माँ मुंडेश्वरी मंदिर के वैज्ञानिक जीर्णोद्धार एवं इको-टूरिज्म विकास हेतु उच्चस्तरीय टीम का व्यापक निरीक्षण
विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह के नेतृत्व में मंदिर परिसर का किया आकलन, यूनेस्को सूची में शामिल करने पर भी विचार
कैमूर जिले के ऐतिहासिक एवं प्राचीन माँ मुंडेश्वरी मंदिर के वैज्ञानिक जीर्णोद्धार तथा आसपास के क्षेत्र में इको-टूरिज्म के समग्र विकास के उद्देश्य से गठित उच्चस्तरीय समिति ने सोमवार को मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र का व्यापक निरीक्षण किया।
यह निरीक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के दिशा-निर्देशों एवं वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप मंदिर के संरक्षण एवं समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
उच्चस्तरीय टीम में विकास आयुक्त, बिहार मिहिर कुमार सिंह (भा.प्र.से.), कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार के सचिव श्री प्रणव कुमार, जिला पदाधिकारी, कैमूर, उप विकास आयुक्त, कैमूर, वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ), कैमूर तथा मंदिर न्यास समिति के प्रतिनिधि शामिल रहे।
निरीक्षण के दौरान पुरातत्व एवं विरासत संरक्षण के क्षेत्र के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. मोहम्मद के.के., कलकत्ता विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष डॉ. रजत सन्याल तथा बिहार विरासत विकास समिति के प्रो. अनिल कुमार भी उपस्थित रहे।
निरीक्षण के क्रम में मंदिर की वर्तमान संरचनात्मक स्थिति, संरक्षण संबंधी आवश्यकताओं तथा वैज्ञानिक जीर्णोद्धार की कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। साथ ही मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र को धार्मिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक पर्यटन के समन्वित केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं का भी आकलन किया गया।
बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि छठी शताब्दी का यह प्राचीन मंदिर न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी अद्वितीय स्थापत्य कला के कारण राष्ट्रीय धरोहर के रूप में भी महत्वपूर्ण है। भविष्य में इसे यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की संभावनाओं पर भी गंभीरतापूर्वक विचार किया गया।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी विकास कार्य एएसआई के मानकों एवं विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में संपादित किए जाएंगे।