्रम का दर्द... कर्बला में बढ़ा घेराव! 💔 5 मोहर्रम 61 हिजरी का दिन कर्बला के इतिहास में बेहद दर्दनाक माना जाता है। यज़ीद की फौज लगातार बढ़ रही थी और इमाम हुसैन (अ.स.) के खेमों पर दबाव बढ़ता जा रहा था। मगर हक़ के रास्ते पर चलने वाले कभी जुल्म के सामने नहीं झुके। जब पूरी दुनिया खामोश थी, तब कर्बला में इंसानियत, सब्र और कुर्बानी की सबसे बड़ी मिसाल लिखी जा रही थी। हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके वफादार साथियों ने दुनिया को सिखाया कि सच और इंसाफ़ के लिए हर कुर्बानी छोटी है। 🌹 कर्बला सिर्फ एक जंग नहीं, बल्कि हक़ और बातिल के बीच फैसला करने वाली अज़ीम दास्तान है। 😭 5 मोहर्रम हमें सब्र, इस्तिकामत और अल्लाह पर भरोसे का पैगाम देता है। 🖤 या हुसैन (अ.स.) 🖤 📿 इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि कर्बला का पैगाम हर घर तक पहुंचे। #5Moharram #5Muharram #Karbala #ImamHussain #YaHussain #Muharram2026 #KarbalaHistory #IslamicHistory #AhlulBayt #YaZainab #Ashura #KarbalaWaqia #HussainForHumanity #MuharramSeries #IslamicPost #FacebookViral #TrendingPost #Moharram1448H #LabbaikYaHussain 🏴💔😭

Parliament Street, New Delhi | Jun 21, 2026

Karbala History : 3 मुहर्रम जब यज़ीदी फ़ौज ने इमाम हुसैन (अ.स.) को घेरा | Muharram | Imam Hussain

"इस्लाम ज़िंदा होता है हर कर्बला के बाद..." 🏴

साल 61 हिजरी, 3 मुहर्रम का वो दिन... कर्बला की तपती रेत और ज़ुल्म के साए!

2 मुहर्रम को नवासा-ए-रसूल हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम कर्बला की सरज़मीन पर कदम रख चुके थे। लेकिन 3 मुहर्रम का वो सूरज, अपने साथ ज़ुल्म और मसायब (मुसीबतों) की वो दास्तान लेकर आया, जिसे सुनकर आज भी आंखें अश्कबार हो जाती हैं।

आज ही के दिन यज़ीद की फ़ौज का 4,000 का पहला लश्कर उमर इब्ने साद की कयादत में कर्बला पहुँचा था। हुकूमत के लालच में अंधे होकर वो उस नबी के नवासे के सामने आ खड़े हुए, जिसके कलमे का वो दम भरते थे।

📌 जब यज़ीदी फ़ौज ने इमाम हुसैन से पूछा कि 'आप यहाँ क्यों आए हैं?' तो इमाम-ए-आली मकाम ने निहायत सब्र और जलाल से क्या जवाब दिया था?
📌 कैसे शुरू हुई हुसैनी खेमे में पानी की किल्लत की साज़िश?

इस पूरे इतिहास को, 3 मुहर्रम के मुकम्मल वाक़िये को बहुत ही अदब के साथ इस वीडियो में बयां किया गया है। वक्त निकाल कर इस तारीख़ी मंज़र को ज़रूर देखें और ज़िक्र-ए-हुसैन की नीयत से इसे आगे शेयर करें।👇

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Karbala History : 3 मुहर्रम जब यज़ीदी फ़ौज ने इमाम हुसैन (अ.स.) को घेरा | Muharram | Imam Hussain "इस्लाम ज़िंदा होता है हर कर्बला के बाद..." 🏴 साल 61 हिजरी, 3 मुहर्रम का वो दिन... कर्बला की तपती रेत और ज़ुल्म के साए! 2 मुहर्रम को नवासा-ए-रसूल हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम कर्बला की सरज़मीन पर कदम रख चुके थे। लेकिन 3 मुहर्रम का वो सूरज, अपने साथ ज़ुल्म और मसायब (मुसीबतों) की वो दास्तान लेकर आया, जिसे सुनकर आज भी आंखें अश्कबार हो जाती हैं। आज ही के दिन यज़ीद की फ़ौज का 4,000 का पहला लश्कर उमर इब्ने साद की कयादत में कर्बला पहुँचा था। हुकूमत के लालच में अंधे होकर वो उस नबी के नवासे के सामने आ खड़े हुए, जिसके कलमे का वो दम भरते थे। 📌 जब यज़ीदी फ़ौज ने इमाम हुसैन से पूछा कि 'आप यहाँ क्यों आए हैं?' तो इमाम-ए-आली मकाम ने निहायत सब्र और जलाल से क्या जवाब दिया था? 📌 कैसे शुरू हुई हुसैनी खेमे में पानी की किल्लत की साज़िश? इस पूरे इतिहास को, 3 मुहर्रम के मुकम्मल वाक़िये को बहुत ही अदब के साथ इस वीडियो में बयां किया गया है। वक्त निकाल कर इस तारीख़ी मंज़र को ज़रूर देखें और ज़िक्र-ए-हुसैन की नीयत से इसे आगे शेयर करें।👇 #3Muharram #KarbalaHistory #ImamHussain #YaHussain #Karbala #Muharram #IslamicHistory

Parliament Street, New Delhi | Jun 19, 2026

Latest Karbalahistory News Videos - Watch the Latest News of August 4, 2026 | Public App