दमकल के न पहुंचने पर लाखों का सामान जलकर राख
खाजूवाला 22 जून (निस.)। इलैक्ट्रोनिक्स गोदाम में आग लगने पर दमकल ना पहुंचने पर मण्डी में उठ रहे हैं काफी सवाल। आखिर दमकल होने के बावजूद भी मौके पर दोनों कार्मिक कहा गायब थे जो कि आग बुझाने में दमकल का दम निकल गया। सोशल मीडिया पर आमजन दिन भर एक ही चर्चा करते हुए नजर आये कि नगरपालिका में दमकल होने के बावजूद भी मण्डीवासियों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। क्या जिला कलक्टर आज कि घटना पर कार्मिकों के खिलाफ कार्यवाही करंेगे या फिर इति श्री कर ली जायेगी।
सोमवार सुबह मिस्त्री मार्केट में किसी दुकानदार ने कचरा जलाया और कचरा जलने पर आग की लपटें तेज हो गई और उसी में से चिंगारी निकल कर पास में बने इलैक्ट्रोनिक्स गौदाम में जा पहुंची जिससे अचानक गौदाम में आग लग गई और गौदाम में रखा लाखों रूपये का इलैक्ट्रोनिक्स सामान कुछ ही समय में जल कर राख हो गया। नगरपालिका में सूचना देकर दमकल बुलानी चाहिए लेकिन मौके पर दमकल को ऑपरेट करने वाले दोनों कार्मिक ही नदारद मिले और पता चला कि बिना बताये वे अनुपस्थित हैं और इसकी जानकारी नगरपालिका प्रशासन को नहीं है। क्या यही व्यवस्था हमेशा इसी तरह बनी रहेगी या फिर कोई सुधार होगा, ये सवाल खाजूवाला की जनता पूछना चा रही है नगरपालिका प्रशासन से। काफी वर्षों से खाजूवालावासियों की मांग रही थी कि खाजूवाला में दमकल होनी चाहिए। किसी तरह से नगर निगम बीकानेर से दमकल मिल गई, लेकिन उसका दम इस तरह से निकलेगा, ये आमजन को पता नहीं था। सोमवार सुबह इलैट्रोनिक्स गोदाम में आग लगने पर दमकल की आवश्यकता पड़ी तो पता चला कि दमकल का खुद का ही दम निकला हुआ है और उसके ऑपरेटर ही गायब हैं, तो विपदा आने पर आखिर ऐसी स्थिति में दमकल को ऑपरेट कौन करे। भला हो बीएसएफ का जिन्होंने टैंकरों और मण्डीवासियों के सहयोग से आग पर काबू पा लिया गया। अगर कभी कोई बड़ा हादसा हो जाये तो नगरपालिका की दमकल के भरोसे शायद कुछ नहीं होगा क्योंकि दिन भर सोशल मीडिया पर इसी बात को लेकर चर्चा होती रही कि दमकल का खुद का दम निकला हुआ है और उसे ऑपरेट करने वालों का नगरपालिका प्रशासन को ही पता नहीं है कि कार्मिक कहां है। खाजूवाला नगरपालिका बने हुए चार वर्ष हो चुके हैं लेकिन स्वयं की एक दमकल ना होना भी प्रशासन और सरकार पर सवालिया निशान है। अगर दमकल समय पर पहुंचती तो शायद दुकानदार का इलैक्ट्रोनिक्स सामान जलने से बच जाता लेकिन जब कुए में भांग मिल जाये तो ऐसा ही होता है। शायद खाजूवाला का कोई धणी-धोरी नहीं है अन्यथा ऐसी व्यवस्था ना होती। स्थानीय विधायक ने विधानसभा में भी दमकल गाड़ी का मुद्दा उठाया था, तब जाकर नगर निगम बीकानेर से ये पुरानी दमकल मिली थी, जिससे चलाने वाले भी मौके से नदारद मिले, ऐसे में दमकल मिलना या ना मिलना बराबर है। जिस जोश और उत्साह के साथ खाजूवाला को नगरपालिका का दर्जा मिला था, उस जोश के अनुसार मण्डीवासियों को आजतक वो सुविधाऐं नहीं मिली जो मिलनी चाहिए थी। अब सवाल उठता है कि जिस दुकानदार को लाखों रूपये का सामान जलकर राख हो गया आखिर उसको मुआवजा कौन देगा।
Bikaner, Bikaner | Jun 22, 2026