सावन का पहला सोमवार, कीजिये चोमेश्वर महादेव के दर्शन चार चोमा (कोटा)
जहां चारों दिशाओं से देते हैं महादेव दर्शन, वही है चारचौमा धाम
- गुप्तकालीन चतुर्मुख शिवलिंग के दर्शन के लिए दूर-दूर से पहुंच रहे श्रद्धालु
- अद्भुत शिल्पकला और धार्मिक महिमा का अनोखा संगम
सांगोद. कैथून. सावन माह के आगमन के साथ ही भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति का माहौल चरम पर है। कोटा जिले के कैथून क्षेत्र स्थित #चारचौमा गांव का प्राचीन शिव मंदिर इन दिनों शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। कोटा से करीब 40 किलोमीटर दूर कालीसिंध नदी के पश्चिमी तट पर स्थित यह गुप्तकालीन मंदिर अपनी धार्मिक मान्यता, ऐतिहासिक महत्व और अद्भुत स्थापत्य कला के कारण देशभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। सावन में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं।
मंदिर में यह है खास
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक घोषित यह मंदिर गुप्तकालीन स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। मंदिर के गर्भगृह में काले पत्थर से निर्मित दुर्लभ चतुर्मुख शिवलिंग स्थापित है, जिस पर सदाशिव, विष्णु, ब्रह्मा और अर्धनारीश्वर के स्वरूप अंकित हैं। शिवलिंग पर जटाजूट, चंद्रमा और अन्य अलंकरण तत्कालीन शिल्पकला की श्रेष्ठता का परिचय देते हैं। गर्भगृह में माता पार्वती की आदमकद प्रतिमा भी विराजमान है, जिन्हें स्थानीय लोग भीलनी माताजी के रूप में पूजते हैं।
ऊंचे चबूतरे पर निर्मित है मंदिर
पूर्वाभिमुख यह मंदिर ऊंचे चबूतरे पर निर्मित है। इसमें गर्भगृह, अंतराल, सभा मंडप और नागर शैली का शिखर है। स्तंभों पर उकेरी गई पुष्प एवं ज्यामितीय आकृतियों की नक्काशी इसकी भव्यता को और बढ़ाती है। मंदिर परिसर के नीचे स्थित प्राचीन कुंड भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है।
होते रहते है आयोजन
मंदिर से जुड़ी हनुमान और विभीषण की लोककथाएं श्रद्धालुओं की आस्था को और प्रगाढ़ बनाती हैं। सावन में यहां प्रतिदिन भजन-कीर्तन, धार्मिक अनुष्ठान और गोठ का आयोजन होता है। महाशिवरात्रि पर लगने वाले पंद्रह दिवसीय मेले में राजस्थान सहित अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और व्यापारी पहुंचते हैं।
चारचौमा महादेव मंदिर की विशेषताएं
- एएसआई द्वारा राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक
- गुप्तकालीन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण
- काले पत्थर का दुर्लभ चतुर्मुख शिवलिंग देशभर में अनूठा
- नागर शैली का शिखर, सुंदर नक्काशीदार स्तंभ और प्राचीन कुंड
- महाशिवरात्रि पर 15 दिवसीय विशाल मेले का आयोजन।
- सावन में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक व दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
Sangod, Kota | Aug 3, 2026