घर में जबरन घुसी पुलिस, की तोड़फोड़ और दबाव में कराया समझौता?
पीड़ित ने कैमरे के सामने लगाए गंभीर आरोप, वीडियो वायरल होने से मचा हड़कंप जालौन पुलिस Jalaun Police District Magistrate/District Election Officer, Jalaun DM Jalaun
जालौन के जगम्मनपुर में संपत्ति विवाद ने पकड़ा तूल, पीड़ित ने एसपी, डीआईजी, डीजीपी और डीएम से की निष्पक्ष जांच की मांग;
सीसीटीवी, जीडी और पुलिस रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की उठाई मांग।
रामपुरा थाना क्षेत्र के ग्राम जगम्मनपुर में संपत्ति विवाद को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
गांव निवासी राजकुमार पुत्र स्व. बैजनाथ एवं शिवशंकर पुत्र स्व. बैजनाथ ने पुलिस अधीक्षक जालौन को पांच पृष्ठों का शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि जगम्मनपुर पुलिस चौकी के प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों ने न्यायालय में विचाराधीन संपत्ति विवाद में हस्तक्षेप किया, उनके घर में जबरन प्रवेश किया, तोड़फोड़ की और परिवार को पुलिस के दबाव में थाने ले जाकर कथित समझौता कराने का प्रयास किया।
शिकायत की प्रतिलिपि डीआईजी झांसी, डीजीपी उत्तर प्रदेश और जिलाधिकारी जालौन को भी भेजी गई है।
पीड़ितों का कहना है कि विवादित संपत्ति का मामला माधौगढ़ न्यायालय में पहले से विचाराधीन है और इस संबंध में वाद संख्या 23/2025 लंबित है।
इसके बावजूद कथित रूप से पुलिस ने एक पक्ष को लाभ पहुंचाने की नीयत से कार्रवाई की।
शिकायत में कहा गया है कि 6 जून 2026 को विवादित संपत्ति का कथित विक्रय किया गया, जिसके बाद कब्जा दिलाने की कोशिशें शुरू हो गईं। इस संबंध में पुलिस को पहले ही लिखित शिकायत देकर न्यायालय में मामला लंबित होने की जानकारी दी जा चुकी थी।
पीड़ितों का आरोप है कि 11 जुलाई 2026 को उन्होंने उच्च अधिकारियों को ऑनलाइन शिकायत भेजकर आशंका जताई थी कि पुलिस की मदद से जबरन कब्जा कराया जा सकता है।
आरोप है कि उसी दिन शाम को पुलिस उनके घर पहुंची, जबरन अंदर घुस गई, तोड़फोड़ की और परिवार के सदस्यों को रामपुरा थाने ले गई।
वहां पहले से मौजूद सूर्यकांत मिश्रा की उपस्थिति में कथित रूप से एक हस्तलिखित समझौता पत्र तैयार कराया गया और उस पर हस्ताक्षर कराने के लिए दबाव बनाया गया।
पीड़ितों का कहना है कि यह समझौता उनकी स्वतंत्र इच्छा से नहीं बल्कि कथित पुलिस दबाव में कराया गया।
उनका यह भी दावा है कि पूरे घटनाक्रम का वीडियो मौजूद है, जिसमें उन्होंने कैमरे के सामने अपनी आपबीती बताई है।
वीडियो में पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
शिकायत में मांग की गई है कि 11 जुलाई की सीसीटीवी फुटेज, जनरल डायरी (GD), आगमन-रवानगी रजिस्टर, ड्यूटी रजिस्टर, पुलिस वाहन की लॉगबुक, कॉल डिटेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित किए जाएं, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।
साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित चौकी प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों को इस प्रकरण से अलग रखने तथा आरोप सही पाए जाने पर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी की गई है।
घटना के बाद उठ रहे बड़े सवाल
जब संपत्ति विवाद न्यायालय में विचाराधीन था तो पुलिस की भूमिका क्या थी?
क्या बिना किसी वैधानिक नोटिस या एफआईआर के घर में प्रवेश किया गया?
क्या परिवार को कानूनी प्रक्रिया के तहत थाने लाया गया था?
यदि कार्रवाई पूरी तरह वैधानिक थी तो उसकी जीडी, नोटिस और रिकॉर्ड क्या कहते हैं?
क्या सीसीटीवी फुटेज पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाएगी?
क्या पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय किसी निजी विवाद में हस्तक्षेप किया?
क्या उच्च अधिकारी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे?
पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय की उम्मीद है और वे चाहते हैं कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाई जाए।
पीड़ित ने कैमरे के सामने पूरी घटना बताई है। खबर में आगे की प्रशासन का अपडेट का इंतजार रहेगा
वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
Jalaun, Jalaun | Jul 15, 2026