रसोई गैस सिलिंडरों की बढ़ती मांग और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के बीच श्रीनगर स्थित आंचल दुग्ध डेयरी का बायोगैस प्लांट क्षेत्र के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। डेयरी परिसर में स्थापित बायोगैस प्लांट लगभग तैयार हो चुका है और जल्द ही नियमित उत्पादन शुरू होने जा रहा है। प्लांट से प्रतिदिन लगभग एक हजार किलो (एक टन) बायोगैस उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
इस प्लांट के संचालन के लिए प्रतिदिन करीब 400 क्विंटल गोबर की आवश्यकता होगी। इसके लिए डेयरी प्रबंधन ने 32 दुग्ध उत्पादन समितियों के 602 पशुपालकों से संपर्क किया है। डेयरी पशुपालकों से 1.50 रुपये प्रति किलो की दर से गोबर खरीदेगी, जिससे उन्हें दूध के साथ अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिलेगा।
90 के दशक में स्थापित आंचल दुग्ध डेयरी अब अपनी आय बढ़ाने और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। डेयरी परिसर में बने बायोगैस प्लांट का ट्रायल सफल रहा। ट्रायल के दौरान प्लांट से उत्पादित गैस से चूल्हा जलाकर भोजन तैयार किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा।
यह श्रीनगर गढ़वाल में पहला अवसर होगा जब व्यवसायिक स्तर पर इतनी बड़ी मात्रा में बायोगैस का उत्पादन किया जाएगा। डेयरी प्रबंधन का मानना है कि यह परियोजना स्थानीय स्तर पर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी पहल साबित होगी। इससे न केवल रसोई गैस का विकल्प मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
सिलिंडर रिफिलिंग सुविधा भी मिलेगी
डेयरी प्रबंधन बायोगैस सिलिंडर रिफिलिंग व्यवस्था शुरू करने की तैयारी में है। पहले चरण में 2 किलो और 5 किलो क्षमता के बायोगैस सिलिंडर उपलब्ध कराने की योजना है। इससे लोगों को एलपीजी का सस्ता विकल्प मिलेगा और गैस सिलिंडर की किल्लत से राहत मिल सकेगी।
पहले चरण में 18 उपभोक्ताओं को कनेक्शन
उत्तराखंड सहकारी डेयरी फेडरेशन के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने प्लांट की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। प्रधान प्रबंधक श्रवण कुमार शर्मा ने बताया कि पहले चरण में 18 उपभोक्ताओं को कनेक्शन दिए जाएंगे। शुरुआत में डेयरी की आवासीय कॉलोनी को पाइपलाइन से जोड़ा जाएगा। साथ ही 300 से 500 मीटर की दूरी तक कनेक्शन विस्तार की योजना पर भी काम चल रहा है।
अर्थव्यवस्था और ऊर्जा दोनों को मिलेगा बल
यह परियोजना “वेस्ट टू एनर्जी” मॉडल का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है। गोबर जैसे जैविक अपशिष्ट का वैज्ञानिक उपयोग कर स्वच्छ ऊर्जा तैयार होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को प्रोत्साहित करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
आंचल डेयरी का यह मॉडल भविष्य में पूरे क्षेत्र के लिए स्थायी, किफायती और स्वच्छ ऊर्जा व्यवस्था का केंद्र बन सकता है। श्रीनगर के लोगों को जल्द ही सस्ता और पर्यावरण अनुकूल ईंधन मिलने की उम्मीद है।