दोस्तों, क्या आप जानते हैं कि नैनीताल की खोज तक पहुँचने की कहानी जितनी खूबसूरत है, उतनी ही रोमांचक और संघर्षपूर्ण भी है?
18 नवंबर 1839 को ब्रिटिश व्यापारी P. Barron नैनीताल की उस खूबसूरत झील तक पहुँचे, जिसे बाद में दुनिया नैनीताल के नाम से जानने लगी। लेकिन यहाँ तक पहुँचना उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था।
दरअसल, Barron ने नैनीताल के बारे में George William Traill, जो 1823 में नैनीताल पहुँचने वाले शुरुआती ब्रिटिश अधिकारियों में से एक थे, और कुछ स्थानीय पहाड़ी लोगों से सुना था कि नैनीताल बहुत सुंदर जगह है इसीलिए नैनीताल को अपनी आँखों से देखने की उत्सुकता उनकी इतनी बढ़ गई थी कि वह इसे खोजने के लिए जैसे जुनूनी हो गए थे।
सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि स्थानीय पहाड़ी लोग उन्हें नैनीताल का रास्ता ठीक से बताने को तैयार नहीं थे। लेकिन Barron ने हार नहीं मानी। वह लगातार रास्ते तलाशते रहे और हिमालय की यात्रा के बाद एक पहाड़ी आदमी को सिर पर पत्थर रखने का आदेश दिया कि यह पत्थर इसके सिर से तब उतरेगा जबतक यह नैनीताल तक ना पहुंचा दे .....आखिरकार शेर का डांडा पहाड़ी तक P Barron उस पहाड़ी आदमी के साथ पहुँच गए।
और फिर जो दृश्य उनकी आँखों के सामने था, उसने उन्हें मंत्रमुग्ध कर दिया।
सामने फैली हुई नैनीझील का नीला-हरा पानी, जिसमें आसपास के पेड़-पौधों की परछाइयाँ बिल्कुल साफ दिखाई दे रही थीं। Barron के अनुसार, झील का पानी ऐसा चमक रहा था मानो उसमें मोती बिखरे हों। उन्होंने लिखा कि उन्होंने इससे पहले इतनी सुंदर जगह नहीं देखी थी।
लेकिन आज के कंक्रीट से भरे नैनीताल की कल्पना उस समय बिल्कुल मत कीजिए।
1839 का नैनीताल चारों तरफ से घने जंगलों से घिरा हुआ था। ऊँचे देवदार और बाँज के पेड़, चारों ओर सन्नाटा और जंगल की प्राकृतिक खूबसूरती। Barron को इतनी ठंड महसूस हो रही थी कि उस समय का नैनीताल उन्हें बिल्कुल अलग ही दुनिया जैसा लग रहा था।
और उस समय का नैनीताल आज से कितना अलग था, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि तल्लीताल में, जहाँ आज Post Office दिखाई देता है, वहाँ एक छोटा-सा Naina Devi Temple था। वहीं एक बड़ा-सा झूला भी था, जो संभवतः किसी मेले या स्थानीय आयोजन में इस्तेमाल होता होगा।
उस रात Barron अपने साथी Captain C. के साथ मल्लीताल में नैनीझील के किनारे अपना टेंट लगाकर रुके।
अगली सुबह जब उनकी आँख खुली तो उनके टेंट के सामने का दृश्य भी कम दिलचस्प नहीं था।
सैकड़ों पहाड़ी मुर्गे उनके टेंट के आसपास दाना चुग रहे थे।
Nainital, Nainital | Aug 27, 2026