नियम कायदों की अर्थी और 'शराब तंत्र' के आगे लाचार चंदेरी का प्रशासन
शासन-प्रशासन की रीढ़ तब कमजोर होने लगती है, जब कानून की किताबें दफ्तरों की अलमारियों में बंद हो जाती हैं और सड़कों पर माफियाओं का 'समानांतर सिस्टम' चलने लगता है। चंदेरी की पुरानी सब्जी मंडी के पास स्थित कलारी नंबर एक (राजेंद्र कुमार राय) के नाम से जो वीडियो सामने आया है, वह केवल एक शराब दुकान की मनमानी नहीं है, बल्कि चंदेरी के समूचे प्रशासनिक तंत्र की लाचारी और नाकामी का जीता-जागता दस्तावेज है।
यह लेख किसी घटना की सूचना मात्र नहीं है, बल्कि उस सोए हुए सिस्टम के जमीर को झकझोरने का प्रयास है, जो रसूखदारों के आगे नतमस्तक हो चुका है।
डिजिटल युग में 'अवैधता' का आधुनिक चेहरा
वीडियो में जो कुछ भी दिखाई दे रहा है, वह हैरान करने वाला भी है और शर्मनाक भी। दुकान बाहर से बंद है—यह दिखाने के लिए कि कानून का पालन हो रहा है। लेकिन जैसे ही कोई ग्राहक आवाज लगाता है, शटर के नीचे से एक 'क्यूआर कोड स्कैनर' बाहर आता है। डिजिटल इंडिया के इस दौर में तकनीक का ऐसा दुरुपयोग शायद ही कहीं देखने को मिले। ऑनलाइन भुगतान होते ही शराब की बोतलें बाहर आ जाती हैं।
यह चालाकी साबित करती है कि दुकान संचालक को इस बात का पूरा अहसास है कि वह जो कर रहा है, वह अवैध है। लेकिन उसे यह भी पता है कि प्रशासन की आंखें कितनी गहरी नींद में हैं। जब आबकारी और पुलिस विभाग की नाक के नीचे 24 घंटे कलारी खुल रही हो, तो जनता यह मानने पर मजबूर हो जाती है कि यह खेल बिना 'ऊपरी सह' के मुमकिन नहीं है। सारे नियम-कायदे इस कलारी संचालक ने खूंटी पर टांग दिए हैं और व्यवस्था मूकदर्शक बनी बैठी है।
नौनिहालों के भविष्य पर 'मधुशाला' का साया
इस पूरे घालमेल का सबसे विचलित करने वाला पहलू इसका भूगोल है। इस कलारी से महज 100-200 मीटर की दूरी पर हायर सेकेंडरी स्कूल स्थित है। एक तरफ सरकारें 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' और 'स्वस्थ बचपन' के नारे देती हैं, वहीं दूसरी तरफ स्कूल की चौखट के पास चौबीसों घंटे शराब का यह तमाशा चल रहा है।
जब बच्चे स्कूल पढ़ने जाएंगे, तो उनके स्वागत के लिए ज्ञान की बातें नहीं, बल्कि इस कलारी के बाहर लगने वाला शराबियों का मजमा होगा। प्रशासन ने बिना सोचे-समझे इस संवेदनशील इलाके में कलारी की परमिशन कैसे दे दी? क्या अधिकारियों को यह समझ नहीं आता कि इस माहौल का बच्चों के कोमल दिमाग पर क्या असर पड़ेगा? क्या चंद रुपयों के राजस्व या रसूख के सामने हमारे बच्चों का भविष्य इतना सस्ता हो गया है?
कब टूटेगी प्रशासन की यह रहस्यमयी खामोशी?
यह स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है:
आखिर सिस्टम इन कलारी संचालकों के आगे इतना बेबस क्यों दिखाई दे रहा है?
क्या चंदेरी का आबकारी और पुलिस महकमा इतना कमजोर हो चुका है कि वह समय सीमा के बाद बंद शटर के पीछे चल रहे इस खेल को नहीं देख पा रहा?
क्या किसी बड़ी दुर्घटना या जन-आक्रोश के फूटने के बाद ही अधिकारी अपनी कुंभकर्णी नींद से जागेंगे?
एक कड़वी सच्चाई: जब रसूखदार कानून को अपनी जेब में लेकर घूमने लगें और रक्षक ही मौन साध लें, तो समाज में अराजकता का जन्म होता है। चंदेरी में यही हो रहा है।
निष्कर्ष: अब आर-पार की लड़ाई जरूरी है
चंदेरी की जनता अब इस लाचार और घुटने टेक चुके सिस्टम को और बर्दाश्त नहीं करेगी। यह लेख प्रशासन के लिए एक चेतावनी भी है और आईना भी। यदि समय रहते इस 24 घंटे चलने वाली कलारी पर लगाम नहीं कसी गई, और इसे स्कूल के पास से स्थानांतरित नहीं किया गया, तो यह मान लिया जाएगा कि चंदेरी में कानून का राज नहीं, बल्कि 'शराब तंत्र' का राज चलता है।
अब देखना यह है कि इस कड़वे सच के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी अपनी साख बचाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई करते हैं, या फिर हमेशा की तरह अपनी आंखें मूंदकर किसी बड़े बवाल का इंतजार करते हैं।
Dr Mohan Yadav CM Madhya Pradesh Jyotiraditya M Scindia Jansampark Madhya Pradesh Home Department of Madhya Pradesh Gwalior Commissioner Collector Ashok Nagar PRO Ashok Nagar SP Ashoknagar - M.P. SDM Chanderi