हरियाणा की राजनीति में फिर गूंजा इनेलो का नाम… क्या बदल रहा है राजनीतिक माहौल?
नूंह |#बेधडक_हरियाणा_न्यूज़
हरियाणा के अंतिम छोर नूंह की धरती पर आज इंडियन नेशनल लोकदल ने जननायक स्वर्गीय चौधरी देवीलाल जी की 113वीं जयंती के अवसर पर सम्मान दिवस रैली की। रैली का मकसद सिर्फ देवीलाल जी को याद करना नहीं था, बल्कि इनेलो ने अपने संगठन और राजनीतिक मौजूदगी का संदेश देने की कोशिश भी की।
रैली में उमड़ा उत्साह देखकर पिछले करीब एक दशक की हरियाणा की राजनीति आंखों के सामने घूम जाती है।
एक समय था 2014 का, जब हरियाणा की राजनीति में इनेलो एक बड़ी ताकत थी। उस विधानसभा चुनाव में इनेलो ने 19 सीटें जीती थीं। भाजपा 47 सीटों के साथ सत्ता में आई और कांग्रेस 15 सीटों पर सिमट गई थी।
फिर आया 2018 का दौर…
चौटाला परिवार के भीतर राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आए। अक्टूबर 2018 की गोहाना रैली के बाद विवाद बढ़ा और दिसंबर 2018 में दुष्यंत चौटाला ने जननायक जनता पार्टी यानी जेजेपी के गठन का ऐलान किया। उस समय ओमप्रकाश चौटाला और अजय चौटाला जेल में थे और इनेलो संगठन की जिम्मेदारी अभय चौटाला संभाल रहे थे।
यहीं से हरियाणा की राजनीति में एक बड़ा बदलाव शुरू हुआ।
2019 का विधानसभा चुनाव आया तो इनेलो और जेजेपी अलग-अलग मैदान में उतरीं। भाजपा 40 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, कांग्रेस को 31 और जेजेपी को 10 सीटें मिलीं। इनेलो सिर्फ एक सीट जीत सकी। इसके बाद भाजपा और जेजेपी ने मिलकर सरकार बनाई और दुष्यंत चौटाला उपमुख्यमंत्री बने।
इसके बाद हरियाणा ने किसान आंदोलन का दौर भी देखा। 2020-21 में कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन ने प्रदेश की राजनीति को प्रभावित किया और कई जगहों पर किसान संगठनों तथा खापों की सक्रियता दिखाई दी।
फिर आया मार्च 2024।
भाजपा और जेजेपी का करीब साढ़े चार साल पुराना गठबंधन टूट गया। मनोहर लाल खट्टर ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और नायब सिंह सैनी ने मुख्यमंत्री पद संभाला।
इसके कुछ ही महीनों बाद लोकसभा चुनाव हुए।
हरियाणा की 10 लोकसभा सीटों में भाजपा और कांग्रेस ने पांच-पांच सीटें जीतीं। यानी मुकाबला बेहद नजदीकी राजनीतिक तस्वीर के साथ सामने आया।
और फिर आया अक्टूबर 2024 का विधानसभा चुनाव।
भाजपा ने 48 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। कांग्रेस को 37 और इनेलो को 2 सीटें मिलीं। जेजेपी इस चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत सकी।
इनेलो के लिए यह संख्या भले ही छोटी हो, लेकिन 2019 की एक सीट से 2024 में दो सीटों तक पहुंचना उसके लिए राजनीतिक वापसी की दिशा में एक संकेत माना जा सकता है। पार्टी का वोट प्रतिशत भी 2019 के 2.44 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 4.14 प्रतिशत हुआ।
अब 2026 में तस्वीर फिर बदलती दिखाई दे रही है।
रोहतक के बाद नूंह में इनेलो की बड़ी रैली और कार्यकर्ताओं में दिखाई देता उत्साह यह बताता है कि पार्टी अपने पुराने संगठन और जनाधार को दोबारा मजबूत करने की कोशिश में जुटी है।
खास बात यह है कि नूंह कभी इनेलो के मजबूत इलाकों में रहा है। 2014 में पार्टी ने नूंह, फिरोजपुर झिरका और हथीन में जीत दर्ज की थी, लेकिन 2024 में नूंह जिले की तीनों विधानसभा सीटें कांग्रेस के खाते में गईं। ऐसे में नूंह में सम्मान दिवस रैली करना इनेलो के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संदेश भी माना जा रहा है।
आज हरियाणा की विधानसभा में भाजपा सत्ता में है, कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है और इनेलो की भी विधानसभा में मौजूदगी है। 2024 के आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला काफी नजदीक हुआ है, जबकि क्षेत्रीय दलों के सामने अपना आधार बढ़ाने की चुनौती बनी हुई है।
अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि इनेलो की रैली में कितनी भीड़ आई।
बड़ा सवाल यह है कि—
क्या यह भीड़ वोट में बदलेगी?
क्या कार्यकर्ताओं का यह उत्साह अगले कुछ वर्षों तक कायम रहेगा?
क्या इनेलो पुराने ग्रामीण और किसान जनाधार को फिर से जोड़ पाएगी?
क्या कांग्रेस अपने संगठन और विपक्ष की भूमिका को और मजबूत कर पाएगी?
और भाजपा के सामने आने वाले वर्षों में राजनीतिक चुनौतियां किस रूप में खड़ी होंगी?
इन सवालों का जवाब आज नहीं, आने वाला समय और जनता के फैसले देंगे।
राजनीति में कोई स्थिति हमेशा के लिए स्थायी नहीं होती।
2014 से 2024 तक हरियाणा ने सत्ता, गठबंधन, पार्टी विभाजन और राजनीतिक समीकरणों में कई बड़े बदलाव देखे हैं।
अब 2026 में नूंह की धरती से इनेलो ने फिर अपने कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने का दावा किया है।
तीन साल बाद तस्वीर क्या होगी? कौन मजबूत होगा, कौन पीछे जाएगा और हरियाणा की जनता किस राजनीतिक रास्ते को चुनेगी—यह वक्त बताएगा।
और अंत में नूंह रैली का यह छोटा सा वीडियो जरूर देखिए…
एक लोक कलाकार ने अपनी स्थानीय भाषा में गीत प्रस्तुत किया और देखते ही देखते रैली स्थल पर मौजूद लोग उत्साह से भर गए। यही राजनीतिक रैलियों की एक अलग तस्वीर होती है—जहां भाषण के साथ लोक संस्कृति भी अपना रंग दिखाती है।
आपकी नजर में हरियाणा की राजनीति अगले तीन साल में किस दिशा में जाएगी? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।
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संचालक — बेधड़क हरियाणा न्यूज़
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Sirsa, Sirsa | Sep 28, 2026