सेवा संकल्प: सफलता की कहानी
रेशम उत्पादन ने बदली सुमनबाई की जिंदगी
पक्का मकान और बच्चों की बेहतर शिक्षा का बना आधार
➡️ विकासखंड माखननगर के ग्राम गूजरवाड़ा निवासी श्रीमती सुमनबाई यादव के लिए रेशम उत्पादन आजीविका का सशक्त माध्यम बन गया है। कभी कृषि मजदूरी पर निर्भर रहने वाली सुमनबाई अब रेशम उत्पादन एवं चाकी कृमिपालन के माध्यम से निरंतर आय अर्जित कर आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं। रेशम से हुई आय ने न केवल उनके रहन-सहन में बदलाव लाया, बल्कि बच्चों की शिक्षा और परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत आधार दिया है।
श्रीमती सुमनबाई यादव, पति श्री नारायण यादव, ई-रेशम पोर्टल पर पंजीकृत हैं। वह अपने परिवार में छह बच्चों के साथ जीवन यापन करती हैं। रेशम उत्पादन से जुड़ने से पहले उनकी आजीविका मुख्य रूप से कृषि मजदूरी पर निर्भर थी और परिवार के पास रहने के लिए कच्चा मकान था।
वर्ष 2010-11 में क्षेत्र में रेशम केंद्र प्रारंभ होने के बाद श्रीमती सुमनबाई को एक एकड़ भूमि पर शहतूत पौधरोपण कर उपभोगाधिकार प्रदान किया गया। इसके साथ ही उन्हें कृमिपालन गृह एवं आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए गए। रेशम केंद्र पर सिंचाई की सुविधा विकसित करने के लिए ट्यूबवेल का खनन भी कराया गया, जिससे शहतूत पौधों की सिंचाई के लिए आवश्यक जल स्रोत उपलब्ध हुआ।
रेशम विभाग द्वारा श्रीमती सुमनबाई को शहतूत पौधरोपण एवं उसके संधारण के साथ-साथ रेशम कृमिपालन और चाकी कृमिपालन का प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने प्रशिक्षण के माध्यम से अपने कौशल को विकसित किया और सात दिवसीय छोटे कृमियों के पालन की चाकी कृमिपालन विधि में दक्षता हासिल की। अपनी इस दक्षता का लाभ उन्होंने गांव के अन्य लोगों को भी दिया और उन्हें रेशम उत्पादन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
श्रीमती सुमनबाई ने शहतूत की खेती, मलबरी ककून उत्पादन एवं चाकी कृमिपालन को अपनी नियमित आजीविका का हिस्सा बनाया। इससे उनकी आय में वृद्धि हुई और परिवार को सतत आय का जरिया प्राप्त हुआ। रेशम उत्पादन से होने वाली आय ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ ही परिवार की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने में सक्षम बनाया।
रेशम की आय से परिवार की बदली तस्वीर
रेशम उत्पादन से प्राप्त आय का सकारात्मक प्रभाव श्रीमती सुमनबाई के पूरे परिवार पर पड़ा। उन्होंने कच्चे मकान के स्थान पर पक्का मकान बनवाया। बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया। उनकी दो बेटियों ने स्नातक स्तर तक शिक्षा प्राप्त की तथा तीन बेटियों के विवाह भी संपन्न हुए। वर्तमान में उनका एक पुत्र कक्षा 10वीं में तथा दूसरा महाविद्यालय में अध्ययनरत है।
श्रीमती सुमनबाई बताती हैं कि रेशम उत्पादन से जुड़ने के बाद अब उन्हें रोजगार की तलाश में बाहर जाकर मजदूरी करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। अपने ही गांव में शहतूत पौधरोपण, रेशम कृमिपालन, ककून उत्पादन और चाकी कृमिपालन के माध्यम से वह परिवार की आजीविका को मजबूत कर रही हैं।
रेशम विभाग की योजनाओं के माध्यम से उपलब्ध कराए गए प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, पौधरोपण, कृमिपालन गृह, उपकरण एवं सिंचाई सुविधा ने श्रीमती सुमनबाई के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका अनुभव ग्रामीण क्षेत्र में रेशम उत्पादन के माध्यम से महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया है।
#सेवा_संकल्प_अभियान #SevaSankalpAbhiyan