उत्तर प्रदेश के मेरठ का दलित छात्रा ललिता हत्याकांड को लेकर जिस तेजी से सरकार और पुलिस के खिलाफ विपक्ष ने माहौल तैयार किया था, वह उसी तेजी से फिलहाल ठंडा हो गया। ललिता के परिवार की नाराजगी एकाएक खत्म हो गई। यह सब संभव हुआ यूपी सीएम के वजीर (मंत्री) पूर्व नौकरशाह असीम अरुण की रणनीति से। असीम अरुण के सीएम से मिलाने और मदद कराने के सहानुभूति के दांव ने इस मामले को लेकर आक्रामक दिखने वाले विपक्ष के सभी सियासतदांओं को चित कर दिया। छात्रा ललिता गौतम की हत्या को लेकर उसका परिवार सख्त कार्रवाई चाहता था। आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी से खफा था। पुलिस के काम करने के तरीके से परिवार जिले की पुलिस के साथ सरकार से भी नाराजगी जता रहा था। ललिता के परिवार की इसी टीस को लेकर विपक्षी दलों और संगठन से जुड़े दलित नेताओं ने महापंचायत बुलाई। सरकार और पुलिस के खिलाफ सभी ने नारजगी जताई। हालात टकराव तक जा पहुंचे। पुलिस और आंदोलनकारी भिड़े। एफआईआर हुई। गिरफ्त�
Korba, Korba | Jul 19, 2026