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पुलिस ने हल्द्वानी में दो अलग-अलग मामलों का किया खुलासा | #viral #shorts #reels #news

Nainital, Nainital | Aug 12, 2026

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उत्तराखंड की पिछले 24 घंटों की 4 बड़ी खबरें 🚨

देहरादून में UKSSSC पेपर लीक मामले में बड़ा अपडेट, हल्द्वानी में सड़क हादसे में एक युवक की मौत, नैनीताल में कार 200 मीटर गहरी खाई में गिरी और चंपावत में भीषण हादसे में एक व्यक्ति की मौत।

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#UttarakhandNews #UttarakhandNewsToday #Uttarakhand #DehradunNews #HaldwaniNews

उत्तराखंड की पिछले 24 घंटों की 4 बड़ी खबरें 🚨 देहरादून में UKSSSC पेपर लीक मामले में बड़ा अपडेट, हल्द्वानी में सड़क हादसे में एक युवक की मौत, नैनीताल में कार 200 मीटर गहरी खाई में गिरी और चंपावत में भीषण हादसे में एक व्यक्ति की मौत। 📍 उत्तराखंड की हर बड़ी और जरूरी खबर सबसे पहले पाने के लिए अभी Follow करें “अपना उत्तरांचल” ❤️ आपके शहर में आज क्या हुआ? Comment में जरूर बताएं 👇 #UttarakhandNews #UttarakhandNewsToday #Uttarakhand #DehradunNews #HaldwaniNews

Nainital, Nainital | Aug 12, 2026

Gorkhao की Divya Parikshaye Part 2 : EAST India Company destroyed all Divine Testes, Gorkha Shashan In Uttarakhand, Uttarakhand History

Gorkhao की Divya Parikshaye Part 2 : EAST India Company destroyed all Divine Testes, Gorkha Shashan In Uttarakhand, Uttarakhand History

Nainital, Nainital | Aug 12, 2026

अंग्रेजो का नैनीताल में आखिरी समय, Nainital Early 1940's ✅

दोस्तों 1944 आते-आते नैनीताल में अंग्रेजी हुकूमत की पकड़ ढीली पड़ने लगी थी। पूरे देश में आज़ादी की लहर तेज़ हो चुकी थी और उसका असर कुमाऊँ की वादियों तक साफ़ दिखाई देने लगा था। नैनीताल ही नहीं, बल्कि अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चंपावत के लोगों में भी आज़ादी का जोश चरम पर था। जगह-जगह सभाएँ होने लगीं, क्रांतिकारी गतिविधियाँ बढ़ने लगीं और अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज़ बुलंद होने लगी।

सबसे दिलचस्प बात यह थी कि ऊधम सिंह नगर (तत्कालीन तराई क्षेत्र) से भी बड़ी संख्या में लोग नैनीताल पहुँचकर जुलूस और रैलियाँ निकालते थे। इसकी वजह साफ़ थी। उस समय नैनीताल पूरे कुमाऊँ में अंग्रेजों का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सामाजिक केंद्र (Hub) था। यहाँ ब्रिटिश अधिकारी, बड़े व्यापारी और अंग्रेज परिवार बड़ी संख्या में रहते थे।

1947 तक नैनीताल में लगभग 40,000 अंग्रेज निवासी बताए जाते हैं। उन्होंने यहाँ luxurious bungalows, luxurious hotels, churches, schools, clubs और अनेक व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्थापित किए थे। गर्मियों में तो नैनीताल किसी छोटे से अंग्रेजी शहर जैसा दिखाई देता था।

लेकिन इतिहास ने करवट ली क्योकि 15 अगस्त 1947  को भारत के स्वतंत्र होते ही अधिकांश अंग्रेज भारत छोड़ने लगे। कहा जाता है कि नैनीताल से लगभग 98% अंग्रेज आज़ादी के समय तक जा चुके थे। जो कुछ परिवार बचे, वे भी 1948 तक धीरे-धीरे यहाँ से चले गए। केवल बहुत कम संख्या में ब्रिटिश नागरिक भारत में रहे, जिनमें से कुछ को English-medium schools के प्रतिष्ठित विद्यालयों और अन्य संस्थानों के संचालन के लिए भारतीय सरकार ने अस्थायी रूप से कार्य जारी रखने की अनुमति दी।

हालाँकि इतिहास का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह स्वीकार करना होगा कि आधुनिक नैनीताल की बुनियादी पहचान अंग्रेजी शासन के दौरान ही विकसित हुई। पहाड़ों को काटकर सड़कें बनाना, नैनीताल तक बिजली पहुँचाना, काठगोदाम तक रेलवे लाना, शानदार drainage system तैयार करना, व्यवस्थित बाज़ार बसाना, churches, schools, hospitalsऔर खूबसूरत colonial buildings बनाना, यह सब उसी दौर की देन है।

यही कारण है कि इतिहासकार अक्सर कहते हैं कि ब्रिटिश काल का नैनीताल अपनी साफ़-सफाई, अनुशासित नगर व्यवस्था और वास्तुकला के कारण आज के नैनीताल से बिल्कुल अलग और बेहद आकर्षक दिखाई देता था। आज भी मॉल रोड, पुराने होटल, चर्च और अनेक ऐतिहासिक इमारतें उस दौर की कहानी सुनाती हैं।

Follow Nainital Mania Page for Nainital History

अंग्रेजो का नैनीताल में आखिरी समय, Nainital Early 1940's ✅ दोस्तों 1944 आते-आते नैनीताल में अंग्रेजी हुकूमत की पकड़ ढीली पड़ने लगी थी। पूरे देश में आज़ादी की लहर तेज़ हो चुकी थी और उसका असर कुमाऊँ की वादियों तक साफ़ दिखाई देने लगा था। नैनीताल ही नहीं, बल्कि अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चंपावत के लोगों में भी आज़ादी का जोश चरम पर था। जगह-जगह सभाएँ होने लगीं, क्रांतिकारी गतिविधियाँ बढ़ने लगीं और अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज़ बुलंद होने लगी। सबसे दिलचस्प बात यह थी कि ऊधम सिंह नगर (तत्कालीन तराई क्षेत्र) से भी बड़ी संख्या में लोग नैनीताल पहुँचकर जुलूस और रैलियाँ निकालते थे। इसकी वजह साफ़ थी। उस समय नैनीताल पूरे कुमाऊँ में अंग्रेजों का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सामाजिक केंद्र (Hub) था। यहाँ ब्रिटिश अधिकारी, बड़े व्यापारी और अंग्रेज परिवार बड़ी संख्या में रहते थे। 1947 तक नैनीताल में लगभग 40,000 अंग्रेज निवासी बताए जाते हैं। उन्होंने यहाँ luxurious bungalows, luxurious hotels, churches, schools, clubs और अनेक व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्थापित किए थे। गर्मियों में तो नैनीताल किसी छोटे से अंग्रेजी शहर जैसा दिखाई देता था। लेकिन इतिहास ने करवट ली क्योकि 15 अगस्त 1947 को भारत के स्वतंत्र होते ही अधिकांश अंग्रेज भारत छोड़ने लगे। कहा जाता है कि नैनीताल से लगभग 98% अंग्रेज आज़ादी के समय तक जा चुके थे। जो कुछ परिवार बचे, वे भी 1948 तक धीरे-धीरे यहाँ से चले गए। केवल बहुत कम संख्या में ब्रिटिश नागरिक भारत में रहे, जिनमें से कुछ को English-medium schools के प्रतिष्ठित विद्यालयों और अन्य संस्थानों के संचालन के लिए भारतीय सरकार ने अस्थायी रूप से कार्य जारी रखने की अनुमति दी। हालाँकि इतिहास का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह स्वीकार करना होगा कि आधुनिक नैनीताल की बुनियादी पहचान अंग्रेजी शासन के दौरान ही विकसित हुई। पहाड़ों को काटकर सड़कें बनाना, नैनीताल तक बिजली पहुँचाना, काठगोदाम तक रेलवे लाना, शानदार drainage system तैयार करना, व्यवस्थित बाज़ार बसाना, churches, schools, hospitalsऔर खूबसूरत colonial buildings बनाना, यह सब उसी दौर की देन है। यही कारण है कि इतिहासकार अक्सर कहते हैं कि ब्रिटिश काल का नैनीताल अपनी साफ़-सफाई, अनुशासित नगर व्यवस्था और वास्तुकला के कारण आज के नैनीताल से बिल्कुल अलग और बेहद आकर्षक दिखाई देता था। आज भी मॉल रोड, पुराने होटल, चर्च और अनेक ऐतिहासिक इमारतें उस दौर की कहानी सुनाती हैं। Follow Nainital Mania Page for Nainital History

Nainital, Nainital | Aug 12, 2026

अंग्रेजो के जमाने में नैनीताल की कुछ Famous Personalities ✅:

दोस्तों ब्रिटिशकाल के दौरान नैनीताल के कुछ पुराने लोग ऐसे थे जो नैनीताल के प्रारंभिक काल से लेकर आजादी के बाद तक रहे, कुछ लोगो ने अंग्रेजो के जमाने में ऐतिहासिक कार्य किये तो कुछ आजादी के बाद नैनीताल के प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई...आइये कुछ विशेष लोगो के बारे में जानते है.

1. Shyam Lal Shah✅: नैनीताल में सबसे पुराने लोगो में से गिने जाने वाले एक भारतीय जिनकी 1840 में सबसे पहली कपड़ो की दुकान खुली.

2. Moti Ram Shah ✅: ये नैनीताल के शिल्पकार कहे जाते है क्योकि इन्होने ही अंग्रेजो के जमाने में कई European Building को बनाने में मदद की, इसके अलावा 1843 में इन्होने तल्लीताल में बहुत पुराने नयनादेवी मंदिर जो आज के Post Office के समीप था उसको स्थानांतरिक करके मल्लीताल में पुराने Boathouse के पास स्थापित किया.

3. Banke Lal Shah ✅:ये Alka Hotel के मालिक थे, इन्होने नैनीताल में सबसे पहले दुर्गादेवी मेले की शुरुवात की.

इसके अलावा बाकी लोगों के बारे में जानने के लिए इन तस्वीरों पर क्लिक करके देखिए, जहां आपको उनके जीवन और नैनीताल में उनके योगदान से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी मिल जाएगी।

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अंग्रेजो के जमाने में नैनीताल की कुछ Famous Personalities ✅: दोस्तों ब्रिटिशकाल के दौरान नैनीताल के कुछ पुराने लोग ऐसे थे जो नैनीताल के प्रारंभिक काल से लेकर आजादी के बाद तक रहे, कुछ लोगो ने अंग्रेजो के जमाने में ऐतिहासिक कार्य किये तो कुछ आजादी के बाद नैनीताल के प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई...आइये कुछ विशेष लोगो के बारे में जानते है. 1. Shyam Lal Shah✅: नैनीताल में सबसे पुराने लोगो में से गिने जाने वाले एक भारतीय जिनकी 1840 में सबसे पहली कपड़ो की दुकान खुली. 2. Moti Ram Shah ✅: ये नैनीताल के शिल्पकार कहे जाते है क्योकि इन्होने ही अंग्रेजो के जमाने में कई European Building को बनाने में मदद की, इसके अलावा 1843 में इन्होने तल्लीताल में बहुत पुराने नयनादेवी मंदिर जो आज के Post Office के समीप था उसको स्थानांतरिक करके मल्लीताल में पुराने Boathouse के पास स्थापित किया. 3. Banke Lal Shah ✅:ये Alka Hotel के मालिक थे, इन्होने नैनीताल में सबसे पहले दुर्गादेवी मेले की शुरुवात की. इसके अलावा बाकी लोगों के बारे में जानने के लिए इन तस्वीरों पर क्लिक करके देखिए, जहां आपको उनके जीवन और नैनीताल में उनके योगदान से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी मिल जाएगी। Follow Nainital Mania Page for Nainital History

Nainital, Nainital | Aug 12, 2026