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बकरे ने दिए संकेत : क्या पश्मी के बाद अब छत्रधारी चालदा महासू महाराज का दिसंबर में उत्तराखंड के मशक गांव में होगा अगला पड़ाव? हालांकि मंदिर समिति की ओर से अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है ====== शिलाई के पश्मी से उत्तराखंड की ओर बढ़ा छत्रधारी चालदा महासू महाराज का बकरा, टौंस नदी पार कर उत्तराखंड में पहुंचा बकरा, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल =========. शिलाई (सिरमौर)। शिलाई क्षेत्र पश्मी गांव में विराजमान छत्रधारी चालदा महासू महाराज के में अगले पड़ाव को लेकर धार्मिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। परंपरा के अनुसार चालदा महासू महाराज का बकरा (घाडुआ) पश्मी गांव से हिमाचल-उत्तराखंड की सीमा पर बहने वाली टौंस नदी पार कर उत्तराखंड के मशक गांव पहुंच गया है। बकरा के मशक पहुंचने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे श्रद्धालु धार्मिक आस्था से जोड़कर देख रहे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जहां- जहां बकरा पहुंचता है, वहीं छात्रधारी चालदा महासू महाराज का अगला पड़ाव माना जाता है। चालदा महासू महाराज का अगला पड़ाव उत्तराखंड के मशक गांव में होगा। इसे लेकर महाराज के करींदे और श्रद्धालु भी मशक में पड़ाव की तैयारियों में जुट गए हैं। दिसंबर 2025 में छात्रधारी चालदा महासू महाराज उत्तराखंड के दशऊ से सिरमौर के पश्मी गांव पहुंचे थे। उस समय भी महाराज के आगमन से पहले बकरा पश्मी पहुंच गया था। धार्मिक परंपरा के अनुसार बकरा के संकेत को स्वीकार करते हुए चालदा महासू महाराज को भी अपना पड़ाव पश्मी गांव में करना पड़ा था। स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि चालदा महासू महाराज की यात्रा और पड़ाव का निर्धारण सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं के अनुसार होता है। बकरा को महाराज का अग्रदूत माना जाता है और उसके मार्ग का विशेष धार्मिक महत्व है। उत्तराखंड पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं महाराज के अगले पड़ाव और धार्मिक कार्यक्रमों पर टिकी हैं।

Ronhat, Sirmaur | Jul 19, 2026

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