पौड़ी के पहले डिप्लोमा NIS एथलेटिक्स कोच बने विकास शाह
LNIPE के PGDSC डिप्लोमा में A ग्रेड के साथ टॉप-5 में बनाई जगह, पिथौरागढ़ में इंटर्नशिप में 99/100 अंक हासिल कर A+ ग्रेड
श्रीनगर गढ़वाल के युवा एथलेटिक्स प्रशिक्षक विकास शाह ने खेल जगत में जिले का नाम रोशन करते हुए बड़ी उपलब्धि हासिल की है। लक्ष्मीबाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजुकेशन (LNIPE) के PGDSC Diploma in Sports Coaching 2025-26 का फाइनल परिणाम घोषित हो गया है। इसमें विकास शाह ने A ग्रेड हासिल करने के साथ ही टॉप-5 में जगह बनाई है। इस उपलब्धि के साथ वह पौड़ी जिले के पहले डिप्लोमा NIS एथलेटिक्स कोच बनने में सफल रहे हैं।
विकास शाह ने एथलेटिक्स कोचिंग के प्रतिष्ठित डिप्लोमा पाठ्यक्रम को शानदार प्रदर्शन के साथ पूरा किया। इसके साथ ही उन्होंने आर्मी पब्लिक स्कूल, पिथौरागढ़ में अपनी इंटर्नशिप भी उत्कृष्ट अंकों के साथ पूरी की। इंटर्नशिप में विकास ने 100 में से 99 अंक हासिल करते हुए A+ ग्रेड प्राप्त किया।
देशभर से सिर्फ 20 अभ्यर्थियों का होता है चयन:
LNIPE के एथलेटिक्स डिप्लोमा कोर्स में हर वर्ष पूरे देश से करीब 20 अभ्यर्थियों का चयन किया जाता है। ऐसे प्रतिष्ठित पाठ्यक्रम में टॉप-5 में स्थान बनाना विकास शाह की मेहनत, खेल ज्ञान और प्रशिक्षण क्षमता को दर्शाता है। उनकी इस उपलब्धि से श्रीनगर गढ़वाल सहित पौड़ी जिले के खेल प्रेमियों में खुशी का माहौल है।
गुरु अनूप बिष्ट ने जताई खुशी :
विकास शाह की सफलता पर उनके गुरु एवं उत्तराखंड के द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित एथलेटिक्स कोच अनूप बिष्ट ने उन्हें और उनके परिवार को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विकास ने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में विकास के नेतृत्व और मार्गदर्शन में उत्तराखंड एवं श्रीनगर के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।
पूनम जैन ने रखी थी विकास की खेल यात्रा की नींव : विकास शाह की इस उपलब्धि पर उनकी शुरुआती मार्गदर्शक एवं व्यायाम अध्यापिका पूनम जैन ने भी हर्ष व्यक्त किया। खेल के शुरुआती दौर में विकास की प्रतिभा को निखारने और उनकी खेल यात्रा की नींव मजबूत करने में पूनम जैन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने विकास को इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
विकास शाह की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और गुरुजनों के लिए गौरव का विषय है, बल्कि श्रीनगर गढ़वाल और पौड़ी जिले के उभरते खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी है।