उरई में कोचिंग सेंटर के बच्चों की लापरवाही!
स्कूटी में मारी टक्कर, महिला-बच्चा सड़क पर गिरे, फिर चले थप्पड़—VIDEO वायरल!
जालौन के उरई में नाबालिगों की बाइक ड्राइविंग पर उठे सवाल, आखिर कोचिंग जाने वाले बच्चों के हाथ में बाइक की चाबी किसने थमाई?
जनपद मुख्यालय उरई में मंगलवार, 13 अक्टूबर को शाम करीब 6:30 बजे जिला परिषद से अंबेडकर चौराहे की ओर जा रही एक महिला की स्कूटी में स्टार होटल के पास बाइक सवार दो नाबालिग बच्चों ने ओवरटेक करने के दौरान टक्कर मार दी।
बताया जा रहा है कि दोनों बच्चे कोचिंग सेंटर जाने वाले थे।
हादसे के बाद महिला और उसके साथ मौजूद बच्चा सड़क पर गिर पड़े।
गनीमत रही कि दोनों को हल्की चोटें आने की जानकारी है और कोई गंभीर हादसा नहीं हुआ।
टक्कर के बाद सड़क पर हंगामा, थप्पड़बाजी का वीडियो वायरल!
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और यातायात भी प्रभावित हुआ।
महिला ने उठकर पहले अपने बच्चे को संभाला और फिर बाइक सवार बच्चों को डांटा।
इसी दौरान कहासुनी बढ़ गई और महिला द्वारा बच्चों को थप्पड़ मारने की घटना सामने आई।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
कुछ देर बाद दोनों पक्ष अपने-अपने रास्ते चले गए।
सवाल तीखा है—नाबालिगों को बाइक कौन दे रहा है?
कोचिंग की उम्र में अगर बच्चे सड़कों पर बाइक लेकर निकल रहे हैं, तो उनके अभिभावकों की जिम्मेदारी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
आखिर क्या बच्चों को कोचिंग भेजने के नाम पर उन्हें दोपहिया वाहन सौंप देना उचित है?
क्या अभिभावकों को सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों की सुरक्षा की चिंता नहीं करनी चाहिए?
यह घटना यातायात नियमों के पालन और नाबालिगों के वाहन चलाने पर प्रभावी रोक लगाने की जरूरत को फिर सामने लाती है।
एक छोटी-सी लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
यातायात पुलिस से सवाल—चेकिंग का असर कहां?
जब यातायात पुलिस समय-समय पर वाहन चेकिंग अभियान चलाती है, तो नाबालिगों द्वारा बाइक चलाने के मामलों पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं दिख रहा?
क्या कोचिंग सेंटरों और स्कूलों के आसपास विशेष जांच अभियान चलाने की जरूरत नहीं है?
संबंधित विभाग को ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार कार्रवाई और जागरूकता दोनों पर ध्यान देना चाहिए।
वहीं, सड़क पर विवाद होने की स्थिति में मारपीट के बजाय कानूनी प्रक्रिया अपनाना भी जरूरी है।
वायरल वीडियो के आधार पर पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का बयान सामने आना बाकी है।
अब जवाबदेही तय होनी चाहिए!
नाबालिगों के हाथ में बाइक की चाबी थमाने वाले अभिभावकों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
कोचिंग सेंटरों के आसपास यातायात नियमों की निगरानी बढ़ाने और लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।
संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आने पर घटना की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
जनता से सवाल:
क्या नाबालिगों को बाइक देने वाले अभिभावकों पर सख्ती होनी चाहिए?
क्या कोचिंग सेंटरों के आसपास यातायात पुलिस को विशेष अभियान चलाना चाहिए?
अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।