स्मृति द्वार के पिलर उखाड़ने पर बवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष और सपा कार्यकर्ताओं में आमने-सामने की स्थिति
कप्तानगंज। एनएच-27 तिलकपुर से बढ़नी, दुधौरा, गंगापुर होते हुए गोपियापुर नगर जाने वाले मार्ग पर स्वर्गीय श्री जनेश्वर मिश्र के नाम से प्रस्तावित स्मृति द्वार को लेकर विवाद गहरा गया है। आरोप है कि स्मृति द्वार के निर्माण के लिए तैयार किए गए फाउंडेशन और पिलरों को भाजपा जिला अध्यक्ष विवेकानंद मिश्रा ने अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचकर उखाड़कर फेंक दिया। घटना के बाद गांव में तनाव और तनातनी का माहौल बन गया।
बताया जा रहा है कि स्मृति द्वार का निर्माण कप्तानगंज विधायक अतुल चौधरी की निधि से कराया जाना प्रस्तावित था और इसके लिए फाउंडेशन तैयार कर पिलर खड़े किए गए थे। भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्रा के विरोध के बाद मामला विवादित हो गया। ग्रामीणों का आरोप है कि राजनीतिक विरोध के चलते निर्माणाधीन स्मृति द्वार के पिलरों को नुकसान पहुंचाया गया।
घटना की जानकारी मिलते ही समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी के कप्तानगंज नगर पंचायत अध्यक्ष चंद्र प्रकाश चौधरी, सपा जिला प्रवक्ता पंकज मिश्रा, प्रवीण मिश्रा, अंबिका मिश्रा, सूर्यमणि मिश्रा, कांड मिश्रा, मनोज मिश्रा, पवन कुमार, समिति त्रिपाठी, सत्यम मिश्रा, पीयूष पांडेय, विधानसभा अध्यक्ष कप्तानगंज रण बहादुर यादव, राकेश चौधरी, विजय दुबे, विशाल पांडेय और दीपक मिश्रा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
मामले को लेकर ग्रामीणों में भी नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक मार्ग पर स्वीकृत विकास कार्य को राजनीतिक कारणों से रोकना उचित नहीं है। वहीं, विवाद बढ़ने के बाद स्थानीय स्तर पर माहौल को शांत कराने के प्रयास भी शुरू हो गए हैं।
भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्रा ने पत्रकारों से बातचीत में ने कहा कि वह किसी भी समाजवादी पार्टी के नेता के नाम से स्मृति द्वार नहीं बनने देंगे और यह उनकी ग्राम सभा है।
नगर पंचायत अध्यक्ष चंद्र प्रकाश चौधरी ने कहा कि मामले में प्रशासन को निष्पक्षता से जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए तथा विकास कार्यों को लेकर किसी भी प्रकार का विवाद कानून-व्यवस्था के दायरे में ही सुलझाया जाना चाहिए।
सपा जिला प्रवक्ता पंकज मिश्रा ने कहा कि स्वर्गीय जनेश्वर मिश्र जैसे समाजवादी विचारधारा के महापुरुष के नाम पर प्रस्तावित स्मृति द्वार को राजनीतिक विरोध के चलते तोड़ा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने प्रशासन से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और स्मृति द्वार का निर्माण पुनः शुरू कराने की मांग की।
घटना के बाद क्षेत्र में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई और स्मृति द्वार के निर्माण को लेकर आगे उठाए जाने वाले कदमों पर है।
Basti, Basti | Aug 24, 2026