टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का प्रदर्शन
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा
सेवारत शिक्षकों ने कहा- नियुक्ति के वर्षों बाद नई पात्रता थोपना न्यायसंगत नहीं
✒️रिपोर्ट अजय श्रीवास्तव
फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों का विरोध तेज होता दिखाई दे रहा है। राष्ट्रीय एवं प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश की फतेहपुर इकाई ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों का कहना है कि टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों पर इसे अनिवार्य करना उनके अधिकारों और सेवा शर्तों के विपरीत है।
फतेहपुर में गुरुवार को राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के बैनर तले बड़ी संख्या में शिक्षक जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और टीईटी अनिवार्यता के विरोध में प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपते हुए मांग की कि टीईटी लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इस अनिवार्यता से मुक्त रखा जाए।
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने कहा कि उनकी नियुक्तियां उस समय की वैधानिक चयन प्रक्रिया और पात्रता मानकों के अनुरूप हुई थीं। उन्होंने वर्षों तक विद्यालयों में सेवा प्रदान की है और अब 15 से 20 वर्ष बाद नई पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता लागू करना न्यायोचित नहीं माना जा सकता।
महासंघ के पदाधिकारियों का कहना था कि जब उनकी भर्ती हुई थी, तब निर्धारित चयन प्रक्रिया और पात्रता मानकों का पालन कर ही उन्हें नियुक्ति मिली थी। ऐसे में वर्षों की सेवा के बाद पुनः परीक्षा की बाध्यता शिक्षकों के आत्मसम्मान और सेवा सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
महिला शिक्षकों ने भी उठाई आवाज
महिला शिक्षक एवं ब्लॉक अध्यक्ष संगीता सचान ने कहा कि वर्षों से शिक्षा सेवा में कार्यरत शिक्षकों की दोबारा परीक्षा लेना उनके अनुभव और योगदान का अपमान है। उन्होंने कहा कि यदि पुराने नियुक्त शिक्षकों से पुनः परीक्षा की अपेक्षा की जाती है तो समान सिद्धांत अन्य विभागों पर भी लागू होने चाहिए।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
महासंघ के जिला पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और संबंधित विभाग उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करते हैं तो प्रदेशव्यापी आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। शिक्षकों ने कहा कि यह केवल नौकरी का मुद्दा नहीं बल्कि लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा विषय है।
सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना मुद्दा
टीईटी अनिवार्यता को लेकर चल रहा विवाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस फैसले से देशभर के लाखों शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं, जबकि सरकार और न्यायिक प्रक्रिया के समर्थक इसे शिक्षा की गुणवत्ता से जोड़कर देख रहे हैं।
फतेहपुर में हुआ यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक सेवा शर्तों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे को सामने लाता है। अब निगाहें केंद्र और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। आने वाले समय में इस विषय पर प्रशासनिक, विधायी अथवा न्यायिक स्तर पर क्या निर्णय लिया जाता है, यह लाखों शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
🟥 ND NEWS की जनहित अपील
ND NEWS एवं दैनिक निष्पक्ष धारा सभी संबंधित पक्षों से अपील करता है कि शिक्षा और शिक्षकों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों का समाधान संवाद, संवैधानिक प्रक्रिया और पारदर्शी नीति के माध्यम से किया जाए। शिक्षकों का सम्मान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दोनों लोकतांत्रिक समाज की आधारशिला हैं।
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