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#Nyay योजना से देश पटरी पर लौट सकता है भारतीय युवा कांग्रेस की पहल #IYC #CORONA #LOCKDOWN #Public_app

6m views | India | May 21, 2020

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तिरंगा यात्रा के दौरान सदर विधायक ने लगाई झाड़ू, हाथों से उठाया कचरा

उरई/जालौन। तिरंगा यात्रा के दौरान सदर विधायक गौरी शंकर वर्मा ने स्वच्छता का संदेश देते हुए खुद झाड़ू लगाई और सड़क पर पड़ा कचरा अपने हाथों से उठाया। विधायक ने कहा कि देशभक्ति के साथ-साथ अपने शहर और आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखना भी हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि साफ-सफाई को लेकर सभी को जागरूक होना चाहिए और कूड़ा इधर-उधर न फेंककर निर्धारित स्थान पर ही डालना चाहिए।

बताया जा रहा है कि नगर पालिका से जुड़े कुछ प्रत्याशियों/प्रतिनिधियों के देर से पहुंचने के कारण विधायक ने स्वयं सफाई अभियान में हाथ बंटाया। विधायक के इस कदम को देखकर मौजूद लोगों ने भी स्वच्छता अभियान में सहयोग किया।

तिरंगा यात्रा के दौरान सदर विधायक ने लगाई झाड़ू, हाथों से उठाया कचरा उरई/जालौन। तिरंगा यात्रा के दौरान सदर विधायक गौरी शंकर वर्मा ने स्वच्छता का संदेश देते हुए खुद झाड़ू लगाई और सड़क पर पड़ा कचरा अपने हाथों से उठाया। विधायक ने कहा कि देशभक्ति के साथ-साथ अपने शहर और आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखना भी हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि साफ-सफाई को लेकर सभी को जागरूक होना चाहिए और कूड़ा इधर-उधर न फेंककर निर्धारित स्थान पर ही डालना चाहिए। बताया जा रहा है कि नगर पालिका से जुड़े कुछ प्रत्याशियों/प्रतिनिधियों के देर से पहुंचने के कारण विधायक ने स्वयं सफाई अभियान में हाथ बंटाया। विधायक के इस कदम को देखकर मौजूद लोगों ने भी स्वच्छता अभियान में सहयोग किया।

Jalaun, Jalaun | Aug 13, 2026

jalaun. ladki ne shadi kar vidio kiya vayral

jalaun. ladki ne shadi kar vidio kiya vayral

Jalaun, Jalaun | Aug 13, 2026

पडकुला 48 लाख का मुक्तिधाम या भ्रष्टाचार का स्मारक?

पडकुला में सरकारी रिकॉर्ड में बना अंत्येष्टि स्थल, जमीन पर पहुंचने का रास्ता तक नहीं!

जनपद जालौन में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। 
माधौगढ़ ब्लाक की ग्राम पंचायत पडकुला (LGD Code 68941) में बनाए गए अंत्येष्टि स्थल को लेकर ग्रामीणों और मौके पर पहुंची पत्रकारों की टीम ने कई सवाल उठाए हैं।

मेरी पंचायत पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार Antesthi Sthal Ka Nirman नाम से दर्ज इस कार्य की अनुमानित लागत ₹48 लाख दिखाई गई है। रिकॉर्ड में ₹25,66,250 व्यय भी दर्ज है। 
वहीं भुगतान विवरण में अलग-अलग मदों में ठेकेदार/सप्लायर सहित अन्य भुगतान दर्ज दिखाई दे रहे हैं।
 यानी सरकारी पोर्टल पर काम और भुगतान का पूरा हिसाब नजर आ रहा है, लेकिन मौके की तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है।

सबसे बड़ा सवाल—अंत्येष्टि स्थल तक रास्ता कहां है?

मौके पर पहुंची टीम के अनुसार अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचने के लिए कोई सुगम रास्ता नजर नहीं आया। 
बरसात के मौसम में आसपास खेतों में पानी और घास-फूस के बीच पत्रकारों की टीम को भी बेहद कठिनाई से मौके तक पहुंचना पड़ा। 
टीम को तार की फेंसिंग, खेतों की मेड़ों और पानी भरे रास्तों के बीच से होकर जाना पड़ा।

ऐसे में सवाल उठता है कि अगर गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो शव को इस अंत्येष्टि स्थल तक आखिर ले जाया कैसे जाएगा?

स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण आज भी मजबूरी में अपने-अपने खेतों या पुराने स्थानों पर अंतिम संस्कार करते हैं। 
यदि यह स्थिति सही है तो इतनी बड़ी धनराशि खर्च करके बनाया गया अंत्येष्टि स्थल आखिर किस उपयोग के लिए है?

निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल

मौके पर निर्माण में दरारें दिखाई देने की बात सामने आई है। करीब 40–48 लाख रुपये की लागत वाले कार्य में यदि निर्माण कुछ ही समय में खराब होने लगे तो उसकी गुणवत्ता की जांच की आवश्यकता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रिकॉर्ड में निर्माण कार्य Completion of work यानी पूर्ण दर्शाया गया है, जबकि जमीनी स्थिति और उपयोगिता को लेकर सवाल बने हुए हैं।

 भुगतान के रिकॉर्ड ने बढ़ाए सवाल

पोर्टल के स्क्रीनशॉट में MS FOUJI CONTRACTER AND SUPPLAYER के नाम से कई भुगतान दिखाई दे रहे हैं। एक भुगतान ₹10,05,515, दूसरा ₹2,50,000, इसके अलावा ₹1,00,000, ₹4,50,000 और अन्य भुगतान भी रिकॉर्ड में दिखाई देते हैं। 
एक अन्य प्रविष्टि में ₹24,360 इंजीनियर के नाम से दर्ज है।

अब सवाल यह है कि कुल कितना भुगतान हुआ, किस-किस मद में हुआ, कौन-कौन से कार्य कराए गए और मौके पर वास्तव में कितना निर्माण हुआ?

इन सभी बिंदुओं की तकनीकी एवं वित्तीय जांच ही तस्वीर साफ कर सकती है।

 सवाल सीधे जिम्मेदारों से

₹48 लाख की अनुमानित लागत क्यों?
 अंत्येष्टि स्थल तक पक्का रास्ता क्यों नहीं?
 निर्माण पूरा दिखाने के बाद भी स्थल उपयोगी क्यों नहीं?
 निर्माण में दरारें क्यों आईं?
 भुगतान की अलग-अलग किस्तों का पूरा विवरण क्या है?
 क्या कार्य का तकनीकी सत्यापन और गुणवत्ता जांच हुई?
 क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया?

यह खबर उपलब्ध सरकारी पोर्टल के रिकॉर्ड और मौके की स्थिति पर आधारित सवालों को सामने रखती है।
 भ्रष्टाचार हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि सक्षम विभाग की जांच के बाद ही होगी।

अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सरकारी धन के एक-एक रुपये का हिसाब सामने लाता है या फिर फाइलों में काम पूरा लिखकर मामला बंद कर दिया जाता है।

वीडियो को अंत तक जरूर देखें और कमेंट बॉक्स में अपनी राय बताएं—क्या आपके गांव में भी अंत्येष्टि स्थल बना है? 
अगर बना है तो उसकी हालत कैसी है? 
और आपके आसपास किसी सरकारी निर्माण में गड़बड़ी है तो हमें जानकारी दें।

₹48 लाख के अंत्येष्टि स्थल पर उठ रहे सवालों पर @जालौन_प्रशासन संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराए—आखिर सरकारी धन का हिसाब कौन देगा?

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पडकुला 48 लाख का मुक्तिधाम या भ्रष्टाचार का स्मारक? पडकुला में सरकारी रिकॉर्ड में बना अंत्येष्टि स्थल, जमीन पर पहुंचने का रास्ता तक नहीं! जनपद जालौन में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। माधौगढ़ ब्लाक की ग्राम पंचायत पडकुला (LGD Code 68941) में बनाए गए अंत्येष्टि स्थल को लेकर ग्रामीणों और मौके पर पहुंची पत्रकारों की टीम ने कई सवाल उठाए हैं। मेरी पंचायत पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार Antesthi Sthal Ka Nirman नाम से दर्ज इस कार्य की अनुमानित लागत ₹48 लाख दिखाई गई है। रिकॉर्ड में ₹25,66,250 व्यय भी दर्ज है। वहीं भुगतान विवरण में अलग-अलग मदों में ठेकेदार/सप्लायर सहित अन्य भुगतान दर्ज दिखाई दे रहे हैं। यानी सरकारी पोर्टल पर काम और भुगतान का पूरा हिसाब नजर आ रहा है, लेकिन मौके की तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है। सबसे बड़ा सवाल—अंत्येष्टि स्थल तक रास्ता कहां है? मौके पर पहुंची टीम के अनुसार अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचने के लिए कोई सुगम रास्ता नजर नहीं आया। बरसात के मौसम में आसपास खेतों में पानी और घास-फूस के बीच पत्रकारों की टीम को भी बेहद कठिनाई से मौके तक पहुंचना पड़ा। टीम को तार की फेंसिंग, खेतों की मेड़ों और पानी भरे रास्तों के बीच से होकर जाना पड़ा। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो शव को इस अंत्येष्टि स्थल तक आखिर ले जाया कैसे जाएगा? स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण आज भी मजबूरी में अपने-अपने खेतों या पुराने स्थानों पर अंतिम संस्कार करते हैं। यदि यह स्थिति सही है तो इतनी बड़ी धनराशि खर्च करके बनाया गया अंत्येष्टि स्थल आखिर किस उपयोग के लिए है? निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल मौके पर निर्माण में दरारें दिखाई देने की बात सामने आई है। करीब 40–48 लाख रुपये की लागत वाले कार्य में यदि निर्माण कुछ ही समय में खराब होने लगे तो उसकी गुणवत्ता की जांच की आवश्यकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रिकॉर्ड में निर्माण कार्य Completion of work यानी पूर्ण दर्शाया गया है, जबकि जमीनी स्थिति और उपयोगिता को लेकर सवाल बने हुए हैं। भुगतान के रिकॉर्ड ने बढ़ाए सवाल पोर्टल के स्क्रीनशॉट में MS FOUJI CONTRACTER AND SUPPLAYER के नाम से कई भुगतान दिखाई दे रहे हैं। एक भुगतान ₹10,05,515, दूसरा ₹2,50,000, इसके अलावा ₹1,00,000, ₹4,50,000 और अन्य भुगतान भी रिकॉर्ड में दिखाई देते हैं। एक अन्य प्रविष्टि में ₹24,360 इंजीनियर के नाम से दर्ज है। अब सवाल यह है कि कुल कितना भुगतान हुआ, किस-किस मद में हुआ, कौन-कौन से कार्य कराए गए और मौके पर वास्तव में कितना निर्माण हुआ? इन सभी बिंदुओं की तकनीकी एवं वित्तीय जांच ही तस्वीर साफ कर सकती है। सवाल सीधे जिम्मेदारों से ₹48 लाख की अनुमानित लागत क्यों? अंत्येष्टि स्थल तक पक्का रास्ता क्यों नहीं? निर्माण पूरा दिखाने के बाद भी स्थल उपयोगी क्यों नहीं? निर्माण में दरारें क्यों आईं? भुगतान की अलग-अलग किस्तों का पूरा विवरण क्या है? क्या कार्य का तकनीकी सत्यापन और गुणवत्ता जांच हुई? क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया? यह खबर उपलब्ध सरकारी पोर्टल के रिकॉर्ड और मौके की स्थिति पर आधारित सवालों को सामने रखती है। भ्रष्टाचार हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि सक्षम विभाग की जांच के बाद ही होगी। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सरकारी धन के एक-एक रुपये का हिसाब सामने लाता है या फिर फाइलों में काम पूरा लिखकर मामला बंद कर दिया जाता है। वीडियो को अंत तक जरूर देखें और कमेंट बॉक्स में अपनी राय बताएं—क्या आपके गांव में भी अंत्येष्टि स्थल बना है? अगर बना है तो उसकी हालत कैसी है? और आपके आसपास किसी सरकारी निर्माण में गड़बड़ी है तो हमें जानकारी दें। ₹48 लाख के अंत्येष्टि स्थल पर उठ रहे सवालों पर @जालौन_प्रशासन संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराए—आखिर सरकारी धन का हिसाब कौन देगा? #जिलाधिकारीजालौन #DMJalaun #राजेश_कुमार_पाण्डेय #मुख्यविकासअधिकारीजालौन #CDOJalaun #जिलापंचायत_राज_अधिकारी #DPROJalaun #खंडविकासअधिकारी #BDOमाधौगढ़ #उपजिलाधिकारीमाधौगढ़ #SDMमाधौगढ़ #तहसीलदारमाधौगढ़ #ग्रामपंचायतपटकुला #ग्रामप्रधानमधुदेवी #ग्रामसचिवसुमितकुमार #पंचायतसचिव #ग्रामपंचायतअधिकारी #पंचायतीराजविभाग #विकासखंडमाधौगढ़ #जालौनप्रशासन #जालौनपुलिस #JalaunNews #MadhogarhNews #JalaunAdministration #GroundReport #CorruptionExposed #BreakingNews

Jalaun, Jalaun | Aug 12, 2026

baccho ne lod kiya lodar

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Jalaun, Jalaun | Aug 12, 2026

कीचड़ में फंसी स्कूल बस, पैदल निकलने को मजबूर बच्चे! उरई की करमेर रोड पर करोड़ों की सड़क पर उठे सवाल

उरई की करमेर रोड से शर्मसार कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। सड़क निर्माण के बीच बारिश के बाद रास्ता कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गया, जिससे स्कूली बच्चों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक यह सड़क लंबे समय से बदहाल थी और निर्माण शुरू होने के बाद उन्हें राहत की उम्मीद थी। लेकिन बारिश के बाद सड़क की स्थिति और खराब हो गई। बच्चों को इसी कीचड़ से होकर स्कूल जाना पड़ रहा है और कीचड़ में बस फंसने की तस्वीरें भी सामने आई हैं।

वहीं आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक इस सड़क निर्माण कार्य की स्वीकृत लागत 4317.20 लाख रुपये यानी करीब 43.17 करोड़ रुपये बताई गई है। अनुबंध 25 फरवरी 2026 को हुआ और कार्य पूर्ण करने की निर्धारित तिथि 24 मई 2027 है।

अब सवाल यह है कि निर्माणाधीन सड़क पर जल निकासी और आवागमन की सुरक्षित व्यवस्था क्यों नहीं है? क्या निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की जांच हो रही है? क्या लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण करेंगे?

हालांकि सड़क निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है, इसलिए अंतिम गुणवत्ता पर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। लेकिन बारिश के दौरान सामने आई इन तस्वीरों और स्थानीय लोगों की शिकायतों की जांच जरूर होनी चाहिए।

करमेर रोड की इस तस्वीर पर आपकी क्या राय है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को मौके पर जाकर जांच करनी चाहिए? कमेंट में बताइए।

कीचड़ में फंसी स्कूल बस, पैदल निकलने को मजबूर बच्चे! उरई की करमेर रोड पर करोड़ों की सड़क पर उठे सवाल उरई की करमेर रोड से शर्मसार कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। सड़क निर्माण के बीच बारिश के बाद रास्ता कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गया, जिससे स्कूली बच्चों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक यह सड़क लंबे समय से बदहाल थी और निर्माण शुरू होने के बाद उन्हें राहत की उम्मीद थी। लेकिन बारिश के बाद सड़क की स्थिति और खराब हो गई। बच्चों को इसी कीचड़ से होकर स्कूल जाना पड़ रहा है और कीचड़ में बस फंसने की तस्वीरें भी सामने आई हैं। वहीं आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक इस सड़क निर्माण कार्य की स्वीकृत लागत 4317.20 लाख रुपये यानी करीब 43.17 करोड़ रुपये बताई गई है। अनुबंध 25 फरवरी 2026 को हुआ और कार्य पूर्ण करने की निर्धारित तिथि 24 मई 2027 है। अब सवाल यह है कि निर्माणाधीन सड़क पर जल निकासी और आवागमन की सुरक्षित व्यवस्था क्यों नहीं है? क्या निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की जांच हो रही है? क्या लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण करेंगे? हालांकि सड़क निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है, इसलिए अंतिम गुणवत्ता पर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। लेकिन बारिश के दौरान सामने आई इन तस्वीरों और स्थानीय लोगों की शिकायतों की जांच जरूर होनी चाहिए। करमेर रोड की इस तस्वीर पर आपकी क्या राय है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को मौके पर जाकर जांच करनी चाहिए? कमेंट में बताइए।

Jalaun, Jalaun | Aug 11, 2026