यमुनानगर, (राष्ट्रीय कदम) ब्यूरो- उपायुक्त प्रीति ने सचिवालय के सभागार में धान के अवशेषों को जलाने से रोकने के लिए एचपीएसआर के प्रबंध निदेशक और प्रशासन के अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने बैठक में बताया कि एचपीएसआर द्वारा रपौली गांव में सीबीजी प्लांट स्थापित किया जा रहा है। धान के अवशेषों का प्रयोग करने के लिए भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा सभी आवश्यक प्रबंध किए जा रहे हैं। फसल अवशेषों का प्रबंधन करने के लिए हरियाणा में सिरसा में पहला अवशेष प्रबंधन प्लांट लगाया गया है। जिले में सीबीजी परियोजनाओं का विकास जिले को स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार के प्लांट जींद व कैथल में लगाए गए हंै।
उपायुक्त ने बताया कि इस प्रकार के प्लांट लगने से 150 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से और 500 लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। इसके अलावा, पांच हजार एकड़ भूमि मालिकों को धान की भूसी सीधे खेतों से इकट्ठाकरने वालों को बेचकर अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। इससे लगभग पचास हजार मीट्रिक टन धान की पराली को जलाने से बचा जा सकेगा। उन्होंने बताया कि किसानों को जैविक खाद का भी उत्पादन होगा, जिससे किसान की रासायनिक खादों से मुक्ति मिलेगी। इससे स्थानीय लोगों को उद्यमिता के अवसर भी मिलेंगे, जैसे कि मानव संसाधन आपूर्ति और प्रबंधन, धान परिवहन, सामग्री परिवहन आदि।
उपायुक्त ने कहा कि जिले में कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट की स्थापना स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे कृषि अवशेष, गोबर एवं अन्य जैविक कचरे का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा और किसानों को पराली एवं कृषि अवशेषों के उचित प्रबंधन का विकल्प मिलेगा। उन्होंने कहा कि सीबीजी प्लांट से जैविक कचरे को उपयोगी ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है। इससे प्रदूषण कम करने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीबीजी प्लांट से जुड़े कार्यों के बारे किसानों और ग्रामीणों को इसके लाभों के बारे में जागरूक करें। उन्होंने कहा कि कृषि अवशेषों को जलाने के बजाय उनका वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक उपयोग किया जाए, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों को भी लाभ मिल सके।
प्रशासन का प्रयास रहेगा कि ऐसी परियोजनाओं को आवश्यक सहयोग एवं सुविधाएं समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने बताया कि फसल अवशेषों को जलाने से हमारा वातावरण दूषित होता है, जिसकी वजह से हमें कई प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए समय पर फसल अवशेषों का प्रबंधन होने से प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी और किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत भी बनेगा।
इस अवसर पर पूर्व आईएएस एवं एचपीएसआर के प्रबंध निदेशक दीपक अग्रवाल, रादौर के एसडीएम नरेन्द्र कुमार, सीबीजी के हरियाणा हैड संदीप कुमार, डीआईपीआरओ डॉ. मनोज कुमार, रादौर के तहसीलदार, बीडीपीओ सरस्वतीनगर सहित अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।
Jagadhri, Yamuna Nagar | Sep 12, 2026