भंगाराम जात्रा — संक्षेप मे
क्यों?
देवी-देवताओं की न्याय व्यवस्था, सामुदायिक आस्था और लोक-परंपरा को निभाने के लिए। मान्यता है कि देवताओं से हुई गलती या लोगों को हुई पीड़ा की सुनवाई होती है।
कहाँ?
केशकाल घाटी, कोंडागांव जिला, छत्तीसगढ़ — भंगाराम देवी के देवस्थल पर।
About / क्या है?
हल्बा-गोंड समुदाय की अनूठी परंपरा, जिसमें भंगाराम देवी को सर्वोच्च न्यायाधीश माना जाता है। आसपास के 9 परगनों और 57 ग्रामों के देवी-देवताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई की लोक-मान्यता है।
मुख्य अनुष्ठान (Rituals):
देवी-देवताओं की उपस्थिति एवं बैठक
आरोप और शिकायतों की सुनवाई
सिरहा पर देवी का आरूढ़ होना
दोषी/असफल देवताओं की बोहरानी (रवानगी)
बीमारियों एवं कष्टों की भी बोहरानी
नगाड़ा, तुरही, मृदंग के साथ देव-आगमन
भंगाराम देवी को चावल, गुलाल, अगरबत्ती तथा पारंपरिक सेवा
अंत में आरती और देवी-देवताओं की विदाई
विशेषता:
यह परंपरा देवताओं को भी जवाबदेह मानती है—और लोक-मान्यता के अनुसार किसी सामान्य मनुष्य के महान मानवीय कार्य के आधार पर उसे देवत्व भी प्रदान किया जा सकता है।
Photo - anzaar_nabi
Bastar, Chhattisgarh | Sep 11, 2026