लोकतंत्र पर सवाल, पत्रकारिता की आज़ादी पर चोट!
देश में लोकतंत्र के साथ-साथ क्या चौथे स्तंभ की आवाज़ को भी दबाया जा रहा है?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद दिल्ली की सड़कों पर पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा जैसी पत्रकारों को कथित तौर पर घसीटकर बसों में बैठाने और हिरासत में लिए जाने की तस्वीरें गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
अगर अपनी आवाज़ उठाना, सवाल पूछना और सच दिखाना ही संघर्ष बन जाए, तो इसे क्या नाम देंगे?
क्या यह FREEDOM STRUGGLE 2.0 की शुरुआत है?
लोकतंत्र में असहमति की आवाज़ और स्वतंत्र पत्रकारिता का सम्मान होना चाहिए।
कल मिलते हैं दिल्ली में…
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Indore, Indore | Oct 11, 2026