।।पहले पेपर लीक फिर सेंटर कि दूरी ने बच्चों का सपना छीना।।
जानकारी के अनुसार पिता कि बाईक पंचर हो जाने से देरी से पहुंची बच्ची एक्जाम सेंटर बाहर पिता का रो रो कर बुरा हाल।
देरी से पहुंची NEET कि छात्रा एग्जाम सेंटर पर तो केंद्र में नो एंट्री से पिता अधिकारियों के सामने हाथ जोड़कर गिरगाड़ता रहा, भीख मांगता रहा लेकिन किसी भी अधिकारी का दिल नहीं पसीजा।
समझ नहीं आता की आखिर ग्रामीण बच्चों की एग्जाम सेंटर की इतनी दूरी क्यों रखी जाती है बच्चों को शहर के स्कूल कॉलेज के बारे में जानकारी नहीं होती है।
अगर बच्चे 5-10 मिनट लेट पहुंचते हैं एग्जाम सेंटर पर तो एंट्री क्यों नहीं दी जाती है यह सिस्टम के लिए बहुत बड़ा सवाल है क्योंकि 5-10 मिनट लेट होने से बच्चों का भविष्य नरक हो जाता है।
किसान मजदूर पर के बच्चे हर तरह से टूट रहे हैं हर तरह से मजबूर हो रहे हैं हर तरह से इनको भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है लेकिन इसका असर अधिकारियों और नेताओं पर कुछ नहीं पड़ रहा है।