## हिमाचल प्रदेश फ़सल विविधीकरण परियोजना: देहरा में पोषण जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन #dehra #kangralive
**ग्रामीण महिलाओं को मिला स्वास्थ्य और स्वाद का मंत्र; चुकंदर की खीर और लौकी के हलवे ने जीता दिल**
हिमाचल प्रदेश फ़सल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (HPCDP) चरण-II के अंतर्गत महिलाओं के स्वास्थ्य, खानपान और पोषण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण **'पोषण जागरूकता कार्यक्रम'** का आयोजन किया गया। यह विशेष कार्यक्रम खंड परियोजना प्रबंधन इकाई (BPMU), देहरा के द्वारा खंड परियोजना प्रबंधक डॉ विवेक कंवर की अगुवाई में कृषि विस्तार अधिकारी पुनीत शर्मा के द्वारा आयोजित किया गया, जिसका सीधा लाभ ग्रामीण अंचल की महिलाओं को मिला।
इस जागरूकता शिविर का आयोजन मुख्य रूप से दो स्थानों पर किया गया:
* **वहाब सिंचाई उप-परियोजना, चनौर**
* **वहाब सिंचाई उप-परियोजना, कनोल**
### 👩⚕️ विशेषज्ञ द्वारा पोषण संबंधी महत्वपूर्ण मार्गदर्शन
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर उचित जानकारी के अभाव में महिलाओं और बच्चों में कुपोषण या खून की कमी (एनीमिया) जैसी समस्याएँ देखने को मिलती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए इस कार्यक्रम में **पोषण विशेषज्ञ अर्चना सूद** ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की।
उन्होंने उपस्थित महिलाओं को निम्नलिखित विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं:
* **संतुलित आहार की आवश्यकता:** दैनिक भोजन में प्रोटीन, विटामिन्स, और मिनरल्स का सही संतुलन कैसे बनाए रखें।
* **स्थानीय उपज का महत्व:** खेतों में उगाई जाने वाली ताज़ी और मौसमी सब्जियों का स्वास्थ्य के लिए अधिकतम लाभ कैसे उठाएं।
* **महिलाओं और बच्चों का स्वास्थ्य:** बढ़ती उम्र के बच्चों और महिलाओं के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति के सरल उपाय।
### 🍲 स्वाद और सेहत का संगम: सिखाए गए पौष्टिक व्यंजन
कार्यक्रम का सबसे रोचक और व्यावहारिक हिस्सा वह रहा जब पोषण विशेषज्ञ द्वारा स्थानीय सब्जियों को स्वादिष्ट और पौष्टिक व्यंजनों में बदलने की विधियाँ साझा की गईं। अक्सर बच्चे साधारण सब्जियां खाने से कतराते हैं, ऐसे में महिलाओं को कुछ नायाब और स्वास्थ्यवर्धक रेसिपीज़ बताई गईं:
* **चुकंदर की खीर:** चुकंदर आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स का बेहतरीन स्रोत है। इसे खीर के रूप में बनाने की विधि सिखाई गई, जो शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने के साथ-साथ खाने में भी बेहद स्वादिष्ट होती है।
* **लौकी का हलवा:** फाइबर और आवश्यक खनिजों से भरपूर लौकी से तैयार हलवा एक बेहतरीन और पौष्टिक मीठा विकल्प (डेज़र्ट) है, जिसे सेहत को नुकसान पहुँचाए बिना त्योहारों या आम दिनों में खाया जा सकता है।
* **अन्य व्यंजन:** इसके अतिरिक्त, कई अन्य स्थानीय सब्जियों और अनाजों से तैयार होने वाले स्वास्थ्यवर्धक व्यंजनों की रेसिपी भी महिलाओं के साथ साझा की गई, ताकि उनके परिवार की थाली में विविधता और पोषण दोनों शामिल हो सकें।
### 🌱 परियोजना का उद्देश्य और प्रभाव
फ़सल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना का मुख्य उद्देश्य केवल किसानों की नकदी फसलों के माध्यम से आय बढ़ाना ही नहीं है, बल्कि खेत से लेकर घर की रसोई तक **'पोषण सुरक्षा'** सुनिश्चित करना भी है।
इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों के दूरगामी प्रभाव होते हैं:
1. **स्वास्थ्य के प्रति चेतना:** महिलाएँ अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक और सजग होती हैं।
2. **फ़सल का सही उपयोग:** किसान परिवार अपनी ही उगाई गई सब्जियों और फसलों के पौष्टिक महत्व को समझकर उनका सही उपभोग करते हैं।
3. **महिला सशक्तिकरण:** नई जानकारियों और कौशल से लैस होकर महिलाएँ परिवार के निर्णय लेने की प्रक्रिया में मजबूत भूमिका निभाती हैं।
**निष्कर्ष:**
खंड परियोजना प्रबंधन इकाई, देहरा द्वारा चनौर और कनोल में उठाया गया यह कदम ग्रामीण स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है। महिलाओं ने इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पोषण विशेषज्ञ अर्चना सूद द्वारा दी गई व्यावहारिक और रोचक जानकारियों की खूब सराहना की।
Kangra, Kangra | Jun 23, 2026