नार्को-आर्म्स ड्रोन ड्रॉपिंग का मास्टरमाइंड राकेश प्रजापत बीकानेर पुलिस की गिरफ्त में, साथ ही 1.79 करोड़ की संपत्ति फ्रीज
#BreakingNews | बीकानेर जिला पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा ने बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ की गई दो बड़ी कार्रवाइयों की जानकारी दी। उन्होंने प्रेस वार्ता में मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित अवैध संपत्तियों को फ्रीज करने की कार्रवाई का खुलासा किया , वहीं दूसरी ओर नार्को-आर्म्स सिंडिकेट के मुख्य सरगना राकेश प्रजापत की गिरफ्तारी की जानकारी दी।
एसपी मृदुल कच्छावा ने बताया कि "ऑपरेशन नीलकंठ" अभियान के तहत संगठित अपराधियों और मादक पदार्थ तस्करों की अवैध कमाई से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 68एफ के तहत कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में सदर थाना क्षेत्र के आरोपियों सत्तार अली, उसके परिजनों और सहयोगियों की कुल एक करोड़ 79 लाख 5 हजार 609 रुपये की संपत्ति फ्रीज की गई है। पुलिस के अनुसार, आरोपित सत्तार अली और उसके पुत्रों के खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं में कुल 37 मामले दर्ज हैं, जबकि परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी कई मुकदमे लंबित हैं। पुलिस ने बताया कि ऐसे अन्य तस्करों की संपत्तियों की भी पहचान की जा रही है और जल्द ही उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।उन्होंने बताया कि बीकानेर पुलिस, साइबर सेल और खाजूवाला थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने नार्को-आर्म्स सिंडिकेट के मुख्य सरगना और 75 हजार रुपये के इनामी अपराधी राकेश प्रजापत को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर बीकानेर रेंज आईजी द्वारा 50 हजार रुपये और पाली पुलिस द्वारा 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस के अनुसार, राकेश प्रजापत के खिलाफ राजस्थान, पंजाब, गोवा और कर्नाटक सहित विभिन्न राज्यों में कुल 22 मामले दर्ज हैं। वह अप्रैल 2026 में बीकानेर में हुई 75 करोड़ रुपये की हेरोइन ड्रोन ड्रॉपिंग और 2 अगस्त को खाजूवाला में हुई नार्को-आर्म्स ड्रोन ड्रॉपिंग का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। पुलिस ने बताया कि आरोपी पिछले 13 महीनों से फरार चल रहा था और गिरफ्तारी से बचने के लिए अलग-अलग राज्यों में अपनी पहचान बदलकर रह रहा था। आखिरकार पुलिस टीम ने उसे पंजाब से जोधपुर जाते समय गिरफ्तार कर लिया।