पांवटा साहिब। राज्य स्तरीय यमुना शरद महोत्सव की पहली सांस्कृतिक संध्या में दर्शकों की कथित तौर पर बेहद कम उपस्थिति ने आयोजन की व्यवस्थाओं और तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़े टेंट, सैकड़ों कुर्सियों और भव्य इंतजामों के बीच पंडाल खाली नजर आने की चर्चा है। दावा किया जा रहा है कि VIP सहित करीब 50 लोग ही कार्यक्रम में मौजूद थे।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब आयोजन राज्य स्तरीय है और इस पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो सांस्कृतिक संध्या में दर्शकों की भागीदारी इतनी कम क्यों रही?
स्थानीय कलाकारों की अनदेखी बनी वजह?
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या स्थानीय कलाकारों को पर्याप्त मंच और प्राथमिकता नहीं मिलने से लोगों की रुचि कम हुई है? हालांकि, दर्शकों की कम उपस्थिति के वास्तविक कारणों की पुष्टि होना अभी बाकी है। आयोजन के प्रचार-प्रसार, कार्यक्रमों के चयन और स्थानीय प्रतिभाओं की भागीदारी की समीक्षा जरूरी मानी जा रही है।
आर्थिक तंगी के बीच खर्च पर सवाल
एक ओर सरकार आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य स्तरीय आयोजन पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या आयोजन की तैयारियों और बजट का निर्धारण दर्शकों की संभावित संख्या तथा स्थानीय लोगों की रुचि को ध्यान में रखकर किया गया था?
सांस्कृतिक महोत्सव क्षेत्र की कला, संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देने का माध्यम होते हैं। लेकिन इन आयोजनों की सफलता केवल भव्य टेंट और सजावट से नहीं, बल्कि लोगों की भागीदारी और स्थानीय कलाकारों को मिलने वाले अवसरों से भी आंकी जाती है।
अब देखना होगा कि आगामी सांस्कृतिक संध्याओं में आयोजक दर्शकों की भागीदारी बढ़ाने और स्थानीय कलाकारों को बेहतर मंच देने के लिए क्या कदम उठाते हैं।