एथलेटिक्स के करतब से हर किसी को कायल कर रहे स्यूली-तल्ली के राहुल भंडारी
पहाड़ की पगडंडियों से खेल के मैदान तक पहुंची प्रतिभा, खुद भी निखर रहे और युवाओं को भी दे रहे प्रशिक्षण
श्रीनगर गढ़वाल। पहाड़ की मिट्टी में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत है तो सिर्फ उन्हें सही दिशा, प्रशिक्षण और मंच देने की। इसी सोच को साकार करने में जुटे हैं पैठाणी क्षेत्र के स्यूली-तल्ली गांव निवासी राहुल भंडारी। अपनी शानदार एथलेटिक्स प्रतिभा और हैरतअंगेज करतबों के जरिए राहुल इन दिनों श्रीनगर में युवाओं के बीच खास पहचान बना रहे हैं।
श्रीनगर गढ़वाल के गंगा-दर्शन क्षेत्र के आसपास अक्सर राहुल भंडारी को एथलेटिक्स से जुड़े विभिन्न करतब करते देखा जा सकता है। उनकी शारीरिक दक्षता, संतुलन और अभ्यास को देखकर राहगीर भी कुछ पल ठहरकर उनकी प्रतिभा को निहारने लगते हैं। राहुल के करतब अब क्षेत्र में लोगों के आकर्षण का केंद्र बनने लगे हैं।
खुद मैदान में उतरकर युवाओं को दे रहे प्रशिक्षण:
राहुल की खासियत सिर्फ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करना ही नहीं, बल्कि वह क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी खेलों के प्रति जागरूक और प्रेरित कर रहे हैं। लट्ठी ग्रुप के संयोजक डॉ. आलोक नेगी के सानिध्य में राहुल युवाओं को नियमित रूप से प्रशिक्षण देते हैं। उनका उद्देश्य है कि पहाड़ के युवाओं को खेलों के लिए बेहतर अभ्यास और उचित मार्गदर्शन मिल सके तथा उनकी प्रतिभा को सही मंच हासिल हो।
बीपीएड की पढ़ाई ने बढ़ाया खेल के प्रति जुनून:
राहुल भंडारी ने राठ महाविद्यालय से बीपीएड (बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन) की डिग्री हासिल की है। खेल और शारीरिक फिटनेस के प्रति उनका जुनून तथा शैक्षणिक प्रशिक्षण उन्हें एक बेहतर खिलाड़ी के साथ-साथ प्रशिक्षक के रूप में भी पहचान दिला रहा है। वह युवाओं को केवल व्यायाम और एथलेटिक्स की तकनीक ही नहीं बताते, बल्कि नियमित अभ्यास, अनुशासन और फिटनेस के महत्व के प्रति भी जागरूक करते हैं।
पहाड़ की प्रतिभाओं को मंच देने का संकल्प:
ग्रामीण परिवेश से निकलकर अपनी मेहनत और लगन के दम पर राहुल भंडारी ने खेल के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की है। उनका मानना है कि पहाड़ के युवाओं में प्राकृतिक रूप से मेहनत करने की क्षमता और शारीरिक दक्षता होती है। यदि उन्हें सही प्रशिक्षण और अवसर मिले तो वे जिला और राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं।
राहुल की यह पहल क्षेत्र के उन युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो संसाधनों के अभाव में खेल के क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ पाते।