अगर तुम चुप रहे,
तो वो छीन लेंगे
तुम्हारे खेतों से अन्न,
नदियों से पानी
और पहाड़ों से सुकून।
अगर तुम चुप रहे,
तो वो छीन लेंगे,
तुम्हारे बुग्यालों से रौनक,
जंगलों से हरियाली
और गांवों से खुशहाली।
अगर तुम चुप रहे,
तो वो काट देंगे
तुम्हारे पुरखों के लगाए जंगल,
बाँट देंगे पहाड़ों की छाती,
और बेच देंगे तुम्हारी विरासत।
अगर तुम चुप रहे,
तो आने वाली पीढ़ियाँ
सिर्फ तस्वीरों में देखेंगी
वो पहाड़,
जिन्हें बचाने की ज़िम्मेदारी
आज तुम्हारी थी।
अगर तुम चुप रहे,
तो इतिहास यह नहीं लिखेगा कि
पहाड़ उजड़ गए,
इतिहास यह लिखेगा कि
उस वक्त पहाड़ों के लोग चुप रहे।