हवन यज्ञ की पवित्र आहुतियों, वैदिक मंत्रोच्चार बीच श्रीराम कथा का भव्य समापन
हवन यज्ञ के पश्चात हुआ भंडारा-प्रसाद, दस दिवसीय श्रीराम कथा ने श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने की दी प्रेरणा
भिवानी। हवन कुंड में प्रज्वलित पवित्र अग्नि, उसमें अर्पित घी एवं सुगंधित हवन सामग्री की आहुतियों से उठती मनमोहक महक, वातावरण में गूंजते वैदिक मंत्र और श्रद्धालुओं के मुख से निकलते ‘जय श्रीराम’ के जयघोष के बीच आज अखिल भारतीय श्री दादू सेवक समाज के तत्वावधान में आयोजित भव्य श्रीराम कथा का विधिवत समापन हो गया। हवन के दौरान यजमानों नेे मंत्रों का शुद्धि से उच्चारण कर माहौल को भक्तिमय कर डाला। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पूर्ण श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ आहुतियां अर्पित कर प्रभु श्रीराम से समस्त संसार के कल्याण, परिवारों में सुख-समृद्धि, समाज में सद्भाव और विश्व में शांति बनाए रखने की प्रार्थना की। हवन से उठती पवित्र सुगंध और मंत्रोच्चार की आध्यात्मिक ध्वनि ने पूरे परिसर को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो हवन की प्रत्येक आहुति के साथ श्रद्धालु अपने मन के विकारों, नकारात्मक विचारों और जीवन की कठिनाइयों को प्रभु श्रीराम के चरणों में समर्पित कर रहे हों। स्थानीय राजश्री बैंक्वेट हॉल में 11 से 20 अक्टूबर तक आयोजित इस दस दिवसीय श्रीराम कथा में पूज्य संत रामझूलन दास जी महाराज के मुखारविंद से श्रद्धालुओं ने प्रभु श्रीराम के दिव्य चरित्र, उनकी मर्यादा, त्याग, करुणा, कर्तव्यनिष्ठा और धर्मपरायण जीवन से जुड़े प्रसंगों का श्रवण किया। कथा के समापन दिवस पर श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखते ही बनता था। हवन यज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से आहुतियां अर्पित करते हुए धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता की।
पूज्य संत रामझूलन दास जी महाराज के श्रीमुख से सुनाए गए प्रसंगों ने भक्तों को प्रभु श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान किया। इस दौरान संत श्री ने अपने श्रीमुख से बताया कि प्रभु श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोडऩा चाहिए। माता-पिता के प्रति सम्मान, परिवार के प्रति समर्पण, मित्रता में निष्ठा, वचनों का पालन, कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता और समाज के प्रति उत्तरदायित्व जैसे गुण प्रत्येक व्यक्ति के जीवन को श्रेष्ठ बनाते हैं। श्रीराम कथा का मूल संदेश यही है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसका वास्तविक स्वरूप व्यक्ति के आचरण, व्यवहार और विचारों में दिखाई देता है। जब मनुष्य प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारता है, तब परिवार में प्रेम, समाज में सद्भाव और जीवन में नैतिकता का विस्तार होता है। कथा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने इन प्रेरणादायी संदेशों को आत्मसात करते हुए धर्म, सेवा और मानवता के मार्ग पर आगे बढऩे की भावना व्यक्त की।
कथा आयोजक अखिल भारतीय श्री दादू सेवक समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने कहा कि इन दस दिनों के दौरान पूज्य संत रामझूलन दास जी महाराज ने अपनी अमृत वाणी से छोटी काशी भिवानी को प्रभु श्रीराम के नाम और भक्ति रस से गुंजायमान बनाए रखा। संतश्री के मुखारविंद से प्रवाहित श्रीराम कथा ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद प्रदान करने के साथ-साथ प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा दी। उन्होंने इस दिव्य एवं भव्य आयोजन के लिए संतश्री के प्रति कोटि-कोटि आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह छोटी काशी के श्रद्धालुओं के लिए परम सौभाग्य की बात है कि उन्हें दस दिनों तक संतश्री के श्रीमुख से प्रभु श्रीराम की महिमा का रसपान करने का अवसर प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री वासुदेव शर्मा, अधिवक्ता शिवरत्न गुप्ता, प्राईवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष रामअवतार शर्मा, राधेश्याम बुवानीवाला, सुशील बुवानीवाला, प्रदीप बुवानीवाला, जवाहर मित्ताथलिया, मीनू अग्रवाल
बॉक्स:- हवन यज्ञ के अनुष्ठान के पश्चात भंडारा-प्रसाद का आयोजन किया गया। भंडारे का शुभारंभ प्रभु श्रीराम को भोग लगाकर किया गया। इस दौरान नगर से उमड़ें श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया और आयोजन की मंगलमय पूर्णता पर प्रसन्नता व्यक्त की।