“रक्षक – बागेश्वर धाम” सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव बनती जा रही है।
इसके पहले अध्याय की प्रार्थना और Workbook ने पाठकों को इस तरह जोड़ा है कि जिसने भी इसे पढ़ा, उसने अपने परिवार और प्रियजनों के लिए भी इसकी प्रतियां मंगवाईं।
शायद यही कारण है कि जहाँ आमतौर पर एक किताब पूरे परिवार में पढ़ी जाती है, वहीं “रक्षक” एक ही घर में कई बार खरीदी जा रही है।
यह शायद पहली ऐसी पुस्तक है जिसे लोग केवल पढ़ नहीं रहे, बल्कि उसके साथ लिख भी रहे हैं।
लेखक का कहना है—
“पहले अध्याय की प्रार्थना पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ कीजिए, फिर जीवन में होने वाले बदलाव को स्वयं अनुभव कीजिए।”
Amazon पर उपलब्ध।