छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर शहर में निजी अस्पतालों की मनमानी और प्रशासनिक उदासीनता आम जनता के लिए जी का जंजाल बन चुकी है। रसूखदार अस्पतालों में पार्किंग व्यवस्था न होना अब सिर्फ ट्रैफिक जाम नहीं, बल्कि एक गंभीर मानवीय संकट है। अस्पतालों के बाहर बेतरतीब खड़े वाहनों के कारण रोजाना घंटों लग रहे लंबे जाम में आम राहगीर तो परेशान हैं ही, जिंदगी और मौत से जूझते मरीजों को ले जा रही एम्बुलेंस भी फंस रही हैं। विडंबना देखिए कि स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम जमीनी हकीकत देखने के बजाय, दफ्तरों में बैठकर पार्किंग की 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) रेवड़ियों की तरह बांट रहे हैं। जिन अस्पतालों के पास मौके पर साइकिल खड़ी करने की जगह नहीं है, वे कागजों पर फुल-पार्किंग का दावा ठोक रहे हैं।
इस गंभीर लापरवाही पर चौतरफा घिरने के बाद अब प्रशासनिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। अम्बिकापुर की महापौर मंजूषा भगत ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का भरोसा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि बिना मौके के निरीक्षण के फर्जी एनओसी जारी की गई है, तो दोषी अस्पतालों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी। अब देखना यह होगा कि यह आश्वासन महज एक कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाता है या सचमुच शहर की सड़कों को इस जानलेवा जाम से मुक्ति मिलती है।
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