देवास। एक ओर मध्यप्रदेश सरकार विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सांदीपनि विद्यालयों का संचालन कर रही है, वहीं दूसरी ओर देवास में उन्हीं बच्चों की सुरक्षा को गंभीर खतरे में डालने का मामला सामने आया है।
बालगढ़ चौराहे स्थित सांदीपनि विद्यालय की बस में क्षमता से कहीं अधिक छात्र-छात्राओं को भरकर ले जाया जा रहा है। 52 सीटर बस में 70 से अधिक बच्चों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया गया, जबकि कई छात्राएं पूरी यात्रा के दौरान खड़ी रहीं। इतना ही नहीं, कुछ बच्चे इंजन के बोनट पर बैठे दिखाई दिए और बस के गेट पर छात्र-छात्राओं के साथ स्कूल स्टाफ भी लटकता नजर आया। यह दृश्य किसी बड़े हादसे को खुला निमंत्रण देता दिखाई दिया।
बस चालक से पूछताछ करने पर उसने स्पष्ट कहा, "प्रिंसिपल साहब के निर्देश हैं कि सभी बच्चों को लेकर जाना है, हमारी मजबूरी है।" चालक स्वयं बिना सीट बेल्ट लगाए और निर्धारित ड्रेस कोड का पालन किए बिना बस चलाता मिला।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बच्चों की जान से बढ़कर भी कोई मजबूरी हो सकती है? जब स्कूल बसों के लिए स्पष्ट सुरक्षा नियम बने हुए हैं, तो फिर खुलेआम उनका उल्लंघन कैसे हो रहा है?
इससे भी बड़ा सवाल देवास परिवहन विभाग और यातायात पुलिस पर खड़ा होता है। रोज़ाना सड़कों पर दौड़ती यह ओवरलोड बस आखिर जिम्मेदार अधिकारियों को क्यों दिखाई नहीं देती? क्या कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है?
यदि इस बस के साथ कोई बड़ा हादसा हो जाए, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा—विद्यालय प्रबंधन, बस संचालक, परिवहन विभाग या यातायात पुलिस?
सरकार बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन यदि सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी होती रही, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस मामले में कार्रवाई करता है या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा।
News by hello! DEWAS sources. Kindly DM for any issues .
.
.
Dewas | Dewas City | Dewas Update | देवास | देवास शहर | Dewas News | Hello Dewas
#dewas #hellodewas #dewasnews #dewas