जिलाधिकारी पुलकित गर्ग की सहजता ने जीता जनता का दिल; कलेक्ट्रेट परिसर में गाड़ी रोककर सुनी दूर-दराज से आए ग्रामीणों की पीड़ा
सड़क पर ही लग गई जन अदालत: जब जनता के बीच पहुंचे जिले के मुखिया
यह तस्वीर व्यवस्था के उस मानवीय चेहरे को बयां करती है, जिसे देखने के लिए आम जनता अक्सर तरसती है। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग जब अपनी सरकारी गाड़ी में बैठकर किसी प्रशासनिक कार्य के लिए कलेक्ट्रेट से बाहर निकल रहे थे, तभी उनकी नजर वहां खड़े कुछ मायूस और थके हुए ग्रामीणों पर पड़ी। एक आम प्रशासनिक ढर्रे में शायद गाड़ी आगे बढ़ जाती, लेकिन डीएम पुलकित गर्ग ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए तुरंत अपनी गाड़ी को रुकवा दिया। वे गाड़ी से उतरे और सुरक्षा घेरे को दरकिनार करते हुए सीधे ग्रामीणों के बीच जा पहुंचे। जिलाधिकारी को अपने इतने करीब और इस सहज रूप में देखकर ग्रामीणों की आंखों में उम्मीद की एक नई चमक आ गई।
बौना पुरवा के ग्रामीणों की दर्दभरी दास्तां और 'मसीहा' की भूमिका
ये ग्रामीण कई किलोमीटर का लंबा और थका देने वाला सफर तय करके बौना पुरवा गाँव से आए थे। वे अपने हक और अपनी जमीन से जुड़े चकबंदी के एक पेचीदा मामले को लेकर जिलाधिकारी से गुहार लगाने पहुंचे थे। ग्रामीण इलाकों से आने वाले इन सीधे-साधे लोगों के लिए कलेक्ट्रेट तक का सफर ही किसी चुनौती से कम नहीं होता। बदकिस्मती से, जब तक वे पहुंचे, तब तक काफी विलंब हो चुका था। उन्हें डर था कि अब शायद साहब से मुलाकात नहीं हो पाएगी और उन्हें बिना किसी समाधान के खाली हाथ लौटना पड़ेगा।
लेकिन जिलाधिकारी की सजगता ने उनकी इस चिंता को पल भर में दूर कर दिया। जैसा कि वीडियो में साफ देखा जा सकता है, डीएम पुलकित गर्ग ने परिसर में ही खड़े होकर बेहद धैर्य और आत्मीयता के साथ ग्रामीणों के कागजात देखे और उनकी एक-एक बात को सुना। उन्होंने न सिर्फ उनकी समस्या को समझा, बल्कि उन्हें त्वरित और न्यायसंगत कार्रवाई का पूर्ण आश्वासन भी दिया।
क्यों हो रही है इस 'सरलता' की चौतरफा तारीफ?
एक ग्रामीण के लिए जिला मुख्यालय आना सिर्फ समय का नुकसान नहीं होता, बल्कि उनकी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा भी इसमें खर्च हो जाता है। अगर उस दिन डीएम साहब गाड़ी न रोकते, तो इन ग्रामीणों का पूरा दिन, उम्मीदें और मेहनत की कमाई, सब कुछ मिट्टी में मिल जाता।
"प्रशासन जब शासक नहीं, सेवक की भूमिका में आता है, तो जनता का लोकतंत्र पर भरोसा और गहरा हो जाता है।"
जिलाधिकारी पुलकित गर्ग की इस सरलता और संवेदनशीलता ने न केवल उन ग्रामीणों का दिन और पैसा खराब होने से बचा लिया, बल्कि उनका दिल भी जीत लिया। सोशल मीडिया से लेकर आम गलियारों तक, जिले के मुखिया के इस जमीनी और आत्मीय व्यवहार की जमकर सराहना हो रही है। लोग कह रहे हैं कि काश, हर अधिकारी के भीतर जनता के प्रति ऐसी ही सहहानुभूति और कर्तव्यबोध हो।
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