अनुगूंज राज्य स्तरीय कानूनी साक्षरता शिविर में श्रवण एवं वाक् बाधित व्यक्तियों की समस्याओं पर हुई सार्थक चर्चा
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विधिक अधिकारों, डिजिटल सुविधाओं और सामाजिक समावेशन पर किया गया जागरूक, प्रतिभागियों की समस्याओं के समाधान का दिया गया आश्वासन
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राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशन तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री शेख सलीम के मार्गदर्शन में शनिवार 13 जून को जिला न्यायालय विदिशा के वी.सी. रूम में श्रवण एवं वाक् बाधित व्यक्तियों के लिए "अनुगूंज राज्य स्तरीय कानूनी साक्षरता शिविर" का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य दिव्यांगजनों को उनके कानूनी अधिकारों, उपलब्ध विधिक सहायता सेवाओं तथा शासन द्वारा संचालित सुविधाओं के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष श्री शेख सलीम, विशेष न्यायाधीश श्री जी.सी. शर्मा, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री नितेन्द्र सिंह तोमर, लीगल एड डिफेंस काउंसिल के पदाधिकारी तथा अन्य न्यायिक एवं विधिक अधिकारी उपस्थित रहे।
शिविर का ऑनलाइन शुभारंभ प्रातः 10:30 बजे राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधिपति उच्च न्यायालय जबलपुर श्री विवेक रूसिया तथा न्यायाधिपति श्री विशाल मिश्रा द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रदेशभर के जिलों में आयोजित कार्यक्रमों को वर्चुअल माध्यम से जोड़ा गया।
कार्यक्रम के दौरान श्रवण एवं वाक् बाधित प्रतिभागियों को विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा विकसित विशेष मोबाइल एप्लीकेशन की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इस एप के माध्यम से दिव्यांगजन घर बैठे कानूनी सलाह प्राप्त कर सकते हैं, मध्यस्थता सेवाओं का लाभ ले सकते हैं तथा अपनी संकेत भाषा (साइन लैंग्वेज) के माध्यम से भी विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। यह पहल न्याय तक समान और सुगम पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
शिविर में प्रतिभागियों को नि:शुल्क विधिक सहायता, संवैधानिक अधिकारों, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की गई। अधिकारियों ने बताया कि समाज के प्रत्येक वर्ग को न्याय प्राप्त करने का समान अधिकार है और विधिक सेवा प्राधिकरण इस दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम के अंत में एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें श्रवण एवं वाक् बाधित प्रतिभागियों ने अपने दैनिक जीवन में आने वाली समस्याओं और चुनौतियों को खुलकर साझा किया। प्रतिभागियों ने बताया कि जिला अस्पतालों में दिव्यांगता प्रमाण-पत्र समय पर और नियमानुसार नहीं बन पाते, जिससे उन्हें विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई होती है। इसके अतिरिक्त ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने में आने वाली समस्याएं भी प्रमुख रूप से सामने आईं।
प्रतिभागियों ने यह भी बताया कि अधिकांश शासकीय कार्यालयों में संकेत भाषा जानने वाले अनुवादकों की अनुपलब्धता के कारण शिकायतें दर्ज कराने तथा अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचाने में कठिनाई होती है। कई प्रतिभागियों ने सामाजिक स्तर पर उपहास और भेदभाव का सामना करने की पीड़ा भी साझा की। वहीं, विशेष विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को साइन लैंग्वेज का पर्याप्त ज्ञान नहीं होने के कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में भी बाधाएं सामने आने की बात रखी गई।
प्रतिभागियों द्वारा उठाई गई समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर इन मुद्दों के समाधान हेतु आवश्यक पत्राचार एवं कार्रवाई की जाएगी। साथ ही दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा और उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए हरसंभव प्रयास किए जाने का भरोसा भी दिलाया गया।
यह शिविर न केवल कानूनी जागरूकता का मंच बना, बल्कि श्रवण एवं वाक् बाधित व्यक्तियों की वास्तविक समस्याओं को शासन और प्रशासन तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम भी सिद्ध हुआ। कार्यक्रम ने दिव्यांगजनों को यह विश्वास दिलाया कि न्याय व्यवस्था और विधिक सेवा संस्थाएं उनकी समस्याओं के समाधान तथा अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही हैं।
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16 views | Vidisha, Madhya Pradesh | Jun 14, 2026