साहस और समर्पण के साक्षी शहीद ऊधम सिंह की पुण्यतिथि पर वर्णिता संस्था ने दी श्रृद्धांजलि
सुमेरपुर कस्बे में संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि ऊधम सिंह भारत माता के नाहर सपूत थे
देश की आजादी की लड़ाई में इनका अभीष्ट योगदान था
इनका जन्म पंजाब के संगरूर जिले के सुनाम गांव में टेहल सिंह तथा नारायण कौर के घर हुआ था
अपनी शिक्षा पूरी कर कम उम्र में जलियांवाला बाग गये थे, जहां पर अप्रैल 1919 में जनरल डायर ने नरसंहार कराया था, जिसमें हजारों निर्दोष भारतीय मारे गए थे
ऊधम सिंह ने वहां की मिट्टी को माथे पर लगा कर यह प्रण लिया था कि भारतीयों की हत्या का बदला अवश्य लूंगा
इस केस के 21 वर्षों के बाद 1934 में इंग्लैंड जाकर वहां 13 मार्च 1940 को जनरल डायर को कैक्सटन हाल में मौत के घाट उतार दिया गया
पकड़े जाने पर इन्हें 31 जुलाई 1940 को फांसी पर लटका दिया गया और ये देश के लिए शहीद हो गए।
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