डेरापुर सीएचसी में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की खुली पोल, प्रसव पीड़ा से कराहती गर्भवती महिलाओं को जमीन पर लेटना पड़ा
डिप्टी सीएमओ ने कहा—लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ होगी कार्रवाई
डेरापुर,में स्वास्थ्य विभाग की ओर से बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच डेरापुर स्थित 30 शैया मातृ एवं शिशु चिकित्सालय की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं को बैठने तक की उचित व्यवस्था नहीं मिल पा रही है। प्रसव पीड़ा से परेशान महिलाओं को जमीन पर लेटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अस्पताल की इस स्थिति ने स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को विशेष देखभाल, आराम और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत होती है। ऐसे में अस्पताल पहुंचने पर बैठने और आराम करने की उचित व्यवस्था न मिलना उनकी परेशानी को और बढ़ा देता है। आरोप है कि अस्पताल में इलाज के लिए आने वाली महिलाओं को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है
मातृ एवं शिशु चिकित्सालय का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन अस्पताल में महिलाओं को जमीन पर लेटना पड़ने की स्थिति ने व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर अस्पताल की व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराने की मांग की है, ताकि प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिलाओं को उपचार के दौरान अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
बुधवार शाम छह बजे डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि अस्पताल में महिलाओं के बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की लापरवाही के चलते गर्भवती महिलाओं को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि मामले में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं में कितना सुधार होता है और गर्भवती महिलाओं को बेहतर सुविधाएं कब तक मिल पाती हैं।