रात 10 बजे जनपद CEO कार्यालय में क्या चल रहा था?
पत्रकारों को अंदर जाने से रोकने पर उठे सवाल, कर्मचारियों ने कहा—“थकान कम करने थोड़ी-बहुत चलती है!”
रात 10 बजे सरकारी दफ्तर… और अंदर से आती ऐसी तस्वीरें, जिन्होंने कई सवाल खड़े कर दिए।
आमतौर पर जिस जनपद CEO कार्यालय में दिन के समय सरकारी कामकाज होता है, वहां रात करीब 10 बजे कुछ कर्मचारी मौजूद नजर आए। मामला तब और चर्चा में आ गया, जब पत्रकार कार्यालय के अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन चपरासी ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया।
अब सवाल यह है कि रात 10 बजे कार्यालय में ऐसा क्या चल रहा था, जिसे देखने के लिए पत्रकारों को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही थी?
वीडियो में एक कर्मचारी कथित तौर पर यह स्वीकार करता दिखाई दे रहा है कि “हम शराब पीए हैं।” वहीं कुछ कर्मचारियों की बातचीत में यह भी सुनाई देता है कि दिनभर की थकान कम करने के लिए “थोड़ी-बहुत” चलती है।
उधर, जनपद CEO की ओर से अलग स्पष्टीकरण सामने आया। उनका कहना है कि सुकमा में उपचुनाव की ड्यूटी/कार्यक्रम के चलते वे अभी लौटे थे और दिनभर की थकान के कारण कार्यालय में मौजूद थे।
लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होता है—
अगर दिनभर की थकान थी तो सरकारी कार्यालय ही आराम की जगह क्यों बना?
अगर सब कुछ सामान्य था तो पत्रकारों को अंदर जाने से रोकने की जरूरत क्यों पड़ी?
और अगर कर्मचारी शराब पी रहे थे, तो क्या सरकारी कार्यालय इसके लिए निर्धारित जगह है?
सरकारी दफ्तर जनता के काम के लिए होते हैं। वहां रात के समय कर्मचारियों की मौजूदगी अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन अगर कार्यालय परिसर में शराब पीने जैसी बात सामने आती है, तो इसकी जांच होना जरूरी है कि वास्तव में वहां क्या हुआ था और किसकी मौजूदगी में हुआ।
अब देखना यह होगा कि संबंधित अधिकारी इस पूरे मामले को सिर्फ “दिनभर की थकान” मानकर छोड़ते हैं या फिर रात 10 बजे सरकारी कार्यालय में हुई गतिविधियों की जांच भी कराई जाती है।
क्योंकि सवाल सिर्फ शराब का नहीं है… सवाल सरकारी कार्यालय में रात 10 बजे चल रही “महफिल” का है!