डीएपी की किल्लत से किसान न हों परेशान, यूरिया के साथ एसएसपी अपनाने की सलाह
औरंगाबाद जिले में डीएपी उर्वरक की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं होने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि जिला कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि डीएपी की अनुपलब्धता को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। किसान इसके विकल्प के रूप में यूरिया के साथ सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) अथवा उपयुक्त एनपीके मिश्रित उर्वरकों का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग कर सकते हैं। जिला कृषि पदाधिकारी संदीप राज ने मंगलवार को जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा की अध्यक्षता में हुई कृषि विभाग की बैठक में उर्वरकों की उपलब्धता की जानकारी दी।
जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि वर्तमान समय में जिले में डीएपी की मांग काफी अधिक है, लेकिन राज्य स्तर से मांग के अनुरूप इसकी पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो सकी है। डीएपी में 18 प्रतिशत नाइट्रोजन और 46 प्रतिशत फॉस्फोरस होता है। फसल के बेहतर विकास के लिए नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश प्रमुख पोषक तत्व हैं। ऐसे में डीएपी नहीं मिलने पर किसान उपलब्ध वैकल्पिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि जिले में एसएसपी की उपलब्धता मांग की तुलना में पर्याप्त है। वर्तमान में एसएसपी का स्टॉक मांग का करीब 295 प्रतिशत है। यानी मांग की तुलना में लगभग पौने तीन गुना एसएसपी उपलब्ध है। इसकी एक बोरी किसानों को करीब 600 से 700 रुपये में मिल रही है। डीएपी के विकल्प के तौर पर एक बोरी यूरिया के साथ करीब दो से ढाई बोरी एसएसपी का उपयोग किया जा सकता है। एसएसपी में करीब 11 प्रतिशत सल्फर भी होता है, जो फसल के लिए आवश्यक पोषक तत्व है।
कृषि विभाग ने उर्वरक के इस्तेमाल के समय को भी महत्वपूर्ण बताया है। रोपनी के समय खेत की तैयारी के दौरान डीएपी या उसके विकल्प के रूप में फॉस्फेटयुक्त उर्वरक का प्रयोग अधिक प्रभावी माना जाता है। खड़ी फसल में बाद में दानेदार उर्वरक डालने पर उसकी उपयोग दक्षता अपेक्षाकृत कम हो सकती है। इसलिए किसानों को फसल की आवश्यकता और उचित अवस्था के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
डीएपी के अलावा जिले में एनपीके के विभिन्न ग्रेड भी उपलब्ध हैं। 20:20:0:13 ग्रेड में 20 प्रतिशत नाइट्रोजन, 20 प्रतिशत फॉस्फोरस और 13 प्रतिशत सल्फर होता है। वहीं 12:32:16 ग्रेड का मिश्रित उर्वरक भी सभी प्रखंडों में उपलब्ध बताया गया है। किसान मिट्टी की स्थिति और फसल की आवश्यकता के अनुसार इनका उपयोग कर सकते हैं।
जिला कृषि पदाधिकारी ने किसानों से अनावश्यक रूप से उर्वरकों की खरीद और भंडारण नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नई खेप प्राप्त होने पर डीएपी समेत अन्य उर्वरकों का सभी प्रखंडों में मांग और आवश्यकता के अनुरूप समानुपातिक वितरण कराया जाएगा। किसानों को निर्धारित मात्रा और वैज्ञानिक अनुशंसा के अनुसार ही उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।